अपनी बात

अपनी झूठी अकड़ व चापलूसी में आकंठ डूबे यहां के भाजपा नेता नितिन नबीन से सरलता, सहजता व सहृदयता ही सीख लें, तो भाजपा का वारा न्यारा हो जाये, पर यहां सीखने कौन आया है, यहां तो सभी सिखाने को बैठे हैं

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन झारखण्ड दौरे पर है। भाजपा के प्रदेशस्तरीय नेताओं व कार्यकर्ताओं ने नितिन नबीन का रांची हवाई अड्डे पर शानदार स्वागत किया है। इसके बाद नितिन नबीन हिनू चौक पहुंचे। जहां उन्होंने भारत रत्न व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उसके बाद वे बिरसा चौक पहुंचकर भगवान बिरसा मुंडा और फिर कैलाश पति मिश्र की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके उपरांत प्रदेश कार्यालय पहुंचकर जनसंघ के पुरोधा डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद नितिन नबीन का शुरु हुआ राजनीतिक कार्यक्रम। जिसमें उन्होंने पार्टी के सांसदों व विधायकों के साथ बैठक की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी व भाजपा बिहार के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह भी उपस्थित रहे। आज ही प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में प्रदेश कोर कमेटी और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की भी बैठक हुई। जिसमें नितिन नबीन के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, प्रदेश संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह भी उपस्थित रहे और इसके बाद जैसा की होता है प्रबुद्ध नागरिक संवाद का कार्यक्रम रखा गया। जिसमें भाजपा के अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं ने जोर-शोर से भाग लिया और अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का भाषण सुना। हम आपको यह बता दें कि नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह झारखण्ड में उनका पहला दौरा है।

नितिन नबीन बिहार में बेदाग छवि के नेता व मंत्री रहे हैं। इनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी विधायक रहे हैं और वे बड़े ही सरल व सहज थे, उनका व्यक्तित्व आज के भाजपा नेताओं से बिल्कुल अलग था। यहीं कारण रहा कि नवीन किशोर सिन्हा हो या उनके बेटे नितिन नबीन, इन्होंने कभी भी चुनाव में हार नहीं देखा, हमेशा जीतते रहे। चाहे शासन किसी का भी क्यों न रहा हो या उनके सामने कोई भी उम्मीदवार क्यों न खड़ा हो।

कहने का तात्पर्य है कि नितिन नबीन से यहां के नेता केवल सरलता, सहजता व सहृदयता ही सीख लें, तो भाजपा का कल्याण हो जाये। लेकिन यहां नितिन नबीन से सरलता, सहजता व सहृदयता कौन सीखें? यहां तो सभी धन्नासेठ, चापलूस, स्वयं को सर्वश्रेष्ठ बनने की चाहत लेकर पार्टी में शामिल हुए हैं। इस भाजपा में तो वर्तमान में ऐसे-ऐसे नेता हैं, जो एक वार्ड पार्षद का चुनाव भी नहीं जीत सकते, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की कृपा से राज्यसभा तक पहुंच गये और वहां पहुंचने के बाद, उनकी बॉडी लेंग्वेंज ऐसी हो जाती है, जैसे लगता है कि रांची से दिल्ली तक भाजपा के सारे प्रमुख नेता इनकी पॉकेट में आ गये हो।

राजनीतिक पंडितों की मानें, तो भाजपा का झारखण्ड में धूल-धूसरित होने का मूल कारण, इन भाजपा नेताओं की पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच अकड़ का होना तथा उन्हें ज्यादा भाव देना, जिनकी आम जनता के बीच में छवि निम्नस्तर की हैं। ऐसे में, भाजपा अगर पिछले दो विधानसभा चुनावों से लगातार फिसड्डी हो रही हैं, तो उसका मूल कारण कई हैं। जिसे जानकर भी भाजपा के कई राष्ट्रीय नेता व संघ से जुड़े लोग नजरंदाज करते हैं। राजनीतिक पंडितों का तो यह भी कहना है कि यही स्थिति रही तो झामुमो गठबंधन, 2029 में भी फिर बाजी मारेगा और ये प्रबुद्धों के बीच झूठा संवाद करते रह जायेंगे।

राजनीतिक पंडितों का तो ये भी कहना है कि भाजपा का संगठन तो झारखण्ड के हर जिलों व प्रखण्ड स्तर तक हैं। फिर भी ये पार्टी लुढ़कती क्यों जा रही हैं, उसका मूल कारण है कि वो अपने प्रतिद्वंदियों के अंदर छुपी हुई जो अच्छी बातें हैं, उससे वो सीखना नहीं चाहती। बल्कि उसे इस बात का गर्व हैं कि उससे बेहतर संगठनकर्ता और कोई दूसरा नहीं हो सकता। जबकि सच्चाई यह है कि वर्तमान में हेमन्त सोरेन की टक्कर का भाजपा में कोई नेता प्रदेशस्तर पर नहीं है।

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