बिहार के JDU MLA सुनील चौधरी पर जमीन हड़पने का आरोप, झलक संगम करेगा दो अक्टूबर को भूख हड़ताल

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झलक संगम के नेतृत्व में जमीन लूट के खिलाफ पीड़ित परिवारों का समूह आगामी 2 अक्टूबर को जनता दल यूनाईटेड के झारखण्ड स्थित प्रदेश कार्यालय के समक्ष धरना देगा व भूख हड़ताल करेगा। झलक संगम के अध्यक्ष राजेन्द्र कांत महतो ने आज रांची में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कहा कि 22 जून 2017 को जब रांची के मोराबादी मैदान में आदिवासी सेंगेल अभियान की रैली हुई थी।

उस रैली में स्वयं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि उनकी पार्टी राज्य में सीएनटी-एसपीटी एक्ट सख्ती से लागू हो, इसके पक्ष में हैं, कोई आदिवासी-गरीब-किसान का जमीन नहीं लूट सकता, जबकि उन्हीं के पार्टी के नेता व बिहार के बेनीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीते जदयू के निर्वतमान विधायक व कशिश डेवलेपर के मालिक सुनील चौधरी गरीबों,आदिवासियों के जमीन पर कब्जा कर चुके हैं।

राजेन्द्र कांत महतो ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि आदिवासी सेंगेल अभियान के अध्यक्ष एवं जदयू प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सेल सिटी द्वारा जमीन हड़पने का लिखित पत्र 7 जून 2020 को उनके द्वारा दिया गया था, पर आज तक उस पत्र का जवाब नहीं आया।

राजेन्द्र कांत महतो ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है कि खाता संख्या 298, प्लॉट नं. 4967, कुल रकबा 60 डिसिमल, मध्ये रकबा 50 डिसमिल जमीन को सुनील चौधरी कशिश डेवलेपर के मालिक एवं जदयू विधायक द्वारा हड़प लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि न तो उनके दादा जी, न ही पिताजी और न ही राजेन्द्र कांत महतो ने इस जमीन को बेचा है, बल्कि गलत दस्तावेजी के सहारे सुनील चौधरी ने रजिस्ट्री एवं मोटेशन कराया है।

इस षड्यंत्र में सुनील चौधरी के रिश्तेदार भी शामिल है। राजेन्द्र कांत महतो ने साफ कहा कि सुनील चौधरी जदयू विधायक ने पुनदाग मौजा स्थित सेल सिटी का अवैध निर्माण, नदी का अतिक्रमण कर किया है, तथा कॉलोनी के गंदे पानी का बहाव भी वहां प्रारम्भ कर दिया गया है, जिससे पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है।

राजेन्द्र कांत महतो ने कहा कि स्वर्णरेखा नदी झारखण्ड की प्रमुख नदी है, इसके उदगमी नदी में पुनदाग नदी भी है, जिसका स्रोत लालगुटवा मौजा के जोड़ा तालाब से पुनदाग-मुड़मा मौजा का सीमांकन रेखा है। पुनदाग नदी का मिलन सेल सिटी के आनी नदी के पास है। आगे भुसूर मौजा में प्रवेश करते हुए डिबडीह मौजा का क्षेत्र और भुसूर मौजा का सीमांकन रेखा बनते हुए हिनू, डोरण्डा, घाघरा होते हुए बहती हुई स्वर्ण रेखा में मिल जाती है। राजेन्द्र कांत महतो ने कहा कि पुनदाग नदी के किनारे सेल सिटी एवं कॉलोनी घर का निर्माण हुआ है। ये नदी क्षेत्र के जमीन, गैर मजरुआ जमीन का अतिक्रमण है, जिसके खिलाफ वे लोग धरने पर बैठेंगे।

झलक संगम के इस संवाददाता सम्मेलन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का माहौल गर्म है। चूंकि फिलहाल बिहार में चुनाव का बिगुल फूंका गया है। इस चुनावी माहौल में जिन्हें चुनाव लड़ना है, टिकट लेनी है, कसरत करने में लगे हैं। इधर झलक संगम, 2 अक्टूबर को जदयू प्रदेश कार्यालय के समक्ष जब धरने पर बैठेगा, तो साफ है कि इसकी लपट बिहार भी पहुंचेगी। ऐसे में क्या जदयू इस आग की लपट से स्वयं को बचा पायेगा? क्या नीतीश कुमार अपने विधायक को इस लपट से बचा पायेंगे? या नया चुनावी पैतरा आजमायेंगे। ऐसे कुछ भी हो, झारखण्ड में यह प्रकरण नीतीश कुमार की भविष्य की राजनीति के लिए भी ठीक नहीं है।

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