होली की मस्ती में बौराया झारखण्ड का बच्चा-बच्चा, बौराये नेता-पुलिस और बौराई जनता

पूरे झारखण्ड में होली का त्यौहार धूम-धाम से मनाया जा रहा है, कई जगहों पर रंगों-गुलालों नें गजब ढाया है, लोगों के चेहरे रंगों-गुलालों से पुते होने के कारण बदल से गये हैं, वे खुद अपने चेहरे को पहचान नहीं पा रहे हैं, होली की मस्ती ऐसी चढ़ी हैं कि लोग भंग की तरंग में डूबे हैं, ज्यादातर जगहों पर भंग की जगह शराब ने ले ली हैं,

पूरे झारखण्ड में होली का त्यौहार धूम-धाम से मनाया जा रहा है, कई जगहों पर रंगों-गुलालों नें गजब ढाया है, लोगों के चेहरे रंगों-गुलालों से पुते होने के कारण बदल से गये हैं, वे खुद अपने चेहरे को पहचान नहीं पा रहे हैं, होली की मस्ती ऐसी चढ़ी हैं कि लोग भंग की तरंग में डूबे हैं, ज्यादातर जगहों पर भंग की जगह शराब ने ले ली हैं, कहीं-कहीं गांजा पीकर भी लोग लुढ़के नजर आये तथा एक दूसरे को नशे की हालत में ही होली की बधाइयां दे डाली।

झारखण्ड के ज्यादातर घरों में कटहल की सब्जियों का स्थान मुर्गा और बकरे ने ले लिया हैं।आज 90 प्रतिशत घरों में मुर्गों और बकरे की बहार हैं। कसाइयों के घर में होली कुछ ज्यादा ही मस्ती बिखेर रही हैं, क्योंकि इनकी कमाई आज धमाकेदार हुई हैं।

लोगों को न तो फागुन से मतलब है और न ही वसंत के आगमन से, बस मतलब ये है कि आज होली है, मुर्गा या बकरा खाना हैं, जी भरकर दारु पीकर मस्ती करनी हैं। कहीं-कहीं युवाओं का दल नशे के लिए डेंड्राइट का भी आनन्द लिया।

राजधानी रांची में होली का रंग पुलिसकर्मियों पर भी सर चढ़कर बोल रहा हैं। रांची डीआईजी-एसएसपी के आवास पर जमकर पुलिसकर्मियों ने होली का आनन्द लिया। मालपूए पर हाथ फेरा तथा फगुआ गाया।

इधर जमशेदपुर में राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी होली का पुरा आनन्द लिया तथा अपने कार्यकर्ताओं के साथ होली गीत गाये और खुब झाल बजाकर मस्ती बिखेरी, यानी आज का दिन पूरा झारखण्ड होली में बौराया हुआ हैं, चारों ओर होली ही होली हैं, क्या नेता,  क्या अभिनेता, क्या कारोबारी, क्या व्यापारी, सब के दिलों में वैलेंटाइन का बाप या दादा कहिये होली जड़ जमाकर बैठा हैं, जो कल ही नहीं बुढ़वा मंगल तक अपनी मस्ती बिखेरेगा।

Krishna Bihari Mishra

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Fri Mar 2 , 2018
ऐ हवा, उन्हें होली की शुभकामनाएं, मेरी ओर से दे आ... जो भारत की सीमाओं की सुरक्षा में लगे हैं... जो देश की आर्थिक संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न कल-कारखानों में अपने श्रम की आहुति दे रहे हैं... जो अपने परिवारो की खुशियों के लिए, अपने परिवार से दूर रहकर, अपने अरमानों का गला घोंट रहे हैं... जो आतताइयों के अत्याचार से, झूठे आरोपों में जेलों में बंद हैं...

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