आधार, प्रमोशन में आरक्षण, और सुप्रीम कोर्ट लाइभ पर SC का अभिनन्दनयोग्य फैसला

आज का दिन ऐतिहासिक है, सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक के बाद एक स्वागतयोग्य फैसले सुनाये है, जो प्रत्येक भारतीयों के लिए खास हैं। सुबह में प्रमोशन पर आरक्षण, दोपहर में आधार और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट लाइभ के फैसले ने लोगों को चौकाया है, साथ ही केन्द्र सरकार और देश के राजनीतिक दलों को भी एक बहुत बड़ा झटका दिया है।

आज का दिन ऐतिहासिक है, सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक के बाद एक स्वागतयोग्य फैसले सुनाये है, जो प्रत्येक भारतीयों के लिए खास हैं। सुबह में प्रमोशन पर आरक्षण, दोपहर में आधार और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट लाइभ के फैसले ने लोगों को चौकाया है, साथ ही केन्द्र सरकार और देश के राजनीतिक दलों को भी एक बहुत बड़ा झटका दिया है।

हर बात में ही आधार की मांग, प्रमोशन पर आरक्षण की राजनीति को लेकर देश में राजनीतिक उठापटक हमेशा से चलती रही हैं, हालांकि प्रमोशन पर आरक्षण की राजनीति को लेकर, फिर से बवंडर उठ सकती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के स्वागतयोग्य फैसलों से इसमें ब्रेक भी लगा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने प्रमोशन में आरक्षण को खारिज न कर, इसे राज्य सरकारों पर छोड़ दिया है, सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि अगर राज्य सरकार चाहें तो वह प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है, पर सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार की उस अर्जी को निरस्त कर दिया, जिसमें अनुसूचित जाति- अनुसूचित जन-जाति को आरक्षण दिए जाने में कुल आबादी पर विचार करने को कहा गया था।

इधर अपने दूसरे फैसले में, आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आधार कहां जरुरी है, और कहां नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने पैन कार्ड, इन्कम टैक्स रिटर्न भरने और सरकार द्वारा ली जा रही मदद जैसे सब्सिडी पाने में इसे जरुरी बताया है, जबकि स्कूलों में एडमिशन, मोबाइल सिम लेने, बैंक एकांउट खोलने, सीबीएसई, नीट और यूजीसी एग्जाम्स में भाग लेने तथा प्राइवेट कंपनियों में नौकरी लेने के समय में इसकी मांग को जरुरी नहीं बताया।

अपने तीसरे फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों भारतीयों के मन की मुराद पुरी कर दी, ज्यादातर भारतीयों की इच्छा थी कि दूसरे देशों में जैसे वहां की विशेष अदालतों की लाइभ प्रसारण होती है, ठीक उसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट में चलनेवाली मामलों का भी लाइभ हो, ताकि लोग इसे देख सकें और पारदर्शिता का अनुभव कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी अपनी राय दी और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षतावाली पीठ ने आदेश दिया कि इस प्रक्रिया की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से होगी। कोर्ट का मानना है कि लाइभ स्ट्रीमिंग से अदालत की कार्यवाही में पारदर्शिता आयेगी और इसमें देश का हित भी छुपा है। पूरे देश में आज के इस तीन महत्वपूर्ण फैसलों की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है और इन फैसलों को देश के उत्तरोत्तर विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है।

Krishna Bihari Mishra

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