CPI-ML ने दी महागठबंधन को चेतावनी, जनता के साथ भाजपा की तरह झांसा-पट्टी न करें, नहीं तो…

भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद ने महागठबंधन के लोगों द्वारा कोडरमा संसदीय सीट को लेकर दिये गये बयान पर कहा कि वे जनता के साथ भाजपा की तरह झांसा-पट्टी कर रहे हैं। वामपंथी पार्टियां तो हेमंत के बुलावे पर सहमति जताई थी कि भाजपा को हराने के लिए गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगें, लेकिन गठबंधन के बड़े साझीदारों ने ही आपस में हिस्सा बांट लिया और वामपंथी दलों को कहा कि उनके लिए विधानसभा में सोचेंगे।

अंतिम दौर में भी जब बाबूलाल मरांडी गोड्डा क्षेत्र के लिए ताल ठोके तो उस समय भी कांग्रेस की ओर से यही बताया गया कि वह वामपंथी पार्टियों के लिए विधानसभा में सोचेंगे, यहां तक कि हेमंत सोरेन जब यह प्रस्ताव, सीपीआई के नेताओं के साथ बातचीत करके दे रहे थे, तो उस समय भी कांग्रेस के नेताओं की ओर से बयान आया कि वामपंथी पार्टियों के लिए समय पार हो गया, अब उनको लोकसभा में सीट नहीं दी जा सकती।

अचानक आखिर क्या बदलाव गया कि वामपंथी पार्टियों को वे एक सीट, वह भी हजारीबाग संसदीय सीट को देने की बात करने लगे।अगर इस सवाल पर उनकी ईमानदारी है तो प्रेस में बयान देने के बदले वामपंथी दलों से पहले उनको बात करनी चाहिए थी कि यह उनका प्रस्ताव है। प्रेस में सिर्फ बयानबाजी जनता के साथ झांसापट्टी के सिवा और कुछ नहीं।

वामपंथी पार्टियों के प्रति कोई ईमानदार सोच है तो उन्हें इस बात को लेकर सोचना चाहिए कि भाकपा माले लगातार कोडरमा में सिर्फ चुनावी राजनीति में भाजपा के खिलाफ में सबसे मजबूती से खड़ी है, 2014  के बाद भी जिस तरह से जनता के सवालों पर संघर्ष करती रही है, उस कारण से भाकपा माले कोडरमा संसदीय क्षेत्र की जनता के लिए पहली पसंद बन गई है।

इसीलिए अगर भाजपा को हराने की चिंता है तो कोडरमा में गठबंधन को भाकपा माले के पक्ष में खड़ा होना चाहिए और वामपंथ को साथ में लाना चाहते हैं तो पूरे झारखंड में वामपंथी दलों ने मिलकर 2014 के चुनाव में भी अपनी अच्छी उपस्थिति दर्ज की थी। उस अनुकूल भी वामपंथी पार्टियों को सम्मानजनक सीट  देने पर बात हो। वामपंथी जनता के सम्मान के साथ समझौता नहीं कर सकते।

कांग्रेसझाविमो,  वामदलों को सम्मान देने की नहीं, फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई है, जो खुद उनके लिए भी घातक है। कोडरमा को हजारीबाग के खिलाफ खड़ा करना जनता के हितों से खिलवाड़ है। वामपंथ अपने संघर्ष के क्षेत्र में भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी, उसे शिकस्त देगी।