होनहार CM रघुवर को ‘जनसंवाद’ कैसे चलाया जाता है? इसका ट्रेनिंग बिहार जाकर ‘नीतीश कुमार’ से लेना चाहिए

झारखण्ड में अपने होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने खासमखास लोगों तथा कनफूंकवों की मदद से ‘मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र’ चलाते हैं, ठीक इसके विपरीत बिहार में भी इसी प्रकार का मिलता-जुलता कार्यक्रम चलता है, जिसका नाम है ‘लोकसंवाद’, जहां न तो कोई सीएम नीतीश कुमार का कोई खामसखास व्यक्ति मिलेगा और न ही कोई कनफूंकवां मिलेगा, जो सीएम नीतीश कुमार के कान में कुछ भी फूंक दें और नीतीश कुमार उसे मान लें।

झारखण्ड में अपने होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने खासमखास लोगों तथा कनफूंकवों की मदद से ‘मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र’ चलाते हैं, ठीक इसके विपरीत बिहार में भी इसी प्रकार का मिलता-जुलता कार्यक्रम चलता है, जिसका नाम है ‘लोकसंवाद’, जहां न तो कोई सीएम नीतीश कुमार का कोई खामसखास व्यक्ति मिलेगा और न ही कोई कनफूंकवां मिलेगा, जो सीएम नीतीश कुमार के कान में कुछ भी फूंक दें और नीतीश कुमार उसे मान लें।

बिहार के ‘लोक संवाद’ और झारखण्ड के ‘जनसंवाद’ में आकाश-जमीन का अंतर देखने को मिलेगा। झारखण्ड के जनसंवाद में थोड़ा दिखावा और ग्लैमर ज्यादा देखने को मिलेगा और काम ‘ढाक के तीन पांत’, जबकि बिहार के लोक संवाद में दिखावा और ग्लैमर तो भूल ही जाइये, पर काम ऐसा देखने को मिलेगा कि वहां के अधिकारियों की हाथ-पांव फूलती नजर आयेगी, कि कही दुबारा अगर इसी प्रकार की शिकायत मिल गई तो नीतीश कुमार, ऐसे लोगों को छोड़नेवाले नहीं. सभी जानते हैं, पर झारखण्ड में क्या है?

यहां के सारे आइएएस-आइपीएस अधिकारी मुख्यमंत्री का नब्ज पकड़कर उनके अंदर की गर्मी जान चुके हैं और ये भी जान चुके है कि उनका प्राण पहले के कहानियों की तरह किस काली पहाड़ी के उपर स्थित पेड़ की टहनी पर रह रहे तोते में बसा है, इसलिए मुख्यमंत्री जनसंवाद में होने वाली सीएम के इस कार्यक्रम की कुछ तो आइएएस या आइपीएस अधिकारी भाव ही नहीं देते। कुछ तो दो चार लोग को पहले से ही बुक करा देते है कि वह मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के सीधी बात कार्यक्रम में जायेगा और शुरु से लेकर अंत तक मुख्यमंत्री रघुवर दास की जय-जय करेगा, और यहीं सब यहां चलता रहता है, पर बिहार में ऐसा देखने को नहीं मिलता।

वहां आज भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लोक संवाद में आनेवाली जनता की शिकायत-सुझावों को पत्र के माध्यम से खुद ही पढ़ते हैं, और जो अच्छी चीजें होती है, उस पर वे अधिकारियों से परामर्श लेते हैं तथा जो शिकायतें होती है, उसे जिम्मेदारी की तरह पूरा भी करते हैं, जो झारखण्ड में आज तक दिखा ही नहीं। हम दावे के साथ कह सकते है कि झारखण्ड का मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चु-चु का मुरब्बा है, जबकि बिहार का लोकसंवाद सचमुच जनता के सपनों को पूरा करने में आगे बढ़ा है।

