CM रघुवर के खासमखास धनबाद के मेयर ने MP पीएन सिंह के खिलाफ आग उगला

जिस भाजपा में गाली देना और गाली सुनना एक परम्परा बन चुकी है, जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने विरोधियों को भद्दी-भद्दी गालियों से नवाजता हैं, उसी पार्टी का मुख्यमंत्री रघुवर दास का खासमखास व्यक्ति व धनबाद का मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, केवल निगम को बेवकूफ कह देने से ऐसा बिदकता हैं,

जिस भाजपा में गाली देना और गाली सुनना एक परम्परा बन चुकी है, जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने विरोधियों को भद्दी-भद्दी गालियों से नवाजता हैं, उसी पार्टी का मुख्यमंत्री रघुवर दास का खासमखास व्यक्ति व धनबाद का मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, केवल निगम को बेवकूफ कह देने से ऐसा बिदकता हैं, कि वह अपनी ही पार्टी के ही एक वरिष्ठतम नेता व धनबाद से भाजपा सांसद पी एन सिंह की इज्जत लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ता है, वह ऐसे-ऐसे सवाल दागता है कि जैसे लगता है कि जिंदगी में उसने कोई गलत कार्य किया ही नहीं, पूर्णतः गोमाता के शुद्ध दूध का धुला हैं, वह भाजपा सांसद पी एन सिंह से सवाल पूछता है कि क्या उसकी बेवकूफी से 36 जोड़ी ट्रेनें रद्द हो गई, दुरंतो छीन ली गई, एम्स देवघर चला गया?

हालांकि सांसद पीएन सिंह ने इस बात का खंडन किया है कि उन्होंने मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल के लिए बेवकूफ शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि वे इतने अमर्यादित नहीं, कि वे बोलना नहीं जानते। मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल के इस तेवर और पी एन सिंह द्वारा किये गये खंडन से साफ पता चलता है कि धनबाद भाजपा में सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा, और 2019 लोकसभा चुनाव में धनबाद से सांसद बनने के लिए मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने ये अंतिम शस्त्र का प्रयोग, सीएम रघुवर दास के इशारे पर कर दिया, जिसका परिणाम क्या निकलेगा? ये भविष्य बतायेगा।

हम आपको बता दे कि इन दिनों पूरे राज्य में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जातिवाद का ऐसा बीज बोया है, जिसका परिणाम धीरे-धीरे सामने आ रहा हैं। हम आपको बता दें कि चंद्रशेखर अग्रवाल का सीएम रघुवर दास से बहुत ही मधुर संबंध हैं, ये ऐसा शख्स हैं, जो बिना किसी रुकावट के सीएम आवास पहुंचता है, कोई इसे ना-नुकुर नहीं करता, सीएम रघुवर दास भी इसे धनबाद से सांसद बनाने का ख्वाब देखते हैं, इसलिए नहीं कि ये बहुत काबिल हैं, वह इसलिए क्योंकि यह उनका खासमखास हैं। पूरे धनबाद को इस व्यक्ति ने नरक बनाकर रख दिया है, अभी नगर निगम का चुनाव हो जाये तो इस व्यक्ति की जमानत बचना मुश्किल हो जाये, पर चूंकि मुख्यमंत्री रघुवर दास का वरदहस्त प्राप्त हैं, मोदी, शाह, दास जैसे लोगों की राजनीति चमक आई हैं, धनबाद में ढुल्लू महतो जैसे लोगों की बन आई हैं, तो इसे भी लगता है कि वह अग्रवाल हैं तो फिर उसे क्या दिक्कत हैं? बस बात इतनी सी हैं।

पूरे धनबाद में, मेयर-सांसद के बीच की खींचतान जगजाहिर हैं, पर इस कदर की छीछालेदर की बात अखबारों व चैनलों तक पहुंच जायेगी, इसकी आशा किसी ने नहीं की थी, पर अब आशा की जानी चाहिए क्योंकि भाजपा में वह सब दिखेगा, जो आज तक नहीं दिखा, असंसदीय भाषा, अमर्यादित भाषा, एक दूसरे को देख लेने की परंपरा, इज्जत लूटने की परंपरा, यहां तक की मार-पीट भी दिखाई पड़ेगी, क्योंकि इन्हें जनता की सेवा से कोई मतलब नहीं, ये विशुद्ध रुप से अपने परिवार को ऊंचाई तक ले जाने के लिए माथापच्ची कर रहे हैं।

झारखण्ड व देश को ये पहले से ही ठिकाने पर ले जाने को कटिबद्ध हैं, पर जब भाषण देने की बात होगी तो देखिये ये क्या-क्या बकते नजर आयेंगे। याद करिये और पता लगाइये, कभी मौका मिले तो मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल से पूछिये कि आखिर क्या वजह थी कि नगर निगम प्रशासक IAS रमेश घोलप को उसने सीएम रघुवर दास से कहकर हटवाया? केवल इसी के उत्तर में आपको मेयर के स्वच्छ चरित्र का पता चल जायेगा।

हम आपको बता दें कि कल ही, इसी के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो को एक साल की सजा हुई हैं, ये वहीं बाघमारा का भाजपा विधायक है, जो तीन दिन पहले एक सिक्ख व्यवसायी को भद्दी-भद्दी गालियां दी, खौफ इतना कि किसी सिक्ख समुदाय के लोगों ने इसका प्रतिकार नहीं किया, कभी मुख्यमंत्री रघुवरदास अपने ही कार्यकर्ताओं को चिरकुट, विधानसभा में विपक्ष के लिए आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग, गढ़वा में ब्राह्मणों को अपमानित किया, दो दिन पहले भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने विरोधियों को गाली से नवाजा, यानी भाजपा में ऐसे-ऐसे लोगों जो फर्श से लेकर अर्श तक पहुंच गये, जो प्रतिदिन अपने दिवंगत वरिष्ठ नेताओं को अपने कुकर्मों एवं शब्दों से लज्जित कर रहे हैं, पर शर्म नहीं हैं, कल एक बार फिर धनबाद का भाजपा नेता, मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने अपनी निजी स्वार्थ सिर्फ धनबाद से सांसद बनने के लिए ऐसी हरकत कर दी, जिसको देख प्रत्येक भाजपाई हतप्रभ हैं, एक ने तो साफ कह दिया, अरे यारों इतना मत गिरो कि तुम्हारी इन हरकतों को देख, सच्चा भाजपाई कहीं आत्महत्या न कर लें।

Krishna Bihari Mishra

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