तिलचट्टे की आड़ में उससे मत उलझिये, वो मोदी है, सब की हवा निकालना जानता है, समय आने दीजिये, सब की हेकड़ी निकाल देगा
तिलचट्टों के आंदोलन पर वामपंथी छात्र संगठनों का कब्जा, पीछे से वामदलों/आपियों और कांग्रेसी नेताओं ने दी हवा, वामदलों/कांग्रेस के नेताओं को लग रहा कि मोदी सरकार गई। लेकिन इन मूर्खों को ये नहीं पता कि वो मोदी हैं, जो पूरे देश से नक्सलियों को मिटा सकता है, जो पाकिस्तान के बहावलपुर पर मिसाइल गिरा सकता है, जो धारा 370 हटाकर पूरे कश्मीर के पत्थरबाजों पर नकेल कस सकता है। जो बंगाल में तृणमूल के सारे मूल नष्ट कर सकता है। उसके लिए जंतर-मंतर पर बैठे ये कॉकरोच क्या मायने रखते हैं।
मोदी तो फिलहाल लोकतंत्रात्मक तरीके से इसे हैंडल कर रहा है। जब मोदी को लगेगा कि सीधी अंगूली से घी नहीं निकल रही, तो फिर उसे टेढ़ा करने भी आता है। बस आप घी देखिये और घी की धार देखिये। सबकी वो हेकड़ी निकाल देगा… जरा देखिये न, आज कॉकरोचों ने देश भर के युवाओं से देश भर के जिलों में प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। लेकिन ये प्रदर्शन हुए कहां, जहां वामदल छात्र संगठन मजबूत हैं।
ऐसे भी ये वामदल छात्र संगठनों से जुड़े छात्र जब चुनाव होते हैं तो जातीय समूहों में बंट कर अपना इतिश्री कर लेते हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे वामदलों के श्रमिक संगठनों की तगड़ी संगठन होने के बावजूद चुनाव में इनसे जुड़े सारे श्रमिक वोट उसी को देते हैं, जो उनके जाति-धर्म से आता हो। ऐसे में इन कॉकरोचों का आंदोलन कितना शक्तिशाली हैं। हमें लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी को ऐहसास है।
वे सिर्फ और सिर्फ मौके की तलाश में हैं। एक विकेट सोनम वागंचुक का अनशन तुड़वाकर गिरा चुके हैं। मैच चल रहा है। जल्द ही यह मैच खत्म हो जायेगा। लेकिन जब मोदी अपना एक्शन शुरु करेंगे तो इन कॉकरोचों और वामदलों/आपियों और कांग्रेसियों का क्या होगा? राम जाने। हमनें नरेन्द्र मोदी की कुंडली देखी है। उसे कोई नहीं हरा सकता। क्योंकि उसे ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त है।
नीट आंदोलन के नाम पर जंतर-मंतर पर जो भी अश्लीलता परोसी जा रही है। जो भी गाली-गलौज हो रहे हैं। उसे कोई भी चरित्रवान व्यक्ति सपोर्ट नहीं कर सकता। जिसके हृदय में थोड़ी सी भी गैरत हैं। वो भगवान राम के ऊपर छीटाकशीं नहीं कर सकता। वो हिन्दु धर्म के संतों के प्रति अपशब्द का प्रयोग नहीं कर सकता। भारत माता के प्रति गंदी टिप्पणी नहीं कर सकता। ये हम ऐसे ही नहीं लिख रहे। इसके सारे प्रमाण सोशल साइट पर ठीक उसी तरह तैर रहे हैं, जैसे नदीं में नौका। आप आंदोलन के नाम पर प्रधानमंत्री की मां-बहन को गाली दोगे। ये संस्कार कहां से सीखा, तुमलोगों ने।
चिन्ता मत करो। देश की जनता तुम्हारे आंदोलन को नजदीक से देख रही हैं और उन तथाकथित आंदोलनकारियों के मुख से निकलनेवाले उन सारे अश्लील शब्दों पर भी गौर कर रही हैं। नतीजा, जल्द ही तुम्हें देखने को मिलेगा। क्योंकि ये भारत है। बांगलादेश या नेपाल नहीं। यह गांधी व तिलक का देश है। यह भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद का देश है। इस देश के आंदोलन में गालियों का घालमेल, यहां की जनता कभी न बर्दाश्त की है और न करेगी। जब तुम जनता के बीच जाओगे तो सोच लो, क्या मुंह लेकर जाओगे।
