2019 में भाजपा को फिर से सतारुढ़ करने के लिए कांग्रेस के कई नेता बेकरार

जी हां, यहीं सच्चाई हैं। 2019 में भाजपा को फिर से सतारुढ़ करने के लिए कांग्रेस के कई नेता बेकरार हैं, हालांकि 2019 में, भारत के कई राज्यों से भाजपा की विदाई करने के लिए राज्यों की जनता बेकरार हैं, पर कांग्रेस के कई बड़े नेता चाहते ही नहीं कि फिर से कांग्रेस 2019 में आये और राहुल गांधी प्रधानमंत्री बने, इसलिए जब-जब भाजपा की किरकिरी शुरु होती है,

जी हां, यहीं सच्चाई हैं। 2019 में भाजपा को फिर से सतारुढ़ करने के लिए कांग्रेस के कई नेता बेकरार हैं, हालांकि 2019 में, भारत के कई राज्यों से भाजपा की विदाई करने के लिए राज्यों की जनता बेकरार हैं, पर कांग्रेस के कई बड़े नेता चाहते ही नहीं कि फिर से कांग्रेस 2019 में आये और राहुल गांधी प्रधानमंत्री बने, इसलिए जब-जब भाजपा की किरकिरी शुरु होती है, तब-तब वे ऐसा शिगुफा छोड़ते हैं, जिससे भाजपाइयों में अभूतपूर्व ऊर्जा का संचार हो जाता हैं।

याद करिये, गुजरात विधानसभा चुनाव, वहां से भाजपा की विदाई तय थी, लेकिन जैसे ही मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आग उगला, नतीजा क्या निकला? कांग्रेस सत्ता में आते-आते मात्र दस सीटों से पिछड़ गई, ठीक मणि शंकर अय्यर की तरह एक नया नमूना सांसद शशि थरुर भी कांग्रेस को मिला है, जिसने एक नया डॉयलॉग बक दिया, कि 2019 में भाजपा अगर आ गई तो भारत हिन्दू पाकिस्तान बन जायेगा, अब ये हिन्दू पाकिस्तान क्या होता हैं? ये तो वे जाने, पर उसके इस बयान ने भाजपाइयों की बल्ले-बल्ले कर दी, वे लगे इसे भुनाने, और उन्हें भुनाना भी चाहिए, क्योंकि जब आप गलत करेंगे, तो लोग उस गलती का लाभ क्यों न लें?

सच्चाई यह है कि विश्व में हिन्दू ही एक ऐसा समुदाय हैं कि इसे जो कुछ कह लीजिये, जी भरकर गाली दीजिये, इसके मंदिरों को तोड़कर आप उस पर मस्जिद या कुछ भी अपने मन मुताबिक बना लीजिये, ये कुछ नहीं बोलेगा? आप इसे पाकिस्तान, बांगलादेश ही नहीं, बल्कि भारत के जम्मू-कश्मीर से भी खदेड़ दीजिये, ये दिल्ली और भारत के कुछ और इलाकों में तम्बू लगाकर रह लेगा, पर कुछ नहीं बोलेगा? आप इसका जितना बार शोषण कर लें, पर ये कुछ नहीं बोलेगा, जबकि अन्य समुदायों पर जरा खोख कर देख लीजिये, वह यहीं नहीं, बल्कि पूरा विश्व उसके लिए खड़ा हो जायेगा।

कांग्रेस पार्टी के हामिद अंसारी, शशि थरुर या मणिशंकर अय्यर जैसों से ही नहीं, बल्कि सभी कांग्रेसियों से भी पूछिये कि 1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ था, तब पाकिस्तान में रहनेवाले हिन्दू करोड़ों से आज लाखों में कैसे आ गये? क्या उन्हें नामर्दी की बीमारी थी, या उन्हें बच्चे पैदा करने नहीं आता था? और भारत में रहनेवाले 1947 के समय ढाई करोड़ मुसलमान, आज 25 करोड़ कैसे हो गये? दरअसल ये कांग्रेसी भारत के हिन्दूओं को किन्नर बनाकर रखना चाहते हैं, ये चाहते ही नहीं, कि देश का भला हो, ऐसे भी कांग्रेसियों में एक ही दो नेता हुए, जिन्होंने देश के लिए सोचा, नाम हैं – सरदार वल्लभ भाई पटेल, डा. राजेन्द्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इन्दिरा गांधी आदि, बाकी ज्यादातर घटियास्तर की सोच रखनेवाले ही हुए, जिन्हें हिन्दु-मुसलमान छोड़कर दुसरा रास ही नहीं आया, ये जिंदगी भर हिन्दु-मुसलमान करते रहे, लोगों को लड़वाते रहे, जो काम इन्हीं से सीखकर भाजपा कर रही हैं, फिर भी ये लत नहीं छोड़ रहे हैं?

आजकल पूरे देश में धर्मनिरपेक्षता का मतलब हिन्दूओं को गाली देना हो गया हैं, अगर कोई मंदिर जा रहा हैं, तो उसे गाली दो, कोई रामकृष्ण मिशन के अंतर्गत मानव सेवा कर रहा हैं तो उसे गाली दो और जो विदेशों से फंड लेकर सेवा के नाम पर हिन्दूओं का धर्म परिवर्तन करा रहा हैं तो उसकी सेवा को सराहो, हद हो गई, इन बेशर्मों की, जनता इन्हें बार-बार जूतिया रही हैं, समझ ही नहीं रहे, अपने राहुल गांधी को हर चुनाव में मंदिर-मंदिर घुमा रहे हैं, फिर भी जनता वोट नहीं दे रही, समझ में ही नहीं आ रहा, हिन्दूओं को अपमान करने में बड़ा आनन्द आता है, क्योंकि वे जानते हैं कि ये हिन्दू अव्वल दर्जे के मूर्ख होते हैं, बाकी अन्य के खिलाफ टिप्पणी करेंगे तो उनकी शामत आ जायेगी, और इनकी धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ेगी सो अलग।

अभी पूरे देश का युवा बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहा हैं, पर इन्हें इन युवाओं के भविष्य की चिन्ता नहीं सता रही, देश को हिन्दू पाकिस्तान बनने की चिन्ता सता रही हैं, जिन्होंने 75 से अधिक बार संविधान में संशोधन कर डाला, उन्हें संविधान के बदलने की चिन्ता सता रही हैं, जिन्होंने कश्मीर का गर्दन कटवाने का बहुत अच्छा इन्तजाम पं. नेहरु के समय, संयुक्त राष्ट्र संघ में जाकर घुटने टेक कर किया, उन्हें देश के संविधान और देश की एकता व अखण्डता की चिन्ता सता रही हैं, भाई ये गजब के बेशर्म है और ये बेशर्मी छोड़ेंगे भी नहीं।

सच्चाई यह है कि आज देश को हिन्दू-मुसलमान की राजनीति की जरुरत नहीं हैं, इस देश को इंसानियतवाली राजनीति की जरुरत है, जो कोई करता ही नहीं, सभी को हिन्दू-मुसलमान-क्रिश्चियन-दलित-आदिवासी और पता नहीं क्या-क्या करने आता हैं, देश तो इनके शब्दकोष में है ही नहीं, अगर यही हाल रहा और इस देश की राजनीति में कदम रखनेवाले शशि थरुर और मणिशंकर अय्यर जैसे चिरकूट नेताओं की फौज निरन्तर प्रगति करती रही, तो समझ लीजिये, यह देश तो अभी पचास प्रतिशत रसातल में गया हैं, शत प्रतिशत होते देर नहीं लगेगी।

Krishna Bihari Mishra

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