इरफान हबीब की सोच और BBC की हिन्दी सेवा से भारतीयों को सर्वाधिक सावधान होने की जरुरत

भारत में 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इस लोकसभा चुनाव को देख तथा कुछ राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों को लेकर विदेशी मीडिया में शामिल इस्लामिक/ईसाई/वामपंथी, विद्वानों/पत्रकारों/इतिहासकारों को भारत देश की चिन्ता सता रही हैं, चिन्ता उन्हें ज्यादा सता रही है, जिन्होंने कभी कार से उतरकर, बचपन में किसी दुकान से लेमनचूस नहीं खरीदा और न ही,

भारत में 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इस लोकसभा चुनाव को देख तथा कुछ राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों को लेकर विदेशी मीडिया में शामिल इस्लामिक/ईसाई/वामपंथी,  विद्वानों/पत्रकारों/इतिहासकारों को भारत देश की चिन्ता सता रही हैं, चिन्ता उन्हें ज्यादा सता रही है, जिन्होंने कभी कार से उतरकर, बचपन में किसी दुकान से लेमनचूस नहीं खरीदा और न ही, अब बड़े होकर कभी कार से उतरकर शराब या सिगरेट की दुकानों से सिगरेट या शराब ही खरीदी, जबकि सच्चाई यह है कि ये सुबह से लेकर देर रात तक जब तक सिगरेट व शराब न मिले तथा अर्द्धनग्न महिलाओं की जीती जागती मूरत न देख लें, इन्हें नींद ही नहीं आती, पर भारत में जहां कहीं भी भाजपा शासित राज्य है, वहां इनको धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ी दिखाई पड़ जाती है, चाहे वे घोर निद्रा में ही क्यों न पड़े हो।

दरअसल, न तो इन्हें धर्म से मतलब है और न ही धर्मनिरपेक्षता से। ये भारत के स्वतंत्र होने के बाद से ही भारत की एकता व अखंडता को चोट पहुंचाने के लिए सदियों से प्रयत्नशील रहे हैं और इसमें वे ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह भारतीयों का ही सहयोग लेते हैं, और भारतीय इन्हें जमकर सहयोग भी करते हैं और उसके बदले में वे बड़े ही कानूनी ढंग से एक मोटी राशि भी हर महीने प्राप्त करते हैं, जिन्हें वेतन कहा जाता है। इन दिनों, ये बिल्कुल नये एजेंडे पर काम कर रहे हैं, मकसद है 2019 में भारत में भाजपा की पूरी तरह नष्ट कर देना तथा उसकी जगह पर कांग्रेस, वामपंथियों तथा अन्य दलों का ऐसा गठबंधन सरकार भारत में ला देना, ताकि भारत कभी ठीक से खड़ा ही न हो सके और इसमें वे सहयोग कर रहे हैं, जिनकी देशभक्ति पर हमेशा से संदेह रहा है।

ऐसा भी नहीं कि केन्द्र में भाजपा की मोदी सरकार से यहां की जनता पूर्णतः संतुष्ट है और जब कभी चुनाव होंगे तो मोदी को सत्ता सौंप ही देगी। चूंकि भारत की जनता सदियों से देश से ज्यादा अपनी जाति और अपने तथाकथित धर्म (जो धर्म होता ही नहीं) को ही विशेष रुप से महत्व देती है, जिसके चक्कर में यह देश कभी ठीक से खड़ा ही नहीं हो सका, जबकि इसके विपरीत बहुत कम समय में चीन ने अपनी बढ़ती हुई जनसंख्या पर रोक लगाकर, चीन को इस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया कि चीन आज भारत को हर मोर्चे पर घेर रहा है तथा महाशक्ति अमरीका को भी चुनौती देता रहता है, और हम इसके लिए कांग्रेस को कटघरे में रखने से नहीं रोक सकते, क्योंकि इस देश में सर्वाधिक समय, स्वतंत्रता के बाद शासन, कांग्रेस का ही रहा है।

