योगदा सत्संग पाठमाला के नये हिन्दी संस्करण का लोकार्पण पांच जनवरी को, परमहंस योगानन्द जी द्वारा सिखाई गई प्रविधियों व आध्यात्मिक जीवन को अपनाना अब और होगा आसानः ईश्वरानन्द

योगदा सत्संग आश्रम में आज आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ योगदा संन्यासी स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने कहा कि उन्हें इस बात को बताते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि हिन्दी भाषी योगदा भक्तों के लिये योगदा सत्संग पाठमाला का नया हिन्दी संस्करण परमहंस योगानन्द जी के जन्मोत्सव यानी पांच जनवरी 2024 को सर्वसुलभ हो जायेगा।

उन्होंने इस पाठमाला की विशेषताओं को बताते हुए कहा कि परमहंस योगानन्द जी द्वारा सिखाई गई प्रविधियों और आध्यात्मिक जीवन के तौर-तरीकों को सीखना, आत्मसात करना और अभ्यास करना इससे बहुत ही सरल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि योगदा सत्संग पाठमाला का लोकार्पण नोएडा में पांच जनवरी को एक भव्य कार्यक्रम में किया जायेगा, क्योंकि पांच जनवरी का दिन प्रत्येक योगदा भक्त या योगदा संन्यासियों के लिए बहुत ही खास होता है।

उन्होंने कहा कि इस पाठमाला में परमंहस योगानन्दजी के लेखन और कक्षाओं से ली गई नवीन सामग्री का बहुत ही सुंदर ढंग से समावेश किया गया है, साथ ही क्रियायोग समेत वाईएसआर/एसआरएफ की ध्यान प्रविधियों और कई अन्य विषयों पर स्पष्ट और अधिक जानकारी इसमें उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने कहा कि एसआरएफ/वाईएसएस पथ के आवश्यक सिद्धांतों को और अधिक सुसंगठित और संकेन्द्रित के रुप में इसमें प्रस्तुत किया गया है।

स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने पत्रकारों को बताया कि पूर्व में 182 पाठमालाएं हुआ करती थी, जिसे प्राप्त करने में 45 माह लग जाया करते थे, पर अब वैसा नहीं होगा। नये पाठ्यक्रम में सारे तथ्य मात्र 18 पाठमालाओं में ही पूर्ण हो जायेंगे, जिसे प्राप्त करने में अब मात्र नौ महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि नयी पाठमाला में पूज्य गुरुदेव की कुछ अप्रकाशित आलेख भी सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि नई पाठमाला को पूर्व की पाठमाला की अपेक्षा अत्यधिक आकर्षक व रुचिकर बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि नई पाठमाला अब एप्प पर भी सुलभ हैं, जिसे योगदा भक्त अब अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकेंगे। मतलब साफ है कि पाठमाला को डिजिटल प्रारुप में पढ़ने की सुविधा प्रदान कर दी गई है। परमहंस योगानन्द जी की ऑडियो रिकार्डिंग समेत हिन्दी में नई ऑडियो और वीडियो सामग्री भी मौजूद करा दी गई है। अब वाईएसएस की शक्ति संचार व्यायाम के अभ्यास के लिये चरणबद्ध निर्देशों के साथ वीडियो भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि पाठमाला में प्रस्तुत सामग्री को समझाने के लिये अन्य सहायक सामग्री जैसे – प्रेरणादायक व्याख्यान, अनुदेश और निर्देशित ध्यान की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है।

समाज सेवा के क्षेत्र में भी योगदा सत्संग आश्रम की भूमिका प्रशंसनीय

स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने यह भी कहा कि योगदा आध्यात्मिक उत्थान के लिए तो विशेष रुप से कार्य करती ही है, साथ ही समाज सेवा में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाती है। उन्होंने संवाददाताओं को याद दिलाया कि कोरोनाकाल में जब स्थितियां बिल्कुल विपरीत हो गई थी। योगदा संन्यासियों ने योगदा भक्तों के साथ मिलकर रांची से सटे उन-उन गांवों में पहुंचे, जहां कोई उस वक्त जाने का नाम नहीं ले रहा था। उस वक्त योगदा संन्यासियों ने भोजन के बड़े-बड़े पैकेट जिसमें चावल, दाल, सब्जियां, तेल-मसाले आदि मौजूद होते थे, उनके घरों तक पहुंचाया, ताकि उनके घरों में भी चूल्हें जल सकें, कोई भी व्यक्ति बिना भोजन किये न रह पाये।

