लालू प्रसाद को लेकर भ्रामक खबर फैलाया ‘आजतक’ और ‘प्रभात खबर’ ने

रांची कारा होटवार के जेल अधीक्षक अशोक कुमार चौधरी को पता ही नहीं कि उनके यहां बंद कैदी लालू प्रसाद यादव को क्या काम दिया गया है? पर दिल्ली में बैठे ‘आज तक’ चैनल और  रांची से प्रकाशित ‘प्रभात खबर’ को पता लग गया कि लालू प्रसाद यादव जेल में माली का काम करेगें और उन्हें रोज इसके बदले 93 रुपये मिलेंगे, यहीं नहीं रांची के एक दो अखबारों ने भी ऐसी ही खबर जेल सूत्रों के हवाले से लिखकर लगा दी।

रांची कारा होटवार के जेल अधीक्षक अशोक कुमार चौधरी को पता ही नहीं कि उनके यहां बंद कैदी लालू प्रसाद यादव को क्या काम दिया गया है? पर दिल्ली में बैठे ‘आज तक’ चैनल और  रांची से प्रकाशित ‘प्रभात खबर’ को पता लग गया कि लालू प्रसाद यादव जेल में माली का काम करेंगे और उन्हें रोज इसके बदले 93 रुपये मिलेंगे, यहीं नहीं रांची के एक दो अखबारों ने भी ऐसी ही खबर जेल सूत्रों के हवाले से लिखकर लगा दी, पर सच्चाई यहीं है कि जेल अधीक्षक अशोक कुमार चौधरी ने www.vidrohi24.com  को बताया कि ऐसा कुछ भी नहीं है। उनका कहना था कि लालू प्रसाद यादव की जो उम्र है, उस उम्र के हिसाब से ही उन्हें काम दिया जा सकता है, पर ऐसी कोई बात नहीं है, जो चैनलों या अखबारों में देखने को मिल रहा हैं।

उन्होंने कहा कि ये संभव ही नहीं कि कल सजा मिली और उन्हें आज से काम आवंटित करा दिया जाय। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि फिल्मों में जैसे कैदियों के वर्दी पर नंबर लिखा रहता हैं, उसी प्रकार यहां अखबारों में लालू प्रसाद यादव के कैदी नंबर को भी दिखा दिया जाता है, जबकि सभी जानते हैं कि बिहार या झारखण्ड में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हैं, फिर भी अखबारों व चैनलों की तो बात ही निराली है। सभी लिख रहे हैं, सभी न्यूज चला रहे हैं, पर जो जानकार हैं, वे समझते है कि सच्चाई क्या है?

जरा देखिये ये हैं ‘प्रभात खबर’ और ‘आज तक’ की सुर्खियां। ऐसा नहीं कि ये गड़बड़ियां इन्हीं दोनों ने की है, ऐसी गड़बड़ियां करने में और भी अखबार और चैनल है, जो मनगढ़ंत खबरें चलाकर जनता को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया। आज सुबह से ही विभिन्न चैनलों ने इस झूठी खबर को चला-चला कर लोगों को दिग्भ्रमित किया, वहीं कई अखबारों ने भी इस झूठी खबर को प्रकाशित कर आम जनमानस में भ्रांतियां फैलाने की कोशिश की।

लालू प्रसाद यादव को लेकर झूठी खबर प्रकाशित करनेवाले अखबारों एवं चैनलों को लेकर सोशल साइट पर भी ये मुद्दा जोर-शोर से उठा और कई लोगों ने इसे फर्जी समाचार बताते हुए, ऐसे चैनलों और अखबारों की कड़ी आलोचना की। साथ ही यह भी बताया कि जेल अधीक्षक ने इन समाचारों से स्वयं को अलग रखा है। जो बताता है कि ये समाचार पूर्णतः भ्रामक है, कई ने तो इसे फर्जी समाचार बताते हुए उन सारे चैनलों एवं अखबारो की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने भ्रामक समाचार छापे, इनकी कड़ी आलोचना करनेवालों में बुद्धिजीवियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पत्रकार भी हैं।

Krishna Bihari Mishra

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