ब्राह्मणों के खिलाफ बोलनेवाले CM रघुवर, क्या विष्णु को सुचना आयुक्त बनायेंगे?

पलामू में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ब्राह्मणों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान क्या दे दिया?  खुद को वामपंथी माननेवाले और समय-समय पर वामपंथी कार्यक्रम में भाग लेकर स्वयं को मार्क्स और लेनिन के पद पर चलने का दावा करनेवाले, लुक-छिप कर कुछ पाने की मन में आशा रखकर, भाजपा-झामुमो का तलवा सहलानेवाले, येन-केन-प्रकारेण सत्ता का लाभ उठाकर सूचना आयुक्त बनने की महत्वाकांक्षा रखनेवाले, मुख्यमंत्री रघुवर दास की आरती उतारने में लग गये।

पलामू में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ब्राह्मणों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान क्या दे दिया?  खुद को वामपंथी माननेवाले और समय-समय पर वामपंथी कार्यक्रम में भाग लेकर स्वयं को मार्क्स और लेनिन के पद पर चलने का दावा करनेवाले, लुक-छिप कर कुछ पाने की मन में आशा रखकर, भाजपा-झामुमो का तलवा सहलानेवाले, येन-केन-प्रकारेण सत्ता का लाभ उठाकर सूचना आयुक्त बनने की महत्वाकांक्षा रखनेवाले, इन दिनों मुख्यमंत्री रघुवर दास की आरती उतारने में लग गये।इनका मानना है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ब्राह्मणवाद के खिलाफ जो बोला, वो कहीं से भी गलत नहीं, जबकि ये खुद ही स्वीकार करते है कि गढ़वा में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने क्या बोला? उन्हें पता ही नहीं है, अब ऐसे लोगों को आप क्या कहेंगे? जातिवादी, वामपंथी, पदलोलुप या और कुछ?  चलिए इनके बारे में आप कुछ भी बोले, पर मैं मुख्यमंत्री रघुवर दास से यहीं प्रार्थना करुंगा कि कल तक जो व्यक्ति अर्जुन मुंडा की जय-जयकार करने में स्वयं को लगा रखा था, आज वह सजातीय होने का धर्म निभा रहा है, आप जल्द उन्हें सूचना आयुक्त बना दें, अथवा अपने शरण में रख लें ताकि उनका जीवन धन्य हो जाये।

आप पूछेंगे ऐसे महान गुणज्ञ कौन है, तो वह हैं विष्णु रजगढ़िया। इनकी छाती को उसी वक्त ठंडक पहुंच गई, जब मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ब्राह्मणों को ब्राह्मणों के ही गढ़ में चुनौती दे डाली, हालांकि पलामू ही नहीं, पूरे झारखण्ड के ब्राह्मणों ने इनकी उस चुनौती को स्वीकार कर लिया हैं और उसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दे रहे हैं। आजकल बहुत सारे विष्णु रजगढ़िया टाइप्ड लोग पैदा हो गये हैं, जिन्हें पता ही नहीं कि ब्राह्मण क्या है?  या ब्राह्मणवाद क्या हैं? पर, इस पर वे अपने हिसाब से खुब लिखते चले जाते हैं, पर मेरा मानना है कि सूरज या चांद पर इनके द्वारा लिख देने से सूरज या चांद को कोई असर नहीं पड़ता, यहीं कारण है कि लाखों अपमान सहने के बावजूद भी ब्राह्मण समाज इस प्रकार के लोगों को झेल रहा है और आगे भी झेलेगा?

विष्णु रजगढ़िया जिस वर्ग से आते हैं, और मैं जिस वर्ग से आता हूं। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे अपने विवेकानुसार एक स्थान और तिथि-समय मुकर्रर करें और अपने लोगों को बुलाकर पूरी सभा को भर दें, मैं अकेला रहूंगा, मेरे साथ कोई नहीं रहेगा, वे ब्राह्मण और ब्राह्मणवाद पर चर्चा करा लें, शास्त्रार्थ करा लें। व्यापार के नाम पर, निवेश के नाम पर झारखण्ड को लूटवा रहे हैं इनके लोग और ये बदनाम कर रहे हैं, ब्राह्मणों को। विष्णु रजगढ़िया, हमारे चरित्र को जानते होंगे, शायद पता नहीं, उन्हें याद है भी या नहीं, कहेंगे तो याद दिला देंगे, कि जब वे अर्जुन मुंडा के शासनकाल में अर्जुन मुंडा के लिए समय दे रहे थे, तब कशिश न्यूज में मैं था, क्या कहा था?  उन्होंने मुझसे, और एक ब्राह्मण कृष्ण बिहारी मिश्र ने उन्हें क्या जवाब दिया था?  शायद उन्हें जरुर मालूम होगा।