उन्होंने कहा कि इसी दौरान कुछ निजी/सरकारी संस्थानों को बड़ी संख्या में चिकित्सकीय उपकरण भी पहुंचायें गये। सुदुरवर्ती इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि आज भी योगदा द्वारा विभिन्न गांवों में मेडिकल टीम भेजकर वंचितों/निर्धनों के बीच निशुल्क स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराकर, उनके बीच निःशुल्क दवाएं भी वितरित की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि रांची जिले के अनगड़ा ब्लॉक के कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में वाईएसएस ने बाल चिकित्सा उच्च निर्भरता इकाई (पीएचडीयू) को स्थापित किया है। प्राकृतिक आपदा के समय भी वाईएसएस द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में सहायता कार्य किया जाता है। उन्होंने कहा कि यही नहीं, हम योगदा सत्संग सोसाइटी के माध्यम से मैट्रिक व उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त करनेवाले होनहार/मेधावी छात्रों के बीच प्रत्येक वर्ष छात्रवृत्ति भी प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त जरुरतमंद छात्रों के बीच लैपटॉप एवं टेबलेट भी सुलभ कराते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल ही में वाईएसएस ने योगदा सत्संग विद्यालय के लिये 22 करोड़ की लागत से एक नये भवन परिसर तथा एक बहुउद्देशीय सभागार व कक्ष का निर्माण किया है। इस निर्माण कार्य मे भारत सरकार की ओर से आठ करोड़ की राशि भी सोसाइटी को प्राप्त हुई। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि योगदा सत्संग विद्यालय का नया भवन परिसर परमहंस योगानन्द जी द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत जैसे की प्रकृति के निकट रहते हुए अध्ययन करने के विचार को ध्यान में रखते हुए प्राचीन गुरुकुल के आधार पर तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि योगदा सत्संग पूरे भारत में लड़कों व लड़कियों के लिए कुल 17 शिक्षण संस्थाएं चलाती है। उन्होंने यह भी बताया कि योगदा सत्संग सोसाइटी रांची में ही योगदा सत्संग अस्पताल चलाती है। जहां इस वर्ष अब तक ओपीडी में 23,297 रोगियों ने स्वास्थ्य लाभ लिये। 12,720 नेत्र रोगियों ने ओपीडी में नेत्र संबंधी स्वास्थ्य लाभ लिये। 1430 नेत्र-रोगियों के ऑपरेशन भी किये गये।

उन्होंने यह भी बताया कि 2024 में योगदा भक्तों की सुविधा के लिये 17 साधना संगम आयोजित किये जायेंगे। जिसमें रांची में आठ, नोएडा में चार, दक्षिणेश्वर में तीन और महाराष्ट्र के इगतपुरी में दो साधना संगम होंगे। उन्होंने कहा कि साधना संगम का मूल उद्देश्य साधकों के आध्यात्मिक मार्ग को गति प्रदान करना तथा प्रविधियों की शुद्धता का मूल्यांकण करना होता है।

उन्होंने कहा कि जल्द ही देश में योग के प्रसार तथा सुदृढ़ आध्यात्मिक वातावरण हेतु विभिन्न क्षेत्रों में 20 एक दिवसीय कार्यक्रम, 13 तीन दिवसीय कार्यक्रम, 5 दो दिवसीय कार्यक्रम तथा 3 रिट्रिट भी आयोजित किये जायेंगे। स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने बताया कि योगदा सत्संग मठ की ओर से, बच्चों में बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक अभिरुचि जागृत करने, मानवीय मूल्यों से युक्त करने, देश के प्रति सच्ची निष्ठा के साथ सुयोग्य नागरिक के निर्माण करने हेतु प्रत्येक रविवार को अलग से सत्संग एवं समर कैंप की व्यवस्था की जाती है।