राजनीति

भाकपा माले का 10 वां राष्ट्रीय महाधिवेशन 23 मार्च से मानसा पंजाब में

पिछले तीन वर्षों से मोदी सरकार द्वारा लोकतंत्र पर किये जा रहे हमले तथा कॉरपोरेट-सांप्रदायिक ताकतों का देश में फैलता जाल के खिलाफ भाकपा माले पंजाब के मानसा में राष्ट्रीय महाधिवेशन करने जा रही है। इस बात की जानकारी भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रांची में दी। उनका यह भी कहना था कि भाकपा माले का राष्ट्रीय महाधिवेशन 23 मार्च 2018 से प्रारंभ होगा जो भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों – भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहादत दिवस है। जिनके लिये आजादी का मतलब, अंग्रेजी शासन से आजादी के साथ-साथ एक ऐसी क्रांति से था, जो भारत को शोषण, दमन और गैर-बराबरी से मुक्त कर देगी।

उन्होंने कहा कि भगत सिंह की जन्मस्थली पंजाब में होने जा रहे भाकपा माले का यह महाधिवेशन भगत सिंह और उनके साथियों के ‘सर्वप्रथम जनता के लिए’ वाली देशभक्ति की भावना के प्रति स्वयं को पुर्नसमर्पित करने का एक ऐसा अवसर बनेगा, जो राष्ट्रवाद की नकाब में सांप्रदायिक जहर घोल रही फासीवादी ताकतों को करारा जवाब साबित होगा।

उन्होंने कहा कि ये महाधिवेशन ऐसे समय पर हो रहा है, जब नक्सलवाड़ी आंदोलन के 50 वर्ष और महान नवम्बर क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने जा रहे है। दमन को चुनौती और जनता के परिवर्तनकामी दृढ़ संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए ये दो महान क्रांतिकारी आंदोलन उन जैसों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।

उन्होंने भाजपा शासन पर प्रहार करते हुए कहा कि ‘अच्छे दिन’ के वायदे और भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी तथा महिलाओं के प्रति हिंसा से राहत दिलाने के नाम पर मोदी सरकार सत्ता में आई थी, लेकिन सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अवहेलना करते हुए, इस सरकार ने नोटबंदी, जीएसटी, आधार कार्ड, जैसी नीतियों को जनता पर जबरन थोप दिया, जिसके कारण आर्थिक मंदी, बेरोजगारी भारी पैमाने पर बढ़ रही हैं और अति गरीब एवं बेसहारा लोग मूलभूत नागरिक सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। नये रोजगार सृजन की दर पिछले आठ वर्षों में आज सबसे नीचले स्तर पर पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि एक ओर मोदी सरकार बेटी पढाओं और बेटी बचाओ का ड्रामा कर रही है, वहीं सच्चाई यह है कि झारखण्ड में एक मजदूर की 12 साल की बेटी भात-भात चिल्लाते हुए दम तोड़ देती है, क्योंकि आधार कार्ड लिंक न होने के कारण उसके घर वालों को राशन नहीं मिला था। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छात्राओं की पुलिस ने बुरी तरह से पिटाई कर दी, क्योंकि वे अपने लिए सुरक्षा और बराबरी मांग रही थी।

उन्होंने कहा कि मंदसौर में कृषि कर्ज माफी की मांग करने पर किसानों को गोली मार दी गई, जबकि भारी पैमाने पर बड़े पूंजीपतियों के कर्ज माफ कर दिये गये हैं। धन्नासेठों ने भारी-भारी कर्ज ले, जिन बैंकों को बर्बाद कर दिया, नोटबंदी के माध्यम से उसकी भरपाई आम जनता के पैसे बैंकों में जमा करा कर की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट हो रहा है, और नौजवानों की नौकरियां चली गई है, वहीं अमित शाह और नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर अजित डोभाल जैसों के बेटे खूलेआम भ्रष्टाचार और क्रौनी पूंजीवाद का बेखौफ आनन्द उठा रहे है, पूरी बेहयाई के साथ मोदी सरकार विदेशों से काला धन लाने के वायदे से भी मुकर चुकी है, जबकि पनामा और पैराडाइज पेपर्स से खुलासा हुआ है कि विदेशों में भारी मात्रा में काला धन जमा है।