चलनी दूसे सूप के जिन्हें बहत्तर छेद, जिन भाजपाइयों ने झारखण्ड को कही का नहीं छोड़ा, वे ढूंढ रहे खामियां हेमन्त सरकार में

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जिन भाजपाइयों ने झारखण्ड राज्य को तबाह कर दिया। हाथी उड़ाने में पूरा समय बीता दिया। पारा टीचरों, आंगनवाड़ी सहायिकाओं पर पुलिसिया डंडे बरसाए। जिनके राज्य में एक रुपये की जमीन, अपनी बीवी के नाम लिखवाने में आइएएस/आइपीएस की फौज ने जमकर खुराफात मचाई। जिनके शासनकाल में किसानों ने आत्महत्या करना शुरु कर दिया था। वे गलतियां ढूंढ रहे हैं। हेमन्त सरकार में। वे अपने सोशल साइट पर इसे देकर जनता को अपनी ओर खींचना चाहते हैं, पर ये क्या, उनकी सोशल साइट पर जनता ही उनका बैंड बजा रही हैं, और भाजपाइयों से कही ज्यादा अच्छी सरकार हेमन्त सरकार को बता रही हैं।

दरअसल भाजपाइयों को हेमन्त सरकार के इन नौ महीनों में नौ खामियां दिखी हैं, जिसे इनके बुद्धिमान आइटी सेल वालों ने तैयार किये हैं, पर ये आइटी सेल वाले कितने बुद्धिमान है, उसका अंदाजा इसी से लग जा रहा है कि उनके द्वारा दिये गये पोस्ट को न तो उतना लाइक मिल रहा हैं और न ही कमेन्ट्स। जो कमेन्ट्स है भी, उसमें भी हेमन्त सोरेन की सरकार ही बाजी मार ले रही है। जरा देखिये… भाजपा वालों को नौ खामियों में पहली खामियां क्या मिली है? –  एक रुपये में महिलाओं के नाम पर होनेवाली 50 लाख तक के संपत्ति का रजिस्ट्री बंद किया। इस पोस्ट को 46 कमेन्ट्स मिले है, तथा 38 शेयर भी है, लाइकवाले जगह पर कई लोगों ने इसका मजाक भी बना दिया है, लोगों ने ठहाके वाले लाइक को खुब पसन्द किया है। 

अब जनता की प्रतिक्रिया देखिये, कैसे इन भाजपाइयों के इस पोस्ट का मजाक उड़ाया। ललन पांडे – बढिया किया एक रुपये में चाकलेट नहीं होता है, जमीन क्या खाक होगा। मार्डी बरुण कहते है – अच्छा किया है, इसका सबसे अधिक लाभ आफिसर्स ने लिया। त्रिलोचन सिंह – सब बकवास है। बसंत कुमार – बीजेपी घटिया पार्टी, जो स्कूल बंद करके दारु दुकान खोला था, अभी पैतरेबाजी कर रहा है। सोमनाथ कुमार – मोदी तो बस बोलता है, करता नहीं। दीपक सिंह – एक रुपया में सिर्फ अमीर लोग बीबी के नाम पर जमीन रजिस्ट्री करवा रहे थे और सरकार को चूना लगा रहे थे, गरीब को तो पैसे ही नहीं है, तो  जमीन का लेगा हेमन्त सरकार का यही सबसे अच्छा फैसला है। मुकेश सिंह – तो इस स्कीम में आम जन मानस को कोई फायदा भी नहीं था। उमेश कुमार यादव – बंद करना झारखण्ड राज्य के लिए अति आवश्यक था।

जनता की यह प्रतिक्रिया सच भी है, नहीं तो करोड़ों की जमीन कौड़ियों से भी कम के भाव में बड़े-बड़े धन्ना सेठों के पास पहुंचाने का अच्छा जुगार फिट करवा लिया था रघुवर दास के सलाहकारों ने। अब भाजपाइयों के अनुसार हेमन्त सरकार की दूसरी खामियां देखिये – अखबार की कटिंग दे रहे हैं और लिख रहे हैं कि आदिवासियों का हुआ नरसंहार। इसे मात्र नौ कमेन्ट्स मिले हैं और मात्र पन्द्रह लोगों ने शेयर किया है। तीसरी खामियां में बताया गया है कि मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना को बंद करके गरीब किसानों के हक को छिना गया। इसे मात्र दो कमेन्ट्स और मात्र 14 लोगों ने शेयर किया।

चौथी खामियों में बताया गया है कि हेमन्त सरकार बनते ही प्रदेश में अपराधियों और नक्सलियों का बोलबाला। इसमें मात्र सात कमेन्ट्स और दस शेयर हैं, उसमें भी कई लोगों ने भाजपा को ही जमकर लताड़ा, जैसे राजेश रंजन केरकेट्टा ने लिख दिया – बीजेपी सरकार तो सब नक्सली को बकोरिया जैसे मारकर पूरे झारखण्ड में खत्म कर दिया था, कितने बलात्कारी को खात्मा कर दिया और हेमन्त सरकार में पनप रहे। पाचंवी खामी में भाजपाइयों ने बताया कि कोरोना से लड़ने में हेमन्त सरकार विफल, जिसे मात्र 11 कमेन्ट्स और मात्र 14 शेयर दिख रहे हैं। इस पोस्ट में तो कइयों ने भाजपाइयों को ही उखाड़ कर रख दिया है। जैसे – राजेश कुजूर ने लिखा – पैसे दो जीएसटी का फिर बात करो। चौधरी सारंग – और गठबंधन तोड़ों यही हाल होगा बीजेपी का। विन्नी कुजूर – सेन्टर में ऑपोजिशन जो सवाल इनसे पूछता है, उसका एक जवाब हम भी क्या उम्मीद करने लगे। सोनू कच्छप – दो शब्द केन्द्र सरकार के लिए भी।

यानी नौ महीने बीतने के बावजूद भी ये भाजपावाले लोग अभी तक जनता का विश्वास नहीं जीत सके हैं, जबकि इसके विपरीत जनता का विश्वास अभी भी हेमन्त सोरेन के उपर बना हुआ है। भाजपाइयों द्वारा उपलब्धियां कह-कहकर जिस हेमन्त सरकार का मजाक उड़ाने का प्रयास किया गया, सच्चाई यह है कि झारखण्ड में भाजपाई खुद मजाक बन चुके हैं। उसके मूल में बाबू लाल मरांडी जैसे आयातित नेता है, जो विधानसभा चुनाव तक रघुवर दास को कटघरे में रखते थे, और परिणाम आते ही राजनीतिक भविष्य बेहतर बनाने के लिए भाजपा की गोद में जा गिरे।

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