होटवार जेल में बंद किन्नर लालू प्रसाद यादव पर फिदा, शादी का रख रहे प्रस्ताव

भाई मानना पड़ेगा, लालू प्रसाद यादव को, उन्हें सजा होने जा रहा है, जो जज सजा सुनाने जा रहा है, उससे भी वे हंसी-ठिठोली करने से नहीं चूकते, यहीं नहीं वे कोर्ट में बैठे उनलोगों को भी हंसाने से नहीं चूकते, जो बड़ी सावधानी बरतते हुए, न्यायालय की रिपोर्टिंग कर रहे हैं, या देख रहे है। आज उन्होंने जज शिवपाल सिंह को बताया कि जेल में किन्नर भी बंद है, उन लोगों से वे हाल-समाचार लेते रहते हैं, नजदीक आने पर किन्नर लोग शादी का प्रस्ताव रख देता है,

भाई मानना पड़ेगा, लालू प्रसाद यादव को, उन्हें सजा होने जा रहा है, जो जज सजा सुनाने जा रहा है, उससे भी वे हंसी-ठिठोली करने से नहीं चूकते, यहीं नहीं वे कोर्ट में बैठे उनलोगों को भी हंसाने से नहीं चूकते, जो बड़ी सावधानी बरतते हुए, न्यायालय की रिपोर्टिंग कर रहे हैं, या देख रहे है। आज उन्होंने जज शिवपाल सिंह को बताया कि जेल में किन्नर भी बंद है, उन लोगों से वे हाल-समाचार लेते रहते हैं, नजदीक आने पर किन्नर लोग शादी का प्रस्ताव रख देता है, फिर क्या था? लालू प्रसाद यादव के इन बातों को सुनकर पूरा कोर्ट रुम हंसे बिना नहीं रह सका।

लालू प्रसाद यादव  ने, जेल में बंद जजों की भी सुध ली। उन्होंने कहा कि जेल में दो जज भी बंद है, उन्हें उच्च श्रेणी की सुविधा देने का आदेश दे दिया जाय। लालू प्रसाद यादव ने जज से गुहार लगाया कि जो अवमानना की नोटिस जारी की गई है, उसको हुजूर खत्म कर दिया जाये। हम आपका अपमान कभी नहीं करेंगे।

यहीं नहीं लालू प्रसाद ने जज शिवपाल सिंह को दिमाग कूल रखने की सलाह दे डाली। उसी दौरान जज ने लालू से कहा कि आपके कई शुभचिंतक ऐसे है, जो आपके लिए अभी तक अनेक बार फोन कर चुके हैं, इस पर लालू प्रसाद का कहना था कि ऐसा तो हुजूर नही है, लेकिन कौन बदमाशी कर रहा है, इसका पता करेंगे। लालू ने कहा कि वे शांति से रहेंगे।

कमाल है, वक्त, वक्त की बात है, ये वहीं लालू प्रसाद यादव है, जो लोग 1990-2000 के लालू प्रसाद यादव को जानते होंगे। उस वक्त लालू प्रसाद यादव की बोल क्या होती थी? सभी जानते है। किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ एक शब्द भी बोल दे। पूरा बिहार लालू प्रसाद यादव के इशारों पर उठता-बैठता था, क्योंकि उस वक्त बिहार की जनता का लालू प्रसाद को आशीर्वाद प्राप्त था, पर जैसे-जैसे लालू प्रसाद यादव ने बिहार की जनता का विश्वास खोना प्रारंभ किया, स्थिति बद से बदतर होती गई। बिहार की भी और लालू प्रसाद यादव की भी।

भारत में या बिहार में, जब भी सामाजिक न्याय की बात होगी, लालू प्रसाद यादव का नाम सबसे ऊपर होगा। जो उन्होंने बिहार में सामाजिक न्याय की लड़ाईयां लड़ी या पिछड़े तबकों को, जो उन्होंने उपर उठाया, वह आज भी बिहार के उन तबकों में दिये की तरह जल रहा है, जो आज भी मानने को तैयार नही, कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले मामले में दोषी है। होटवार जेल के आस-पास लालू प्रसाद यादव से मिलने के लिए बिहार से आये लोग, उनके शुभचिंतक व कार्यकर्ताओं का झूंड बताता है कि लालू का जादू आज भी बरकरार है।

लालू प्रसाद यादव से गलतियां हुई है, अन्य राजनीतिज्ञ भी गलतियां करते है, पर कुछ चालाक होते है, वे आसानी से बच जाते है, पर ऐसा नहीं कि लालू प्रसाद यादव चालाक नहीं है, पर वे ऐसी चालाकी में विश्वास नहीं करते, जो उन्हें नरेन्द्र मोदी की ओर ले जाता है, वे कल भी और आज भी भाजपा विरोध में सबसे पहली कतार के नेता है और हमें लगता है कि वे आनेवाले समय में भी रहेंगे।

जो लोग ये सोचते है कि लालू प्रसाद यादव को सजा सुनाये जाने के बाद बिहार में या अन्य स्थानों से लालू का जादू खत्म हो जायेगा। वे मुगालते में है। बिहार में एक बहुत बड़ा समुदाय लालू प्रसाद का अनुयायी बन चुका है। वह लालू प्रसाद के खिलाफ आज भी एक बात सुनना नहीं पसंद करता। हमें लगता है कि लालू प्रसाद जिस भी जेल में रहेंगे, वह जेल ही उनके लिए तीर्थस्थल का रुप धारण कर लेगा और जो राजद के नेताओं व कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा, ये अन्य राजनीतिक दलो को नहीं भूलना चाहिए।

Krishna Bihari Mishra

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