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2026 में बारिश के भारतीय नक्षत्र कमाल नहीं दिखायेंगे, ज्यादातर नक्षत्रों में खण्ड वृष्टि के योग, कनवा और हथिया नक्षत्र इस बार कमाल नहीं दिखायेगा

इस वर्ष वर्षा के भारतीय नक्षत्र कमाल नहीं दिखायेंगे। नक्षत्र बता रहे हैं कि पूरे भारत में बारिश की स्थिति इस वर्ष ठीक नहीं रहेगी। ज्यादातर नक्षत्र खण्ड वृष्टि की बात कर रहे हैं। खण्ड वृष्टि का मतलब ही है कि बारिश रुक-रुक कर होगी, कहीं होगी तो कहीं नहीं होगी। इस बार किसी भी नक्षत्र में अतिवृष्टि या सुवृष्टि के योग नहीं हैं। एक-दो नक्षत्र में ही सामान्य वृष्टि के संकेत मिल रहे हैं, बाकी में खण्ड वृष्टि तो एक नक्षत्र में तो अल्प वृष्टि के संकेत बता रहे हैं।

पिछले वर्ष यानी 2025 में भारतीय नक्षत्रों ने धमाल मचाने के जो संकेत दिये थे। वो दिखे भी। इस बार भारतीय नक्षत्र जिस प्रकार के संकेत दे रहे हैं, उसके लक्षण दिखने भी लगे हैं। आर्द्रा नक्षत्र तो खत्म हो गया। फिलहाल पुनर्वसु चल रहा है। आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र में सामान्य वृष्टि के योग बताये गये हैं। जो दिख भी रहा है। जबकि पुष्य से लेकर मघा और फिर उत्तरा अर्थात् कनवा (देसी भाषा में ज्यादातर किसान उत्तरा को कनवा नक्षत्र कहते हैं) से लेकर हस्त अर्थात् हथिया नक्षत्र तक खण्ड व़ष्टि के योग हैं।

जबकि बारिश के नक्षत्रों में यही दो नक्षत्र कमाल दिखाने वाले होते हैं, जिसका भारतीय किसान बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इन सब में खण्ड वृष्टि के योग है। बीच में पूर्वा फाल्गुनी में सामान्य वृष्टि और चित्रा तो इस बार लगता है कि दगा ही दे देगा। आइये अब देखते है कि बारिश के भारतीय नक्षत्र कब आयेंगे, कब तक रहेंगे और वे किस योग को लेकर हमारे बीच उपस्थित होंगे। नीचे भारतीय नक्षत्रों की उपस्थिति और उनके योग स्पष्ट दे दिये गये हैं …

क. आर्द्रा – 22 जून को रात्रि 8.28 से प्रारंभ – सामान्य वृष्टि योग।

ख. पुनर्वसु – 6 जुलाई को रात्रि 10.02  से प्रारंभ – सामान्य वृष्टि योग।

ग. पुष्य – 20 जूलाई को रात्रि 11.29 से प्रारंभ – खण्ड वृष्टि योग।

घ. श्लेषा – 3 अगस्त को रात्रि 11.49  से प्रारंभ – खण्ड वृष्टि योग।

ड. मघा – 17 अगस्त को रात्रि 10.37 से प्रारंभ – खण्ड वृष्टि योग।

च. पूर्वा फाल्गुन – 31 अगस्त को रात्रि 7.19 से प्रारंभ – सामान्य वृष्टि योग।

छ. उत्तरा फाल्गुन – 14 सितम्बर को दिन 1.29  से प्रारंभ – खण्ड वृष्टि योग।

ज. हस्त – 27 सितम्बर को रात्रि 4.52 से प्रारंभ – खण्ड वृष्टि योग।

झ. चित्रा – 11 अक्टूबर को सायं 5.21  से प्रांरभ – अल्प वृष्टि योग।

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