जमशेदपुर पूर्व में गूंजने लगा – ‘लिट्टी के मसाला में नींबू के रस, बहुत हो गइल रघुवर, जल्दी धरल बस’

जमशेदपुर पूर्व में झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ सरयू राय के समर्थकों ने माहौल बनाना शुरु कर दिया हैं। उनके चाहनेवाले बड़ी संख्या में देश के विभिन्न कोनों से जमशेदपुर पूर्व में अभी से पहुंचने लगे हैं, जबकि कुछ चुनाव प्रचार के अंतिम-अंतिम दिन तक पहुंच जायेंगे। हालांकि जमशेदपुर पूर्व में कांग्रेस पाटी के गौरव वल्लभ और झाविमो के अभय सिंह भी चुनाव मैंदान में हैं, पर यहां मुख्य मुकाबला सीएम रघुवर दास और सरयू राय के बीच है।

सूत्र बता रहे हैं कि जमशेदपुर पूर्व के हर चौक-चौराहों पर सीएम रघुवर दास तथा भ्रष्टाचार विरोधी के महानायक सरयू राय के महामुकाबला की चर्चा हैं, और सभी फिलहाल सरयू राय को जीतता हुआ देखना चाहते हैं, सभी का एकस्वर से कहना है कि उनकी दिली इच्छा हैं कि सरयू राय चुनाव जीते और उनके द्वारा दिखाया गया सपना कि “जब तीन-तीन पूर्व मुख्यमंत्री जेल जा सकते हैं तो चौथा क्यों नहीं” पूर्ण रुपेण साकार हो।

सूत्रों का ये भी कहना है कि पूरे जमशेदपुर में फिलहाल सरयू राय का पलड़ा भारी दिख रहा हैं, क्योंकि उनके साथ नामांकन के पूर्व ही जनता, उनके घर पर आकर दबाव बना दी थी कि उन्हें चुनाव लड़ना हैं, तो जब जनता ही जहां दबाव बना दें कि उन्हें चुनाव लड़ना हैं तो फिर परिणाम क्या आयेगा, आप समझते रहिये। इधर विद्रोही24.कॉम के सूत्रों का कहना है कि सरयू राय के चाहनेवालों ने सीएम रघुवर दास की किलेबंदी शुरु कर दी हैं, संघ और भाजपा के पुराने स्तंभ सरयू राय को जीतता हुआ देखना चाहते हैं।

सभी ने एक स्वर से इस बार कह रखा हैं, कि जमशेदपुर पूर्व इस बार इतिहास रचने जा रहा हैं, और वह इतिहास क्या होगा, समझने की जरुरत भी नहीं, क्योंकि जनता ने संकल्प कर रखा हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि सरयू राय ने भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं की वह हाल कर दी हैं, कि भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं को इस बात की भनक तक नहीं थी, अगर थोड़ी भी भनक होती तो जमशेदपुर पूर्व का नजारा कुछ और था।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि नामांकन करने के पूर्व ही मंत्री और विधायक पद से इस्तीफा देकर सरयू राय ने अपनी मंशा प्रकट कर दी, तथा भाजपा से इस्तीफा न देकर उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को अपनी कूटनीति में उलझा दिया, अब भाजपा को न तो उगलते बन रहा हैं और न ही निगलते बन रहा, न तो भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं में इतनी ताकत है कि वे अपनी पार्टी से सरयू को निकाल सकें और न ही निलंबित कर सकें।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि 2019 में भाजपा ने हद कर दी, उसने यौन शोषण, हत्या, घोटालों के आरोपियों को चून-चून कर टिकट दिया, यहां तक की दूसरे दलों से भी ऐसे लोगों को बुलाकर अपने माथे पर बिठवाया, उन्हें भोज-भात दिया तथा उन दलबदलूओं को भाजपा का टिकट थमाया और जो लोग उनकी पार्टी के लिए समर्पित थे, उन्हें बेइज्जत करने में सारी ऊर्जा लगा दी।

अब स्थिति यह हैं कि वे सारे लोग, जो भाजपा को बहुत ही प्यार करते हैं, उनके बदन में आग लग चुकी हैं, और वे किसी भी स्तर पर जाकर रघुवर को हराने की मंशा से जमशेदपुर पूर्व का रुख कर रहे हैं, लोगों का साथ भी मिल रहा हैं, जमशेदपुर पूर्व के ही भाजपा के एक बड़े नेता बताते हैं कि भले ही राज्य में एक मुख्यमंत्री रघुवर दास हैं, पर जमशेदपुर में तो लगता है कि कई मुख्यमंत्री हैं, इनके परिवार के लोगों ने इस प्रकार से जमशेदपुर पूर्व की जनता का सुख-चैन छीना है, कि बिना रघुवर दास को हराए, जमशेदपुर पूर्व में सुख-चैन नहीं आ सकता।

कमाल की बात है, पूरे जमशेदपुर में चाहे वह बुद्धिजीवी हो या व्यवसायी, चाहे झामुमो का नेता हो या आजसू का, चाहे जदयू का नेता हो या किसी और दल का, फिलहाल सभी के पसन्द सरयू राय हो चुके हैं, ऐसे में परिणाम क्या आयेगा, लोग जान चुके हैं, उसके बाद भी कोई रिस्क लेना नहीं चाह रहे हैं, बड़ी संख्या में चुपके से संघनिष्ठ लोगों ने भी सरयू राय को समर्थन दे दिया है, यहीं हाल भाजपा के अंदर रह रहे रघुवर विरोधियों का हैं, जिन्हें इन पांच सालों में रघुवर दास ने अपमान छोड़कर, सम्मान करने की कोशिश नहीं की, वे सभी चाहते है कि इस बार सूद समते बदला ले ही लें, ऐसे में अगर रघुवर की नींद उड़ी हैं, तो गलत नहीं हैं।

तभी तो जमशेदपुर पूर्व में एक नारा बहुत तेजी से वायरल हो रहा हैं – लिट्टी के मसाला में नींबू के रस, बहुत हो गइल रघुवर, जल्दी धरल बस, मतलब लिट्टी के मसाला में नींबू का रस डाला जा चुका हैं, बहुत आपको झेल चुके हैं रघुवर दास जी, अब हम आपको झेलने को तैयार नहीं हैं, इसलिए आप जल्दी बस धरिये, और झारखण्ड से दूरी बनाइये। हम आपको बता दें कि ये नारा कोई दूसरे दल के लोगों ने नहीं बनाया हैं, यह नारा शुद्ध शत प्रतिशत खांटी संघनिष्ठ-भाजपानिष्ठ लोगों ने ही बनाया हैं।

One thought on “जमशेदपुर पूर्व में गूंजने लगा – ‘लिट्टी के मसाला में नींबू के रस, बहुत हो गइल रघुवर, जल्दी धरल बस’

  • November 19, 2019 at 11:01 pm
    Permalink

    आपने सत प्रतिशत सही लिखा है इन्हें अहंकार कूट कूट कर भर गया है माइनिंग लीज घोटाला विकाश का नमूना है ये पब्लिक है सब जानती है जाना तय है

Comments are closed.