रघुवर की गलत नीतियों ने कांग्रेस को दिया उभरने का मौका

आज कांग्रेसी बहुत खुश है, काफी वर्षों के बाद रांची की शहरों पर खूब दीखे कांग्रेसी। मौका था – भारत छोड़ो आंदोलन के अवसर पर रांची स्थित झारखण्ड विधानसभा के घेराव का। बहुत वर्षों के बाद झारखण्ड के विभिन्न इलाकों से कांग्रेसियों का हुजूम रांची की सड़कों पर था। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश व उत्साह भी दिखा, साथ ही दीखे वे लोग जो फिलहाल किसी न किसी कारण से केन्द्र व राज्य सरकार की गलत नीतियों से नाराज हैं।

आज कांग्रेसी बहुत खुश है, काफी वर्षों के बाद रांची की शहरों पर खूब दीखे कांग्रेसी। मौका था – भारत छोड़ो आंदोलन के अवसर पर रांची स्थित झारखण्ड विधानसभा के घेराव का। बहुत वर्षों के बाद झारखण्ड के विभिन्न इलाकों से कांग्रेसियों का हुजूम रांची की सड़कों पर था। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश व उत्साह भी दिखा, साथ ही दीखे वे लोग जो फिलहाल किसी न किसी कारण से केन्द्र व राज्य सरकार की गलत नीतियों से नाराज हैं।  झारखण्ड में वैसे भी सीएनटी-एसपीटी, स्थानीय नीति, भ्रष्टाचार, बढ़ती नौकरशाही, चौपट विधि-व्यवस्था से आम आदमी परेशान है, साथ ही मुख्यमंत्री ऱघुवर दास द्वारा प्रतिदिन नई-नई बातें और विकास की लंबी चौड़ी कहानी और भाषण से आम आदमी इतना नाराज है, कि अगर आज चुनाव हो जाये तो भाजपा की सारी हेकड़ी निकल जाये। बस आम जनता को मौका नहीं मिल रहा।

विकास योजनाओं का ये हाल है कि कहीं विकास दिख नहीं रहा, स्वयं राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का बुरा हाल है, स्वयं भाजपा के ही बडे नेता जैसे करिया मुंडा सरकार की काम-काज प्रणाली पर अंगूली उठा चुके है। जनता के अंदर जनाक्रोश इतना है कि पूछिये मत। रघुवर सरकार का हाल यह है कि उसके कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री को देखना पसंद नही करते। भाजपा कार्यकर्ताओं का तो साफ कहना है कि इस बार जब भी चुनाव होंगे, तो वे भाजपा को जीताने के लिए आम जनता के पास नहीं जायेंगे, बल्कि भाजपा को बचाने के लिए आम जनता के पास जायेंगे, क्योंकि जिनके पास जाते थे, वे स्वयं इन दिनों राज्य सरकार की नीतियों से बहुत नाराज हो चले है, ऐसे में कोई भी पार्टी आक्रोशित जनता को मरहम लगाने का काम करेगी तो उसके कार्यक्रम में भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है।

कुल मिलाकर कांग्रेस का आज का विधानसभा घेराव, अपने मकसद में सफल रहा, जिन्हें दिखाना था यह घेराव, उसे वे दिखा भी चुके, साथ ही अपने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में एक प्रकार का विश्वास जगाया कि कांग्रेस में अभी भी दम खम है, और वह भाजपा को टक्कर देने की ताकत रखती है। ऐसे भी राज्य में रघुवर सरकार की छवि आदिवासी और किसान विरोधी की है, इनके राज में किसानों का जो आत्महत्या करने का सिलसिला जो शुरु हुआ, वह थमने का नाम नही ले रहा, विधि व्यवस्था तो चौपट ही है, आधारभूत संरचना का हाल ये है कि राजधानी रांची में बिजली पर आफत है, जबकि दावे तो सरकार के इतने है कि पूछिये मत। ऐसे दयनीय हाल में, कांग्रेस ने विधानसभा का घेराव कर, राज्य की जनता के बीच अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

Krishna Bihari Mishra

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और अंततः रघुवर सरकार सीएनटी-एसपीटी एक्ट मामले में बैकफूट पर चली गई। विपक्ष के दबाव और जनजातीय परामर्शदातृ पर्षद द्वारा बार-बार संशोधन प्रस्ताव को वापस लेने की मांग तथा भाजपा के अंदर ही एक बड़ा वर्ग जो रघुवर सरकार के इस निर्णय के खिलाफ था, इस संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ मुखर होकर अपनी बात रांची से लेकर दिल्ली तक रख रहा था। इस संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ पूरा झारखण्ड एक होकर रघुवर सरकार के खिलाफ खड़ा था, रांची में आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा था।

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