पलामू के ग्रेफाइट माइन्स मजदूरों ने मांगी रघुवर सरकार से इच्छा मृत्यु का अधिकार

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद काम पर वापस नहीं लिए जाने के खिलाफ सोकरा ग्रेफाइट माइन्स के सैकड़ों मजदूर पिछले दस दिनों से रांची के राजभवन के समक्ष धरना जारी रखे हुए हैं। राज्य के सरकारी अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होने से तंग आकर सोकरा ग्रेफाइट माइन्स मजदूरों ने आक्रोशित होकर इच्छा मृत्यु के अधिकार की मांग रख दी है।

ज्ञातव्य है कि सोकरा ग्रैफाइट के मजदूर लंबे समय से आन्दोलनरत हैं। 1984 में 455 मजदूरों को माइन्स मालिक ने कम्पनी से छंटनी कर दिया था। मजदूरों के पक्ष में झारखण्ड हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश जारी किया था, लेकिन इन फैसलों को लागू करने में तो सरकार और ही उपायुक्त ने रुचि दिखाई है। इस परेशानी से आक्रोशित होकर मजदूरों ने इच्छा मृत्यु की मांग कर दी है।

यूनियन के अध्यक्ष सुदेश्वर सिंह ने कल धरना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कम्पनी फरार है। सरकार बेखबर है और मजदूर त्रस्त है। हालत यह है कि मजदूरों के सामने भूखमरी के हालात पैदा हो गये हैं। भूख से मौत के बजाए लड़कर जान देंगे अगर सरकार मांग पूरी नहीं करेगी तो राजभवन से घर वापस नहीं जायेंगे।

धरना स्थल पर एक्टू नेता भुवनेश्वर केवट ने भी जाकर मजदूरों का हालचाल लिया और अपने संबोधन में कहा कि इस कानून के शासन में कानून का ही खुल्लम खुल्ला उल्लंघन ही नहीं, बल्कि खुला मजाक उड़ाया जा रहा है। सरकार मजदूर हितों से ज्यादा कम्पनियों के लिए फिक्रमंद है, अगर सरकार मजदूरों की नहीं सुनी तो मजदूरों को भी कड़ा जवाब देना होगा। यूनियन के नेता रणजीत सिंह, परमदेव सिंह, ललन सिंह, ओम प्रताप सिंह और अशरफी राम ने भी इस अवसर पर ग्रेफाइट मजदूरों को संबोधित किया।