दीपेश निराला के कलम सेः मखमली दीवारों के पीछे का खौफनाक सन्नाटा: कब तक मौन रहेगा समाज?
राजधानी रांची के अपर बाजार से लेकर ब्लेयर अपार्टमेंट, पी.पी. कंपाउंड और शीतल अपार्टमेंट की उन आलीशान दीवारों के पीछे जो कुछ भी घटा, उसने एक कड़वी हकीकत हमारे सामने लाकर खड़ी कर दी है— “महलों में रहने वाले भी महफूज़ नहीं हैं।” जिन चेहरों पर कल तक करोड़ों के टर्नओवर की चमक थी, जिनकी कामयाबी की मिसालें महफिलों में दी जाती थीं, उनके पीछे छुपा यह खौफनाक और जानलेवा मौन आखिर क्यों पैदा हुआ?
50 साल के आसपास की यह उम्र, जो जीवन का सबसे परिपक्व, मजबूत और अनुभवों से समृद्ध पड़ाव होती है… उस उम्र में अगर कोई हंसता-खेलता, समाज को दिशा देने वाला इंसान अचानक सब कुछ छोड़कर शून्य में विलीन हो जाता है, तो यह केवल एक जिंदगी का अंत नहीं है।
सोचिए, आखिर क्या थीं वो बदतर परिस्थितियां?
किस जानलेवा मानसिक प्रताड़ना, किस अदृश्य घुटन और किस हद तक बेबसी के दौर से वे गुजरे होंगे कि उन्हें अपना ही हंसता-खेलता आशियाना बेगाना लगने लगा? धन, दौलत, शोहरत, इज्जत, फलता-फूलता व्यापार, लहलहाता परिवार और बच्चों का साथ… सब कुछ होते हुए भी अगर किसी को मौत का दामन जिंदगी से ज्यादा सुकूनदेह लगने लगे, तो यकीनन यह कोई सामान्य बात नहीं है। यह हमारे सामाजिक ताने-बाने पर एक गहरा और बदसूरत घाव है।
हमारा संकल्प और समाज से एक मार्मिक अपील
अब वक्त सिर्फ ‘शोक सभाएं’ आयोजित करने और सोशल मीडिया पर अपनी संवेदना के दो शब्द लिखने का नहीं है। अब वक्त है इन त्रासदियों की जड़ तक जाने का, अपनी भावी पीढ़ी और अपने व्यापारिक भाइयों को इस काले साए से बचाने का।
मेरे व्यापारिक भाइयों और सम्मानित नागरिकों! किसी भी संकट, किसी भी आर्थिक या मानसिक दबाव में खुद को कभी अकेला मत समझिए। मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, वे आपकी जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकतीं। डरिए मत, घुटिए मत, सामने आइए और खुलकर बात कीजिए।
एक बार ठहरकर सोचिए…
कोई भी आत्मघाती कदम उठाने से पहले हजार बार अपने बच्चों के मासूम चेहरों को देख लीजिए। आपका एक गलत फैसला आपके हंसते-खेलते परिवार को ताश के पत्तों की तरह बिखेर देगा। जिंदगी लड़कर जीतने के लिए है, हारकर घुटने टेकने के लिए नहीं। आइए, मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जहां कोई भी अवसाद में अकेला न रोए। हम आपके साथ खड़े हैं—हर मोड़ पर, हर संघर्ष में।
दीपेश निराला, अध्यक्ष, हमर अधिकार मंच, रांची सिटीजन फोरम, ऑल इंडिया लॉयर्स फोरम, फेडेरेशन ऑफ ऑल व्यापार संगठन।
