JMM ने नीतीश-जदयू पर साधा निशाना, बौखलाना छोड़ सच्चाई का सामना करें, BJP नेता नित्यानन्द पर भी बरसे JMM नेता

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य आज जदयू के नेताओं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर बरसे। दरअसल कल ही राज्य के मुख्य निर्वाची पदाधिकारी से जदयू का एक शिष्टमंडल मिला था, तथा झामुमो के चुनाव चिह्न को रद्द करने की मांग की थी, जदयू नेताओं का कहना था कि चूंकि तीर-धनुष आदिवासियों का प्रतीक चिह्न व उनके जीवन का हिस्सा हैं, इसलिए इसका लाभ झामुमो को मिलता है।

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य आज जदयू के नेताओं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर बरसे। दरअसल कल ही राज्य के मुख्य निर्वाची पदाधिकारी से जदयू का एक शिष्टमंडल मिला था, तथा झामुमो के चुनाव चिह्न को रद्द करने की मांग की थी, जदयू नेताओं का कहना था कि चूंकि तीरधनुष आदिवासियों का प्रतीक चिह्न उनके जीवन का हिस्सा हैं, इसलिए इसका लाभ झामुमो को मिलता है।

झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने जदयू के इन नेताओं के दिये गये बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि ये मानसिक दिवालियापन से ज्यादा कुछ नहीं। उनका कहना था कि झामुमो का तीरधनुष उन सारे लोगों का चुनाव चिह्न हैं, जो अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ये तीरधनुष अगर सिदोकान्हू के हाथ में हैं, तो भगवान राम के हाथ में भी हैं, इसलिए जदयू के नेता इन सारे बयानबाजी से बाज आये।

उन्होंने कहा कि कमल पर तो ब्रह्मा जी भी विराजमान हैं, और कमल तो लक्ष्मी के हाथों में भी रहती हैं तो क्या कमल चुनाव चिह्न भी रद्द हो जाना चाहिए। अभी दशहरा रहा हैं, दुर्गापूजा में मां दुर्गा शेर पर सवार रहती हैं, शेर एक पार्टी का चुनाव चिह्न हैं, भगवान विश्वकर्मा हाथी पर विराजमान है, और ये भी एक पार्टी का चुनाव चिह्न हैं, तो क्या इन सभी दलों के चुनाव चिह्न रद्द हो जाने चाहिए। झामुमो और उसका चुनाव चिह्न जदयू के पैदा होने के पूर्व से हैं, और इस बात को सभी जानते हैं, यहीं नहीं महाराष्ट्र और झारखण्ड में इसी बात को लेकर क्षेत्रीय दलों को ये चुनाव चिह्न आवंटित की गई है, जिसे रद्द करने का सवाल ही नहीं उठता।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि दरअसल नीतीश कुमार पर उनकी ही सहयोगी पार्टी भाजपा इस प्रकार हमला कर रही हैं, कि बेचारे की हालत पस्त हैं, इधर जो बिहार में घटनाएं घट रही है, उससे भी बौखलाएं हुए प्रतीत हो रहे हैं, जिसका असर झारखण्ड में देखने को मिल रहा हैं।

इधर भाजपा नेता एवं केन्द्रीय मंत्री नित्यानन्द राय द्वारा रांची आने और नक्सल को छोड़ वित्तीय व्यवस्था पर बयान देने पर सुप्रियो भट्टाचार्य ने करारा व्यंग्य किया। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 1857 . में बहादुरशाह जफर ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से पन्द्रह लाख करोड़ रुपये का लोन लिया था, जो बाद में एनपीए हो गया, जिस कारण देश में आर्थिक तंगी गई। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा नेताओं ने मजाक बनाकर रख दिया, पूरे देश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही हैं, एकएक कर उदयोगधंधे बंद होते जा रहे हैं, मुद्रास्फीति बढ़ रही हैं, लोग मर रहे हैं, और इनको देखो तो मसखरी करने से बाज नहीं रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नित्यानन्द राय को बताना चाहिए था कि नकली नक्सली सरेंडर कांड का क्या हुआ? बकोरिया मामले का क्या हुआ? पर ये सब पर वे मुंह नहीं खोलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार बताये कि सात करोड़ का पाकुड़ का पुल कैसे बह गया? क्या यह भी कोनार नहर की तरह इसे भी चूहे खा गये?

Krishna Bihari Mishra

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