उन्हें यह भी पता होगा कि जब वे पीकेआइएमएस के डायरेक्टर थे, और मैं जब वहां क्लास लेने जाता था तो पारिश्रमिक देने के वक्त एक ब्राह्मण कृष्ण बिहारी मिश्र ने क्या कहा था?  विष्णु रजगढ़िया जी, आपने ब्राह्मण देखा कहां है, आप क्या समझते है कि जो बड़े-बड़े व्यापारियों के घर अपना पेट भरने के लिए, दक्षिणा मांगने के लिए खड़ा होकर गिरगिराता हैं, सिर्फ वहीं ब्राह्मण है क्या?  अगर आप ये समझते हैं तो ये आपकी सबसे बड़ी भूल है, ब्राह्मण से तो कभी आपकी भेंट ही नहीं हुई, और भेंट हुई भी हैं तो आपने पहचाना ही नहीं। एक ब्राह्मण का. दीपांकर भट्टाचार्य भी हैं और एक ब्राह्मण का. विनोद मिश्र भी हैं, इन्हें याद रखियेगा भूलियेगा नहीं, क्योंकि आप 70 प्रतिशत वामपंथी और 30 प्रतिशत जब जैसा, तब तैसा है।

मैंने तो कई वामपंथियों को देखा हैं, जो खुलकर जातिवाद करते हें, और ब्राह्मणों को गाली देने में सबसे आगे रहते हैं। हमें याद है कि रांची के एटीआई में 14 सितम्बर 2015 को हिन्दी दिवस मनाया जा रहा था, और वहां एक वामपंथी अधिकारी ने साहित्यकार अशोक प्रियदर्शी को आगे कर, बाकी सारे पुरस्कार व सम्मान वामपंथी साहित्यकारों को मुख्यमंत्री रघुवर दास के हाथों थमवा दिया और वहीं वामपंथी साहित्यकारों को जब मंच मिला तो उन्होंने ही मुख्यमंत्री रघुवर दास का बाजा भी बजवा दिया, पर सीएम रघुवर दास इतने बुद्धिमान थोड़े ही है कि पता चलेगा कि इन वामपंथी साहित्यकारों ने उन्हें सम्मान दिया या अपमान। ये तो बुद्धिजीवी बतायेंगे। जरा देखिये, हमारे पास प्रमाण है, विष्णु रजगढ़िया ने, क्या किया है? क्या लिखा है, पढ़िये, आपके सामने हैं

और अब इसे पढ़िये पता लग जायेगा, कि कैसे कोई व्यक्ति जो प्रभात खबर का संपादक रह चुका हैं, कैसे डबल स्टैंडर्ड खेल रहा हैं, जरा देखिये, खुद लिख रहा है कि हमें पता नहीं कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने किस संदर्भ में ब्राह्मणवाद की बात कहीं, जब आपको मालूम ही नहीं, तो फिर आपने इस पर पोस्ट कैसे कर दिया?  उसका आधार क्या है?

इसका मतलब है कि आप सीएम रघुवर दास को बताना चाहते है कि जहां से आप आते हैं, उसी समुदाय से मैं भी आता हूं, जैसे आप अपने समाज के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। यहां पर भी ध्यान रखे, आपका और सिर्फ आपका विष्णु रजगढ़िया। अरे यहीं तो वो चीज हैं, जो भारत को मिट्टी में मिला रहा हैं और आप खुद वहीं कुकर्म कर रहे हैं, और गाली दे रहे हैं ब्राह्मणों को। थोड़ा सा भी शर्म है, तो कम से कम अपने इंसान होने का फर्ज अदा करें, जाति और जातिवाद से उपर उठे।

Krishna Bihari Mishra

One thought on “ब्राह्मणों के खिलाफ बोलनेवाले CM रघुवर, क्या विष्णु को सुचना आयुक्त बनायेंगे?

  1. वास्तविक स्थित न देख दोष किसी पर भी मढ़ देना उचित नहीं,ऐसे ही समाज बर्बाद हो जाता है।

    साहसिक लेख।।
    सलाम

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CM रघुवर दास द्वारा ब्राह्मणों के खिलाफ लगाई आग से झूलसा झारखण्ड

Thu Dec 14 , 2017
सीएम रघुवर दास द्वारा ब्राह्मणों के खिलाफ लगाई गई आग पलामू से जमशेदपुर होते हुए रांची तक पहुंच गई। कल देर रात झारखण्ड के कई इलाकों में ब्राह्मण संगठनों ने सीएम रघुवर का पुतला फूंका। रांची में राष्ट्रीय ब्राह्मण संघ द्वारा मोरहाबादी मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष सीएम रघुवर दास का पुतला फूंका गया। पुतला फूंकने के क्रम में कई लोगों ने सीएम के इस आपत्तिजनक बयान की कड़ी भर्त्सना की।

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