RPC के पूर्व कोषाध्यक्ष सुशील सिंह मंटू ने वर्तमान अध्यक्ष द्वारा महिला पत्रकार के साथ हुए दुर्व्यवहार मामले में जारी प्रेस विज्ञप्ति को लेकर उठाए सवाल, जो बना चर्चा का विषय
रांची प्रेस क्लब के एक वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व में क्लब के कोषाध्यक्ष रह चुके सुशील सिंह मंटू ने क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी को एक पत्र संप्रेषित किया है। जो चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कुछ सवाल पूछे हैं, जिसका जवाब देते प्रेस क्लब के अध्यक्ष को नहीं बन रहा। तो सबसे पहले आइये हम यह देखते हैं कि आखिर पत्र जो संप्रेषित किये गये हैं। उसमें क्या है? सुशील सिंह मंटू ने क्लब के अध्यक्ष शंभू नाथ चौधरी से पांच सवाल पूछे हैं, वो सवाल इस प्रकार है …
- निर्णय संख्या 1, 2 और 3 का फैसला मैनेजिंग कमेटी की किस बैठक में लिया गया?
- उच्च न्यायालय के अधिवक्ता से विधिक परामर्श का निर्णय मैनेजिंग कमेटी के किस बैठक में लिया गया था ? क्या विधिक परामर्श लिए जाने की जानकारी मैनेजिंग कमेटी के सभी 15 सदस्यों को थी?
- शनिवार, 25 अप्रैल को मैनेजिंग कमेटी की बैठक का जो मिनट्स आधिकारिक ग्रुप और अन्य व्हाट्सएप ग्रुप में जारी किया गया उसमें तो विधिक परामर्श लेने की कोई जानकारी साझा ही नहीं की गई फिर ये निर्णय किस स्तर पर लिया गया? क्या मैनेजिंग कमेटी के सभी सदस्यों को विधिक परामर्श लिए जाने की जानकारी पहले से थी?
- जब 25 अप्रैल के बाद मैनेजिंग कमेटी की कोई आधिकारिक बैठक हुई ही नहीं तो 29 अप्रैल की देर रात्रि मैनेजिंग कमेटी द्वारा सर्वसम्मति और वोटिंग के आधार पर तीन निर्णय लिए जाने की सार्वजनिक सूचना जारी कर आपने क्लब के 1200 सदस्यों को अंधेरे में रखने का गुनाह क्यों किया?
- 27 अप्रैल को आपने वीडियो/ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर मैनेजिंग कमेटी के 12/13 साथियों के साथ संवाद किया था, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग करवाई गई थी। क्या ये संवाद मैनेजिंग कमेटी की बैठक का हिस्सा था? हां तो इसकी मिनट्स आधिकारिक ग्रुप में जारी क्यों नहीं की गई और अगर ये बैठक थी तो इसके मिनट्स पर मैनेजिंग कमेटी के कितने साथियों के हस्ताक्षर दर्ज हैं ?
