मैं भी 32, तू भी 32, सब कोई 32 हो जा, ले ले नौकरी झारखण्ड में, राज बेच के सो जा

मैं भी 32, तू भी 32, सब कोई 32 हो जा, ले ले नौकरी झारखण्ड में, राज बेच के सो जा। गजब है रघुवर दास और गजब है उनके द्वारा बनाई गई कमेटी, जिसने प्रस्ताव दिया है कि झारखण्ड में सरकारी नौकरियों में उन्हें ही आरक्षण मिले, जिनके पास 1932 का खतियान हो। अब सवाल उठता है कि आज से 15-16 साल पहले इसी बात को कभी झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी कहा करते थे,

मैं भी 32, तू भी 32, सब कोई 32 हो जा, ले ले नौकरी झारखण्ड में, राज बेच के सो जा। गजब है रघुवर दास और गजब है उनके द्वारा बनाई गई कमेटी, जिसने प्रस्ताव दिया है कि झारखण्ड में सरकारी नौकरियों में उन्हें ही आरक्षण मिले, जिनके पास 1932 का खतियान हो। अब सवाल उठता है कि आज से 15-16 साल पहले इसी बात को कभी झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी कहा करते थे, तो लोग और भाजपा में ही शामिल कई नेता, खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास, जो उस वक्त बाबू लाल मरांडी के मंत्रिमंडल में भी शामिल थे, आज कहा करते हैं कि बाबू लाल मरांडी ने राज्य की जनता को, यहां के युवाओं को डोमिसाइल के नाम पर लड़वाया।

अब राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ही बतायें कि जब अब उनके द्वारा बनायी गई कमेटी ही खुद कह रही है कि झारखण्ड में सरकारी नौकरियों में आरक्षण उसी को मिले, जिनके पास 1932 का खतियान हो, तो अब वे क्या कहेंगे? कमाल है, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड करीब-करीब एक ही समय पैदा हुए। उत्तराखण्ड और छत्तीसगढ़ में स्थानीयता या नियोजन के लिए कोई बवाल नहीं है, पर झारखण्ड बने 18 साल होने चला, यहां स्थानीयता और नियोजन को लेकर बवाल जारी है, और इस बवाल के लिए गर कोई जिम्मेवार है, तो यहां की सरकार, जिसे निर्णय लेना ही नहीं आता, अगर निर्णय ले भी लिया तो उसे क्रियान्वित कराना नहीं आता।

अब मुख्यमंत्री रघुवर दास ही बताये कि राज्य सरकार ने जो हाल ही में स्थानीयता नीति को मंजूर किया, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि 1985 से पहले राज्य में रहनेवाले सभी लोगों को गैर अनुसूचित जिलों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरी करने का अधिकार होगा, अब ऐसे में आरक्षण प्राप्त करनेवालों की श्रेणी में आनेवाले लोगों के लिए तो फिर स्थानीयता नीति का कोई भैल्यू ही नहीं रहा, वे तो अब सामान्य श्रेणी में ही अप्लाई करेंगे, दूसरा तो कोई विकल्प ही नहीं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा जारी स्थानीयता नीति का उन्हें क्या लाभ।

ऐसे भी राज्य सरकार द्वारा जारी स्थानीयता नीति के आधार पर प्रमाण पत्र निर्गत भी कहां हो रहे हैं, आज भी 1932 के खतियान पर ही काम हो रहे हैं, कुल मिलाकर देखा जाये, तो भाजपा की इस रघुवर सरकार ने, राज्य की जनता को एक तरह से ऐसा बेवकूफ बनाया है कि आनेवाले समय में जनता भाजपा को वोट देने के पूर्व दस बार सोचेगी, जैसा कि नगर निकाय चुनाव में की है।

हालांकि अभी राज्य सरकार ने कमेटी के निर्णय को स्वीकृत नहीं किया है, पर रघुवर सरकार के पास इसके अलावे कोई चारा भी नहीं है, यानी डोमिसाइल का भूत, रघुवर सरकार को ऐसा ले डूबेगा, कि पूछिये मत। अब पूरे झारखण्ड की जनता की जुबां पर यहीं बात आ रही हैं कि यहीं बात बाबू लाल मरांडी ने पूर्व में किया और कहा तो सभी ने उन पर अंगूलियां उठाई और अब भाजपा के ही लोग 1932 का खतियान जपने लगे, तो अब क्या करेंगे वे, जो 1985 के पूर्व से तो रह रहे हैं, पर आरक्षण का लाभ लेने के लिए उनके पास 1932 का खतियान नहीं हैं।

Krishna Bihari Mishra

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