अपनी बात

तीसमार खां बनने के चक्कर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू अपनी दुर्दशा कराने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों कार्यकर्ताओं का भी नाक कटवाने से बाज नहीं आ रहे

झारखण्ड में भारतीय जनता पार्टी की दिन दशा इन दिनों ठीक नहीं चल रही। तीसमार ख़ाँ बनने के चक्कर में नये प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू अपनी एक के बाद एक बेजा हरकतों से पार्टी और पार्टी कार्यकर्ताओं की नाक कटवा रहे हैं। बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह हो गये हैं। पार्टी की ऐसी किरकिरी हो रही है जैसा शायद ही पहले कभी हुआ हो।

हजारीबाग में एक जघन्य हत्या मामले में भाजपा से जुड़े एक आरोपित के बारे में यह कह कर सीधे नकार देने की भाजपा से उसका कोई संबंध नहीं है, आदित्य साहू की भारी फ़ज़ीहत तब हुई। जब उस आरोपित की न सिर्फ भाजपा के दूसरे नेताओं बल्कि उसकी गिरफ़्तारी से ठीक पहले की, इनके साथ की, तब तक के बाद एक से एक फोटो जब सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। इस मामले में इन्होंने बड़बोलेपन और खुद को बड़ा नेता दिखाने के चक्कर में राज्य बंद तक बुला दिया, जिसे इन्हें तुरंत वापस लेना पड़ा।

अभी हाल ही इन्होंने अपनी एक मूर्खता पूर्ण हरकत से एक अपराधी से खुद की मां की गाली सुनी बल्कि महासचिव मनोज सिंह समेत झारखंड के उन करीब बारह लाख कार्यकर्ताओं एवं पूरी भाजपा के लोगों को भद्दी गालियां सुनवा दी। हुआ यूँ कि राँची के ही एक इलाके में एक बच्ची के गायब होने के मामले में आदित्य साहू महासचिव मनोज सिंह और दूसरे कार्यकर्ताओं की फौज लेकर पीड़ित परिवार के घर मिलने गये।

गुमशुदा बच्ची के परिवार वालों ने इन्हें एक मोबाइल नम्बर दिया, जिससे कोई ( शायद साइबर अपराधी ) परिवार वालों को कॉल कर बच्ची उसके पास होने की बात कर फिरौती के लिये पैसे की माँग कर रहा था या पहले कुछ पैसे ले भी चुका था। क़ायदे से यह चाहिए कि आदित्य साहू वह नंबर सीधे फ़ोन कर पुलिस के सीनियर अधिकारियों को देते और कहते कि इस नंबर की तहक़ीक़ात कर अपराधी को पकड़वाइये।

पर इन्हें तो बड़ा नेता बनने का नशा सवार था। हो भी क्यों नहीं, जब इनकी खुद की हैसियत ऐसा कि कभी खुद चुनाव लड़े थे, तीन हज़ार वोट भी नहीं ला पाये थे। सुना है इन्हें भी कुछ पहले के तरह चरण संस्कृति से बनने वाले भाजपा अध्यक्षों जैसा खुद ये भी मुख्यमंत्री बनने का सपना दिन में ही देखने लगे हैं। यही वजह है कि अध्यक्ष बनते ही ये एक के बाद एक अनर्गल काम कर पार्टी की नाक कटवा रहे हैं।

आदित्य साहू ने पुलिस को फोन नहीं कर, घरवालों द्वारा दिये गये अपराधी के नंबर पर सीधे कॉल किया वह भी स्पीकर आन करके ताकि वहां जमा भीड़ सुने देखे कि ये कितना बड़ा काम कर रहे हैं। अपराधी ने इनका कॉल उठाया और न सिर्फ इनको बल्कि पूरे भाजपा को मां की गाली देने लगा। ऐसे में इनकी तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई और चेहरे पर हवाई उड़ने लगी। इन्हें अपना औकात भी समझ में तब आ गया।

जब ये बोलने लगे “देखो किधर है एसपी, @एसपी-एसपी कर ये उस अपराधी को ये जताना चाहते थे कि देखो एसपी बगल में है। पर वहां इनके ख़िदमत में भला कोई एसपी रहे, तब न आवाज़ दे। अपराधी की यही गाली महासचिव मनोज सिंह ने भी खुद के लिये सुनी। और इस तरह आदित्य साहू वहां न सिर्फ खुद की बल्कि पूरी पार्टी की नाक कटवा कर उल्टे पांव खिसक लिये।

वर्तमान में सोशल मीडिया पर इस घटना का ऑडियो-वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। चारों तरफ थू-थू होने के बाद आदित्य साहू की बोलती पूरी तरह बंद है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी की नाक कटवाने का यह ‘विशेष अभियान’ वे दोबारा कब और किस रूप में शुरू करते हैं।

लेकिन, उन पर तो बड़ा नेता बनने और श्रेय लूटने का भूत सवार था। हो भी क्यों न, जिनकी खुद की चुनावी हैसियत कभी तीन हजार वोट जुटाने की भी नहीं रही, वे भी भाजपा की ‘चरण वंदना संस्कृति’ के भरोसे दिन में ही मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने लगे हैं। यही वजह है कि अध्यक्ष पद संभालते ही वे लगातार अनर्गल फैसले ले रहे हैं।

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