हेमन्त सरकार व उनके इर्द-गिर्द भटकनेवालों की भ्रष्ट नीतियों ने EX-CM रघुवर को दिया बोलने का मौका, HC की टिप्पणी “लोग जानवरों की तरह जी रहे” से छोड़ा तीर, कहा अबुवा राज के बबुआ मुख्यमंत्री कर रहे जल जंगल जमीन का दोहन

“न भूतो न भविष्यति” झारखंड में ऐसी सरकार न बनी थी, न बनेगी की संज्ञा देते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हेमन्त सरकार पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि देश की सबसे कमजोर व सबसे अक्षम मुख्यमंत्री के दो वर्षों के कार्यकाल में एक भी योजना नहीं, जिसका हेमन्त सरकार ने शिलान्यास और उद्घाटन किया हो। पूर्व की बीजेपी की सरकार के कार्यों का उद्घाटन यह सरकार कर रही है।

प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में जनता की सरकार नहीं, बल्कि परिवार के संरक्षण में सिंडिकेट, माफिया और बिचौलियों की सरकार चल रही है। जंगलों की कटाई, बालू की ढुलाई, खनिज संपदा का दोहन अपने चरम सीमा पर है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी “लोग जानवर की तरह जी रहे हैं” सरकार की स्थिति बताने के लिए काफी है।

हेमन्त सरकार ने प्रदेश का बेड़ा गर्क कर दिया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक भी फाइल बिना सीएमओ में कमीशन दिए पास नहीं होता। योजना स्वीकृति पर कमीशन, टेंडर फाइनल होने पर कमीशन, योजना आवंटन होने पर कमीशन, और ट्रेजरी बिल पास करने पर कमीशन लगता है। प्रत्येक स्तर पर कमीशन का खेल खेला जा रहा है।

मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक सभी अपरिपक्व, सरकार टोटली कन्फ्यूज्ड

श्री दास ने कहा कि पिछली बीजेपी सरकार ने स्थानीय को नौकरी के प्रावधान के लिए हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला व नौ जनजातीय भाषा शामिल कर नियोजन नीति बनाया था। एक लाख को नौकरी दिया था। दो वर्षों में 18068 शिक्षक, 9162 पुलिसकर्मी, समेत 31 हजार सरकारी नियुक्ति व 10 हजार को स्वरोजगार से जोड़ा गया था।

एक लाख सखी मंडल का गठन कर 15 लाख महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया था। किंतु इस सरकार ने पहले वर्ष 5 लाख को सरकारी नौकरी का वादा, नौकरी नहीं तो भत्ता देने का वादा किया था किंतु नियुक्ति तो नहीं 13 हजार की नौकरी छिनने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में 13 शेड्यूल और 11 नॉन शेड्यूल जिलों में 9 हजार शिक्षकों की बहाली किया था।

किंतु हेमन्त सरकार ने हाईकोर्ट में गलत नियोजन नीति बताया, कोर्ट ने फैसला दिया फिर हेमन्त सरकार ही सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कहने लगी। कुल मिलाकर इस सरकार को क्या करना है यह भी पता नहीं, सरकार टोटली कन्फ्यूज़्ड है।

परिवार के संरक्षण में सिंडिकेट, माफिया और बिचौलियों की चल रही है सरकार

उन्होंने कहा कि हेमन्त सरकार ने ऐसी नियोजन नीति बनाया जिस पर हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी भी किया था। शराब नीति माफियाओं के समर्थन में बनाया गया। साइकिल के लिए हमारी सरकार साढ़े तीन हजार डीबीटी के माध्यम से दे रही थी। किन्तु कमीशन के लिए इस सरकार ने साइकिल फैक्ट्री लगाकर साइकिल देने का वायदा किया। आंगनबाड़ी में रद्दी भोज्य पदार्थ दिए जाने के बाद रद्द किए गए रेडी टू ईट द्वारा कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों को लाया गया। यह कार्य सिर्फ कमीशन को बढ़ावा देने के लिए दिया गया और सरकार अपनी पीठ थपथपाने का कार्य किया।

झारखंड की संस्कृति और विरासत के साथ खिलवाड़ कर रही हेमन्त सरकार

उन्होंने कहा कि पूत के पांव पालने में नजर आता है। इस सरकार ने सरकार बनते ही किये गए वादों को अमलीजामा पहनाने के बजाए अलगाववादी राष्ट्रविरोधी पत्थरगढ़ियों पर लगे आरोप को वापस लिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वोट बैंक के लिए भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू की संस्कृति विरासत को समाप्त करने में यह सरकार लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने हजारों सरना स्थल, मसना स्थल और धूमकड़िया भवन का निर्माण करवाया जबकि इस सरकार में एक भी पवित्र स्थानों का निर्माण नहीं करवाया। सीएनटी एसपीटी का उल्लंघन कर गांवों में विदेशी धर्म का अड्डा बना दिया गया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री बताएं कितने भोले भाले आदिवासियों का धर्मांतरण किया गया। लोभ लालच के दम पर धर्मांतरण हो रहा है।

लव जिहाद के नाम पर बांग्लादेशी हमारे आदिवासी बहनों की संपत्ति हड़प रहे हैं। सत्ता में बैठे मठाधीशों के कारण आदिवासियों की संख्या घट रही है। विदेशी धर्म मानने वाले सरना धर्म के लोगों को धर्मान्तरित कर रहे हैं। चार फीसदी उर्दू बोलने वालों के लिए उर्दू को प्राथमिकता दी जा रही है।

आदिवासी राज में शहीदों के परिवारों को ठगने का हुआ काम

उन्होंने कहा कि रूपा तिर्की हो या सिदो कान्हू के वंशज रामेश्वर मुर्मू की हत्या हुई। रूपा तिर्की मामले में जनांदोलन व कोर्ट की फटकार के बाद  सीबीआई जांच का आदेश दिया गया किन्तु शहीद के वंशज की हत्या पर सीएम ने सीबीआई जांच का आश्वासन देकर भी सीबीआई जांच की अनुशंसा नहीं किया। शहीदों के परिवार को भी ठगने का कार्य किया।

सरकार बनते ही अलगाववादियों के इशारे पर आदिवासी समाज के सात लोगों की नरसंहार हुई। लोहरदग्गा में दंगा हुआ। 10 मॉब लॉन्चिंग की घटना में 6 कई हत्या और 13 घायल हुए। भगवान बिरसा मुंडा के संस्कृति को नष्ट करने वालों ने दलित नौजवान संजू प्रधान की दिनदहाड़े हत्या कर दी और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि जरूरत पड़ेगा तो कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।