ये हैं पांच सवाल और आगे बढ़ने से पहले हम बता दें कि पहले सवाल में जो तीन निर्णयों की बात कही गई है। वे तीन निर्णय क्या है? मैनेजिंग कमेटी ने जो तीन निर्णय लिये थे। वो निर्णय थे –
- संबंधित व्यक्ति तथा उनके पिता मनोज कुमार सिंह (जो क्लब के सदस्य हैं) द्वारा घटना के संबंध में लिखित माफीनामा प्रस्तुत किया गया है, जिसे अभिलेख में सुरक्षित रखा गया है।
- संबंधित व्यक्ति को रांची प्रेस क्लब परिसर में प्रवेश से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- इस मामले में तीसरा निर्णय मैनेजिंग कमेटी के 15 में से 12 सदस्यों एवं पदाधिकारियों ( दो तिहाई बहुमत) ने लिया है, जिसके अनुसार संबंधित सदस्य श्री मनोज कुमार सिंह (सदस्यता संख्या -0808/2018) को क्लब की सुविधाओं से एक वर्ष तक वंचित रखा जाएगा।
बताया जा रहा है कि जैसे ही सुशील सिंह मंटू ने इसकी जानकारी व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराई कि उन्होंने इन पांच सवालों के साथ अध्यक्ष, रांची प्रेस क्लब को ई-मेल किए हैं। रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभू नाथ चौधरी का व्हाट्सएप पर ही जवाब आया कि बायलॉज के प्रावधानों के तहत हर सवाल का जवाब दिया जाएगा। उचित माध्यम से उचित समय सीमा के भीतर। निश्चिंत रहिये। जिसके प्रत्युत्तर में सुशील सिंह मंटू ने कहा कि आपका जवाब मिल गया अध्यक्ष जी, बायलॉज के हिसाब से न तो सवाल के जवाब देने का प्रावधान है, न कोई माध्यम और न ही कोई समय सीमा, अपवाद के तौर पर एजीएम को छोड़कर। इसलिए मैं निश्चिंत हो गया हूं।
इसके तुरन्त बाद अध्यक्ष शंभू नाथ चौधरी ने लिखा कि अत्यंत संवेदनशील मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद मात्र पांच दिनों के अंदर निर्णय लिया गया है। यह भी कुछ लोगों को जस्टिस डिले लग रहा है। बायलॉज के अनुसार, अनुशासनिक कार्रवाई के सात निर्णय लेने की प्रक्रिया में कमेटी के पास लगभग 21 दिनों तक का वक्त होता है।
शंभू नाथ चौधरी के इस वक्तव्य का सुशील सिंह मंटू ने शानदार जवाब दिया। जवाब था कि क्या इस क्लॉज की जानकारी मैनेजिंग कमेटी के साथियों को शनिवार, 25 अप्रैल को नहीं थी? जानकारी नहीं थी तो आत्मावलोकन का वक्त है और जानकारी थी तो ये मामले पर निर्णय के बजाय आईवॉश करने की सोची समझी साजिश थी। आपके नेतृत्व में मैनेजिंग कमेटी ने जो सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि 24 घंटे के अंदर क्लब बुलाकर कारण पृच्छा की जायेगी। मैने आप सभी द्वारा तय 24 घंटे की डेडलाइन के संदर्भ में कहा था कि जस्टिस डिले… जस्टिस डिनाय…।
सुशील सिंह मंटू ने यह भी कहा कि अध्यक्ष द्वारा जवाब देने की बजाय अनावश्यक रूप से मामले को टालने की प्रवृत्ति प्रकट करने के बाद उन्होंने बायलॉज के आर्टिकल 40 द्वारा प्रदत्त अधिकार के तहत दस्तावेजों की मांग की है। उस निमित्त भी आवेदन ई-मेल द्वारा भेजा गया है। जिसमें मैनेजर को संबोधित करते हुए लिखा गया है कि क्लब के बायलॉज के आर्टिकल 40 के अनुसार उन्हें क्लब की मैनेजिंग कमेटी द्वारा एक दिसम्बर 2025 से लेकर आवेदन की तिथि तक मिनट्स रजिस्टर (बैठक की लिखित कार्यवाही) की छाया प्रति उपलब्ध कराने की कृपा करें। छाया प्रति के एवज में जो राशि देय होगी। उसका भुगतान दस्तावेज वे (सुशील सिंह मंटू) कर देंगे।
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि महिला पत्रकारों द्वारा दिये गये 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष द्वारा उसी दिन 29 अप्रैल की देर रात जो महिला पत्रकार मामले को लेकर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी। उस प्रेस विज्ञप्ति में जो निर्णय लेने की बातें कही गई थी। उन निर्णयों को मैनेजिंग कमेटी के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किये बिना एवं मिनट्स रजिस्टर में दर्ज किये बिना ही जारी कर दी गई थी। जो रांची प्रेस क्लब के नियमों के प्रतिकूल भी बताया जा रहा है, यानी जो निर्णय आधिकारिक तौर पर लिये ही नहीं गये, उन्हें अध्यक्ष ने सार्वजनिक कर दिया।