आप ध्यान देंगे, कि झारखण्ड में केवल सुनियोजित तरीके से वृद्धावस्था पेंशन, ट्रांसफार्मर, तथा नल नहीं लगने और हद से आगे बढ़ा तो स्कूल में शौचालय तथा पीने का पानी नहीं है, इसी प्रकार की समस्याओं का अम्बार का प्रश्न शामिल किया जाता है, ऐसा नहीं कि इन शिकायतों के अलावा और कोई दुसरी शिकायत आती नहीं, बल्कि उसे उपरी स्तर पर ही रोक लिया जाता है, अगर पुलिस से संबंधित कोई बड़ी अपराधिक घटनाएं किसी पूंजीपतियों से संबंधित आ गई तो उसे पहले ही रोक दिया जाता है, ताकि मामला आगे ही नहीं बढ़े।

हद तो यहां हो गई कि एक आइएएस अधिकारी को सीएम रघुवर ने कहा कि आप पलामू जाकर अपने विभाग से संबंधित समस्या का हल निकाले, कई महीने बीत गये, जब फिर वही शिकायत आ गया तो उक्त अधिकारी का ये कहना था कि उसे हेलिकॉप्टर नहीं मिला, इसलिए वह नहीं जा सकी, अब जरा सोचिये, जहां का अधिकारी हेलिकॉप्टर नहीं मिलने के कारण काम करने से इनकार कर दें और मुख्यमंत्री की बात को हवा में उड़ा दें, वहां किस प्रकार जनसंवाद चल रहा हैं, इसी को समझने की जरुरत है।

अगर यहीं स्थिति बिहार में होती, तो हमें नहीं लगता कि उक्त अधिकारी की यह हिम्मत होती कि वह यह कहती/कहता कि उसे हेलिकॉप्टर नहीं मिला, इसलिए समस्या का समाधान नहीं कर पाई/पाया और ऐसे में बिहार के सीएम नीतीश कुमार उस अधिकारी का क्या क्लास लगाते, जो नीतीश कुमार को जानते हैं, वे अंदाजा लगा सकते हैं, पर झारखण्ड तो सदाबहार हैं, होनहार मुख्यमंत्री के कब्जे में हैं, तो ऐसे ही चलेगा, वो कहावत हैं न काम न धाम, चले बाबाधाम, वहीं वाली लोकोक्ति यहां चरितार्थ है।

आज ही झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा चलाये जा रहे मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र की हरकतों/क्रियाकलापों की किसी न्यायाधीश से जांच करा ली जाये, तो इसमें भी एक बहुत बड़ा घोटाला साफ दिखेगा, कमाल है भूलियेगा नहीं, आज भी जिन लड़कियों ने पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर, जिन गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया था, आज भी वह समस्या ज्यों की त्यों पड़ी है, आज भी सीएमओ द्वारा जांच कराई गई रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दबा कर बैठे हैं, पर उस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई ही नहीं हुई, सभी गड़बड़ करनेवालों को बचा लिया गया, ऐसे में कौन कहेगा कि झारखण्ड का मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र, बिहार के लोक संवाद से बेहतर है।

आज भी जो शिकायतकर्ता बिहार के सीएम नीतीश कुमार से मिलते हैं तथा लोकसंवाद के माध्यम से अपनी बातें रखते हैं, वे खुश और संतुष्ट होकर जाते हैं, पर यहां की क्या स्थिति है? जिन्होंने अपनी शिकायतें दर्ज कराई है, उन्हीं से पूछ लीजिये, या मुख्यमंत्री रघुवर दास के द्वारा उनकी फेसबुक पर प्रसारित होनेवाली जनसंवाद के विजुयल के नीचे चलनेवाली कमेन्ट्स को पढ़ लीजिये, पता लग जायेगा कि यहां के मुख्यमंत्री रघुवर दास का मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र किस प्रकार यहां की जनता के आंखों में धूल झोंक रहा है, और इनके जनसंवाद से कितने लोग प्रसन्न है?

Krishna Bihari Mishra

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