ईश्वर से कुछ भी मांगना हो तो उनसे भिखारियों की तरह नहीं, जैसे एक बच्चा अपनी मां से अधिकार के साथ मांगता है, उस प्रकार से मांगिये, निश्चय ही वो चीजें प्राप्त होंगी – ब्रह्मचारी अतुलानन्द

ईश्वर से कुछ भी मांगना हो, तो उनसे भिखारियों की तरह नहीं, जैसे एक बच्चा अपनी मां से अधिकार के साथ मांगता है, उस प्रकार से मांगिये, निश्चय ही वो चीजें प्राप्त होंगी। ये बातें ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने योगदा सत्संग मठ में आयोजित रविवारीय सत्संग को संबोधित करते हुए योगदा भक्तों को कही। उन्होंने कहा कि अगर आप ईश्वर से भिखारियों की तरह मांगेगे तो भिखारियों की तरह ही आपको वो चीजें प्राप्त होंगी और पुत्रवत् मांगेगे तो निश्चय ही वो चीजें प्राप्त होंगी, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी।

ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने इसे विस्तार से समझाते हुए बताया कि आप स्वयं इस पर विचार करें कि अगर कोई भिखारी आपसे कुछ मांगता है तो आप उसकी मदद कैसे करते हैं और जब आपका बच्चा कोई चीजें मांगता हैं तो उसकी मदद आप कैसे करते हैं। ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने कहा कि आप की मांग में वजन होना चाहिए, ईश्वर से मांगते हुए आपकी प्रार्थना में प्रभाव होना चाहिए। ऐसे भी आज का विषय प्रार्थना से संबंधित था। उन्होंने कहा कि आप अपने को ईश्वर के समक्ष भिखारी की तरह मत प्रस्तुत करिये, बल्कि स्वयं को सामर्थ्यवान की तरह प्रस्तुत करिये। आपकी प्रार्थना में आध्यात्मिकता की पुट होनी चाहिए, आपकी प्रार्थना में गुरुजी के द्वारा बतायी गई आध्यात्मिकता की तकनीक भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रार्थना के भी कुछ गुप्त रहस्य होते हैं। भगवान से वहीं चीजें मांगिये, जो आपको प्राप्त हो सकें या जिस चीज को प्राप्त करने के लिये आप बने हैं, अगर आप ऐसा-वैसा चीजें मांगेंगे तो ईश्वर आपको वो चीजें कभी भी प्रदान नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी आप जो चीजें मांग रहे होते हैं, वो चीजें ईश्वर नहीं देता, क्योंकि उन चीजों से आपका कल्याण ही हो जायेगा, इसकी जानकारी आपको नहीं, बल्कि सिर्फ ईश्वर को होती है, इसलिए ईश्वर वो चीजें आपको मांगने पर भी नहीं देता।

उन्होंने कहा ईश्वर से कुछ चीजें मांगने के पूर्व या आपकी प्रार्थना में आपके अंदर संकल्प शक्ति व एकाग्रता का भी होना जरुरी है। बिना संकल्प शक्ति व एकाग्रता के आप कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते और अगर किसी भी प्रकार से वो चीजें प्राप्त हो भी गई तो आप उसका आनन्द नहीं प्राप्त कर सकते, इसे भी आपको जानना जरुरी है।

उन्होंने कहा कि आप जो पाना चाहते हैं या बनना चाहते हैं, तो आपको सकारात्मक सोच वाले के साथ संपर्क बनाना होगा। नकारात्मक सोच रखनेवाले लोगों से आपको दूरी बनानी होगी। ठीक उसी प्रकार जैसे परमहंस योगानन्दजी को वैसे गुरु की तलाश थी, जिन गुरुओं को ईश्वर का अनुभव प्राप्त था, वैसे गुरुओं की नहीं जो किताबों में पड़ी ज्ञान के आधार पर ईश्वरीय अनुभवों की बातें किया करते थे। परमहंस योगानन्द की सकारात्मकता उन्हें वैसे गुरु से मिला दी।

उन्होंने कहा कि याद रखें, जिनके बारे में आप जानते नहीं, उनके बारे में कोई कमेन्ट ही न करें। जो भी आपके साथ अच्छा हो रहा है, उसके लिए आप अपने गुरु व ईश्वर को धन्यवाद जरुर कहें। आभार अवश्य प्रकट करें। समय को मूल्यवान समझे, इसे बर्बाद करने से बचे, क्योंकि एक-एक पल मूल्यवान है जितना आप इसका सदुपयोग करेंगे। ये आनेवाले समय के लिए लाभदायी शुभ संकेत देनेवाला सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि ईश्वर से प्रेम करना सीखें। आप अपने ध्यान करने की प्रवृत्ति में गहरी रुचि दिखायें और फिर आप प्रार्थना करें, देखें आपको कितनी सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि अगर आप ने ईश्वर से संबंध बना लिया हैं, उनसे प्रेम करना सीख लिया है तो आप के पूर्वजन्मों के पाप कितने भी शक्तिशाली क्यों न रहे हो, वो भस्मीभूत हो ही जायेंगे।

ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने अपने व्याख्यान के शुरुआती संबोधन में परमहंस योगानन्द जी के लाहौर यात्रा की संस्मरण सुनाई जो इस प्रकार थी, जिसे सुन सभी आश्चर्यचकित थे। ब्रह्मचारी अतुलानन्द ने कहा कि एक बार परमहंस योगानन्द जी अपने परिवार के साथ लाहौर गये। वहां उन्हें मां काली का एक चित्र मिला। जिसे उन्होंने पूजा घर में स्थापित किया। परमहंस योगानन्द जी को लगा कि उन्हें कुछ विशेष प्रकार का अनुभव प्राप्त हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वो जो चीजें चाहें उसे प्राप्त कर सकते हैं। तभी उनकी बहन उमा ने उनसे कहा कि वो जो आकाश में पतंग उड़ रहा हैं, उसे ला सकते हो। परमहंस योगानन्द जी ने कहा – हां ये भी संभव है। परमहंस योगानन्द जी ने उसे प्राप्त करने की मन में इच्छा प्रकट की और वो पतंग कुछ ही मिनटों में उनके हाथों में था। बहन उमा ने उनकी पुनः परीक्षा लेनी चाही और दूसरा पतंग लाने को कहा, परमहंस योगानन्द जी ने तुरन्त ही दूसरी पतंग जो आकाश में उड़ रही थी, उसे भी लाकर बहन उमा को दे दी। उमा इस घटना को देख आश्चर्यचकित थी।