ये विदेशी मीडिया, कैसे भारत को नीचा दिखा रही है, उसका उदाहरण देखिये। इन दिनों बीबीसी हिन्दी न्यूज, भारत को नीचा दिखाने के लिए तथा भारत की मिट्टी से ही निकले सनातन धर्म यानी हिन्दू धर्म को हिन्दूओं के ही दिलों से निकाल फेंकने के लिए कितना बड़ा षडयंत्र रच रही है, वह भी भारत की धरती पर रहकर। आश्चर्य यह भी है कि न तो इसका विरोध केन्द्र सरकार कर रही है और न ही यहां की विपक्षी पार्टियां क्योंकि उन्हें लगता है इससे धर्मनिरपेक्षता को खतरा पहुंच जायेगा। इस देश की विडम्बना है कि यहां आप कोई भी हो, हिन्दू धर्म तथा उनके देवी-देवताओं को जितना भी गाली दे दें, उनकी नंगी मूर्तिया बना दें, पर आपको कुछ नहीं बोला जायेगा, पर जैसे ही अन्य धर्मों पर बोलेंगे, देश की धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ जायेगी। जरा देखिये – 12 नवम्बर 2018 को राष्ट्रवाद के नाम पर फैलायी जा रही फ़ेक न्यूजः बीबीसी रिसर्च # बियॉन्ड फेक न्यूज नाम से बीबीसी न्यूज़ ने अपने पोर्टल पर एक समाचार छापी है, जिसमें उसने इस समाचार को फेंक बताया है

“ जिस तरह की ग़लत ख़बरें सबसे ज़्यादा फैलती हैं उनमें, भारत तेज़ी से प्रगति कर रहा है, हिंदू धर्म महान था और अब उसे दोबारा महान बनाना है, या भारत का प्राचीन ज्ञान हर क्षेत्र में अब भी सर्वश्रेष्ठ”

अब सवाल उठता है कि ये बातें फेंक न्यूज कैसे हो गई? क्या भारत प्रगति नहीं कर रहा, क्या हिन्दू धर्म महान नहीं है, क्या भारत का प्राचीन ज्ञान सर्वश्रेष्ठ नहीं है, और अगर ये सब गलत है, तो इसका सर्टिफिकेट कौन बांटता है, कि दुनिया में कौन सा धर्म सर्वश्रेष्ठ है, या कौन सा देश प्रगति कर रहा है या नहीं, हमारे देश का प्राचीन ज्ञान सर्वश्रेष्ठ है या नहीं, क्या इसके लिए हमें बीबीसी न्यूज़ की हिन्दी सेवा से सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा।

इधर वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब ने भी गजब ढा दिया है, जबसे फैजाबाद अयोध्या हुआ, वे लगता है कि अपने आप में नहीं है, उन्होंने बयान दिया है कि अमित शाह को भी अपना नाम बदल लेना चाहिए क्योंकि शाह फारसी लब्ज है। भाई इरफान हबीब आप तो वामपंथी है, इतिहासकार है, आपको किसी का नाम बदल जाये, उससे क्या मतलब, आपको इतना दर्द क्यों हो रहा है?

इरफान भाई जब कलकत्ता, कोलकाता बना, मद्रास चेन्नई बना। कभी बनारस वाराणसी। बम्बई, मुम्बई बना तो आपको दर्द नहीं हुआ, पर भाजपा के आते ही मुगलसराय, पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर बन गया, इलाहाबाद प्रयागराज बन गया और फैजाबाद अयोध्या बन गया तो आपको इतना दर्द क्यों? हम जानते है, क्योंकि इस दर्द का मतलब होता है आपका वर्तमान में इस्लामिक हो जाना।

इरफान हबीब जी, जरा सोचिये कि आपके इस्लामिक अकबर ने जब प्रयागराज शहर का नाम था ही, तो इस प्रयागराज का नाम बदलकर इलाहाबाद क्यों रख दिया? क्या आवश्यकता थी इस शहर का नाम प्रयागराज होते हुए भी इलाहाबाद करने की। आप तो इतिहासकार है, क्या बता सकते है कि नालंदा तथा तक्षशिला तो ज्ञान के केन्द्र थे, इन ज्ञान के केन्द्रों को इस्लामिक आक्रमणकारियों ने क्यों नष्ट कर दिये, क्या उनके पास अलौकिक ज्ञान का भंडार था? जिसे वे भारत में स्थापित करना चाहते थे? सच्चाई तो यह थी कि वे दिखाना चाहते थे कि देखो हम गुंडे हैं, इस्लाम के झंडाबरदार है, तुम्हें ये अपनाना ही होगा, नहीं तो तुम सुरक्षित नहीं, जो उनसे डर गये, वे इस्लाम अपना लिये और जो नहीं डरे, उनसे लड़ते रहे।

