धनबाद में CM रघुवर के चहेते BJP MLA के अत्याचार से त्रस्त मुस्लिम परिवार ने की आत्मदाह की कोशिश

CM रघुवर दास के चहेते एवं बाघमारा के कुख्यात भाजपा विधायक ढुलू महतो के आतंक से त्रस्त एक मुस्लिम परिवार ने धनबाद उपायुक्त कार्यालय के समक्ष पूरे परिवार के साथ आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसे वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने बचा लिया। बताया जाता है कि बाघमारा के रहनेवाले अख्तर हवारी ने पूर्व में ही धनबाद के उपायुक्त और धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर इस बात की सूचना दी थी

CM रघुवर दास के चहेते एवं बाघमारा के कुख्यात भाजपा विधायक ढुलू महतो के आतंक से त्रस्त एक मुस्लिम परिवार ने धनबाद उपायुक्त कार्यालय के समक्ष पूरे परिवार के साथ आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसे वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने बचा लिया। बताया जाता है कि बाघमारा के रहनेवाले अख्तर हवारी ने पूर्व में ही धनबाद के उपायुक्त और धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर इस बात की सूचना दी थी कि वह पूरे परिवार के साथ उपायुक्त कार्यालय के समक्ष 25 सितम्बर को आत्मदाह करेगा, तथा आत्मदाह के कारण को भी पत्र में इंगित किया था।

पर सच्चाई यह है कि उक्त गरीब अख्तर हवारी की शिकायत को धनबाद के उपायुक्त और धनवाद के वरीय पुलिस अधीक्षक ने हलके में लिया। धनबाद उपायुक्त कार्यालय के समक्ष आज हुई इस हृदय विदारक घटना की भाजपा छोड़ समस्त राजनीतिक दलों ने कड़ी आलोचना की है। अख्तर हवारी का कहना है कि भाजपा विधायक ढुलू महतो, उसका तथा उसके परिवार का जीना हराम कर दिया है। वह बाघमारा अंचल के सेवी आउटसोर्सिंग में ड्राइवर पद पर कार्यरत था, जहां ढुलू महतो ने आउटसोर्सिग वाले को कहकर उसका पेमेंट बंद करा दिया।

जिस कारण उसके पूरे परिवार के समक्ष भूखमरी की स्थिति हो गई। जब वह दूसरी जगह काम की तलाश में निकला तो वहां भी ढुलू महतो ने काम करने नहीं दिया। अख्तर हवारी का कहना है कि उसके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, वह कहां जाये, कैसे उन्हें खिलाएं, कैसे उनकी परवरिश कराएं, उनके लिए दवा आदि की व्यवस्था करें? अख्तर हवारी का कहना था कि जहां वह पहले काम करता था, वहां उसे पन्द्रह हजार रुपये वेतन मिलता था, जिसमें से छः हजार रुपये कमीशन ढुलू महतो खा जाया करता था, जब उसने इसका विरोध किया तब ढुलू महतो ने आउटसोर्सिंग कंपनी और बीसीसीएल जीएम प्रबंधन को कहकर नौकरी से निकलवा दिया। पेमेंट भी रुकवा दिया।

अब वह क्या करें, इसलिए उसने अपने पूरे परिवार के साथ उपायुक्त कार्यालय में जाकर आत्मदाह करने की कोशिश की, क्योंकि यहां तो कोई किसी गरीब की सुन ही नहीं रहा। पुलिस और अधिकारी सभी ढुलू के इशारों पर नाचते हैं, हम गरीबों को कौन यहां सुनता हैं, इसलिए उसने आत्महत्या करने की कोशिश की। स्थानीय नागरिक बताते है कि ढुलू का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं, जो भी उसके गलत का विरोध करता है, ढुलू उसे झूठे केस में फंसा देता हैं और पुलिस उसी के इशारे पर जो सत्यनिष्ठ व्यक्ति हैं, उसका जीना दूभर कर देती हैं, ऐसे में अख्तर हवारी जैसे लोग क्या करेंगे, उनके पास विकल्प क्या है?

अभी तो इसकी शुरुआत हुई है, ऐसे कई लोग हैं जो ढुलू के आतंक से त्रस्त हैं, पर भय से कुछ भी नहीं बोल रहे, क्या करेंगे, वह झूठे केस में फंसाने तथा जीवन तबाह करने के लिए ही तो जाना जाता हैं, और आज की हालात में चूंकि वह मुख्यमंत्री का चहेता हैं, कोर्ट की बात तक को वह हवा में उड़ा देता हैं, तो सामान्य आदमी की क्या औकात है? अब देखना है कि अख्तर हवारी मामले में यहां का पुलिस प्रशासन क्या करता है? ज्यादातर तो लगता है कि पुलिस और प्रशासन ढुलू के इशारे पर उसे और जीना दूभर कर देगा, क्योंकि अब तक के जो पुलिस प्रशासन का रवैया रहा हैं, वह जनहित में तो कभी नहीं रहा।

Krishna Bihari Mishra

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