पटना की माले रैली में उमड़ा जनसैलाब, रैली में आये लोगों ने भाजपा को उखाड़ फेंकने का लिया संकल्प

न ट्रेन की बुकिंग, न बसों की व्यवस्था, न पूंजीपतियों से चंदे और न किसी सरकारी मुलाजिमों से राहत की आशा, पर मन में लगन है, चोट करना है व्यवस्था पर, बताना है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को, दिखानी हैं अपनी ताकत, बिहार के अवसरवादी गठबंधन को कि हम क्या है? इसीलिए आज चले आये है पटना के गांधी मैदान में भाकपा माले की इस ‘भाजपा भगाओ, लोकतंत्र बचाओ रैली’ में।

न ट्रेन की बुकिंग, न बसों की व्यवस्था, न पूंजीपतियों से चंदे और न किसी सरकारी मुलाजिमों से राहत की आशा, पर मन में लगन है, चोट करना है व्यवस्था पर, बताना है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को, दिखानी हैं अपनी ताकत, बिहार के अवसरवादी गठबंधन को कि हम क्या है? इसीलिए आज चले आये है पटना के गांधी मैदान में भाकपा माले की इस भाजपा भगाओ, लोकतंत्र बचाओ रैली में।

ये उद्गार किसी नेता के नहीं, बल्कि ये उद्गार है, एक सामान्य माले कार्यकर्ता के, ये उद्गार है बिहार के सामान्य जनता के, जो दुखी है सिस्टम से, जो दुखी है अवसरवादी राजनीति, सांप्रदायिकता, बढ़ती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, मॉब लिचिंग तथा केन्द्र सरकार की विनाशकारी नीतियों से।

जिन्हें भीड़ की राजनीति ही करनी आती है, जिन्हें लगता है कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में ही भीड़ जुटती है, उन्हें कम से कम बिहार आकर, इस रैली को जरुर देखना चाहिए था, भाकपा माले की इस रैली ने सिद्ध कर दिया कि गरीबों और राज्य की सामान्य जनता पर आज भी उसकी पकड़ मजबूत है, और विश्वसनीयता भी बरकरार है।

पटनावासियों की अगर बात करें, तो उनका कहना था कि लोग तो कल देर रात से ही पटना आने लगे थे, और सुबह होते-होते सभी के पांव स्वाभाविक तौर पर गांधी मैदान की ओर चले जा रहे थे, और जिसे जहां जगह मिला, अनुशासन के साथ बैठता चला गया। चेहरे पर आक्रोश तथा अपने नेता के भाषण सुनने और उस पर अमल करने का भाव साफ झलक रहा था।

पटना के गांधी मैदान में मूंगफली बेच रहा राजेन्द्र ने विद्रोही 24.कॉम को बताया कि वह इस गांधी मैदान में कई राजनीतिक सभाओं को देखा है, पर गरीब-गुरबा अगर किसी रैली में जुटता है, तो वह सिर्फ और सिर्फ भाकपा माले की रैली में, शायद उसे लगता है कि उसकी आवाज भाकपा माले ही बन सकता है, ऐसी विश्वसनीयता अन्य पार्टियों में देखने को नहीं मिलती। राजेन्द्र यह भी बताता है कि अन्य दलों में रैली में लोग ट्रेन और बस में कोच-कोच कर लाये जाते है, पर इसमें लोग लाल झंडा लेकर खुद पहुंच जाते है, खाने-पीने की व्यवस्था भी वे खुद करते है, ये नहीं कि किसी नेता के घर जाकर रोटी तोड़ते है, गरीबों की पार्टी है, तो गरीब वाला नजारा भी दिखेगा न और बाकी में तो गजबे हाल हैं, मोदी की रैली के नाम पर राजेन्द्र बिदकता है, वो बताता है कि पिछली बार बहक गये थे, मोदी को वोट दे दिये, इस बार नहीं होगा, अबर मोदी को सबक सिखायेंगे, चाहे उसके लिए कोई खामियाजा क्यों न भुगतना पड़े।

भाकपा माले के नेताओं ने भी आज इस उमड़ी रैली को देख प्रफुल्लित नजर आये, उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि इस रैली में इतना विशाल जनसमुदाय आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करायेगा। भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य समेत सभी वक्ताओं ने भाजपा को देश के लिए खतरा बताया। सभी ने कहा कि राफेल मुद्दे और एक-एक कर देश से भाग रहे भ्रष्ट व्यापारियों के समूह बता रहे है कि केन्द्र की भाजपा सरकार किस प्रकार देश की सेवा कर रही है, जिन पर देश के लोगों ने विश्वास किया था, वे पूंजीपतियों के हाथों के खिलौने बन गये है, वे उनके इशारे पर देश और देशवासियों को नचाने पर लग गये है, पूरे विश्व में भारत की साख पर दांव लग रहा है, हमारे पड़ोंसियों तक से संबंध खराब हो चुके है, पर केन्द्र की सरकार को झूठ बोलने और जनता को धोखे देने से फुरसत नहीं, क्योंकि उनकी यहीं चारित्रिक विशिष्टता बन गई है।

Krishna Bihari Mishra

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देश के पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बन गये, जिन्हें काले रंग से बहुत डर लगता है...

Thu Sep 27 , 2018
खुद को कभी छप्पन इंच के सीना वाले घोषित करनेवाले हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को, इन दिनों काले रंग से बहुत डर लग रहा है, वे काला रंग देखते ही भड़क जाते हैं, शायद उन्हें लगता है कि कहीं कोई अहित न हो जाये, इसलिए उनकी जहां-जहां अब भाषण, रैलियां या कोई कार्यक्रम आयोजित होता है, उनके सुरक्षा में लगे लोग, इस बात का ध्यान रखते हैं कि पीएम मोदी को कहीं काले रंग से वास्ता न पड़ जाये।

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