कौन नहीं जानता कि सिक्ख धर्म की स्थापना किसलिए हुई थी, ये अलग बात है कि आज सिक्ख धर्मावलम्बी के कुछ सिरफिरे लोग ही हिन्दू धर्म से नफरत करने लगे हैं, पर आजकल ही में एक खबर सुनने को मिली कि कोई अमरीकन नागरिक तुलसी गब्बार्ड है, जो हिन्दू धर्म की अनुयायी है, वह 2020 में होनेवाली अमरीकन राष्ट्रपति की उम्मीदवार भी हो सकती है, हो सकता है कि बीबीसी वाले इसे भी फेंक न्यूज करार दे, पर यकीन मानिये कि जो ईश्वर ने सोच लिया है, वह होना ही है, उसे न तो हम रोक सकते है और न ही ये बीबीसी वाले, चाहे वे जितना भी दम लगा लें।

भारत की जनता इतनी मूर्ख नहीं कि इरफान हबीब और बीबीसी वाले लोगों के चक्कर में आ जाये, इन्हें जब निर्णय लेना है, निर्णय ले लेंगे, आपको जितना दिमाग लगाना है, लगा लें। भारत की जनता और यहां के युवाओं को पता है कि फेंक न्यूज क्या होता है? और कौन किसके लिए फैला रहा है? आसन्न लोकसभा चुनाव व कुछ राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव को देख, बीबीसी का अचानक सक्रिय होना भी यहीं बताता है कि वह भारत में किसके लिए काम कर रही है, और उसका मूल मकसद क्या है?

इसलिए आप भी थोड़ा उल्लू बनाना बंद करें, आराम से अपना काम करें, भारत, भारत है, अब इसे कोई नहीं रोक सकता, इसे आगे बढ़ना ही है। भारत की जनता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को बीबीसी हिन्दी सेवा से दूर रखे, जो युवा है वे बुद्धिमान है, हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि वे बीबीसी की इस झूठ सेवा से स्वयं को अलग रखेंगे तथा भारत को मजबूत बनाने में मुख्य भूमिका निभायेंगे तथा लोकसभा चुनाव में किसे सत्ता सौंपनी है, वे अपने दिल की बात मानेंगे तथा चुनाव में भाग लेकर, भारत को मजबूत बनायेंगे।

Krishna Bihari Mishra

2 thoughts on “इरफान हबीब की सोच और BBC की हिन्दी सेवा से भारतीयों को सर्वाधिक सावधान होने की जरुरत

  1. भाजपा,आरएसएस और मोदी से हिन्दू होने का सर्टीफिकेट नही चाहिए इन्हें अब जनता को जवाब देना होगा 2014 के किए वादे का क्या हुआ, नाम बदलने से काम नहीं होता अगर रोजगार होता तो अधिकतर हिन्दुओ को मिलता पर पकौड़ा बेचना रोजगार गारंटी है सरकार का तो नही चाहिए ऐसी निकम्मी सरकार,रहा जात पात का तो मोदी ने ही 2014 के चुनाव में खुद को पिछड़ा वर्ग का बोल कई बार संबोधन किया, ये अंग्रेजो के चमचे कब से देशभक्त हो गए

  2. भारत को जितना खतरा विदेशी ताकतों से नहीं है उससे ज्यादा खतरा देश में रह रहे विदेशी एजेंटों से है। वामपंथी इसमें नंबर एक पर हैं। वे ऐसा हर काम करते हैं जिससे बहुसंख्यक हिन्दू समाज बंटे। उसमें हीन भावना आए। इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा हमारे पर्व-त्यौहार और परंपराओं को दकियानुसी करार देकर मजाक उड़ाया। अब जबकि दुनिया के स्तर पर फिर से देश का डंका बज रहा है। हिन्दू युवा स्वाभिमान से लैश होकर अपने आत्मगौरव को समझने लगे हैं तो ऐसी ताकतों के पेट में दर्द हो रहा है। इसने सावधान रहने और हम सबको सावधान करते रहना है। बहुत बधाई आपको

Comments are closed.

Next Post

'दैनिक भास्कर' व 'हिन्दुस्तान' ने अर्घ्य का गलत समय बता छठव्रतियों के भावनाओं के साथ खेला

Tue Nov 13 , 2018
रांची के अखबारों ने एक बार फिर, रांची के छठव्रतियों एवं उनके परिवारों के भावनाओं के साथ खेलने का काम किया है। रांची से प्रकाशित ‘दैनिक भास्कर’ और ‘हिन्दुस्तान’ ने तो हद कर दी है। इन दोनों अखबारों ने आज और कल यानी सूर्यास्त तथा सूर्योदय के अर्घ्य के समय को शत प्रतिशत गलत बताया है, जबकि ‘दैनिक जागरण’ और ‘प्रभात खबर’ ने कुछ हद तक सही समय बताने की कोशिश की है।

You May Like

Breaking News