करीमन मियां हिन्दूओं की तरह पूजा-पाठ करता था, इसलिए इसे कब्रिस्तान में जगह नहीं मिलेगी, समझे

21,371

झारखण्ड के गढ़वा जिला स्थित भवनाथपुर थाने का मकरी चकला टोला। जहां एक अमानवीय घटना घटी है और इस घटना को अंजाम दिया है, दबंग इस्लाम धर्मावलम्बियों ने। इन्होंने 75 वर्षीय करीमन मियां के शव को कब्रिस्तान में दफनाने नहीं दिया। इनका कहना था कि चूंकि करीमन मियां गैर-इस्लामिक कार्य किया करता था, इसलिए उसे कब्रिस्तान में जगह नहीं दी जा सकती। हार-थककर करीमन मियां के शव को उनके परिवारवाले, हिन्दूओं के साथ मिलकर, दूसरी जगह जमीन में दफना दी।

स्थिति देखिये, दबंग मुस्लिमों ने करीमन मियां के जनाजे में शामिल होना तो दूर, उसके जनाजे की नमाज तक पढ़ने नहीं दी। बस करीमन मियां को उसके उस गुनाह की वह गैर-इस्लामिक कार्य करता था, इसलिए वह मुसलमान नहीं हैं, अतः उसके लिए कब्रिस्तान में जगह नहीं। वहां रह रहे दबंग मुस्लिमों का कहना था कि करीमन मियां हिन्दू रीति रिवाज से झाड़-फूंक किया करते, मंदिर जाते थे, इसलिए हिन्दूओं की तरह झाड़-फूंक में भाग लेना, हिन्दूओं की पूजा-पाठ को अपनाना गैर-इस्लामिक है, इसलिए इसे कब्रिस्तान में जगह नहीं मिलेगी।

इधर लोग बताते है कि करीमन मियां की कोई औलाद नहीं और उनकी पत्नी जो थी, इनके पहले ही दुनिया से अलविदा हो गई, करीमन मियां के शव के साथ इस तरह के व्यवहार से गांव के लोग बहुत ही गुस्से में है। लोग बताते है कि जैसे ही करीमन मियां की मौत की खबर मिली,तो करीमन मियां के परिवारवाले, अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ कब्रिस्तान में कब्र खोदा।

जिसके बाद मुस्लिम समाज के सदर मकबूल अंसारी और इमाम जाकिर हुसैन की ओर से कब्रिस्तान में करीमन मियां के शव को दफनाने से रोक दिया गया। हालांकि उनके परिवारवाले काफी गिरगिराए पर इन लोगों का दिल नहीं पसीजा, और अंत-अंत तक कब्रिस्तान में करीमन मियां के शव को दफन करने नहीं दिया, अब परिवारवाले बेचारे क्या करते, वे दूसरी जगह करीमन मियां को दफनाकर अपने घर को चले गये।

1 Comment
  1. राजेश कृष्ण says

    सुर अत तौबा..अल्लाह मुक़र्रर करेगा इनके जनाजे पर फ़ातिहा, और उन्हें बदसुलूकी का कयामत झेलना होगा..अल रसूल बिस्मिल्लाहेरहिम ..ख़ुदा करीम..🙏💐करीमन मियां.❣️🙏💐

Comments are closed.