मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र पर लगा दाग, यौन उत्पीड़न निरोध शिकायत समिति ने की पुष्टि

दो महिलाकर्मियों ने मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र पर आरोप लगाया था कि उनके साथ यहां के वरीय अधिकारियों का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक एवं अशोभनीय होता है, जो अग्राह्य है। उन्होंने इसकी शिकायत राज्य महिला आयोग झारखण्ड से की थी, और इसकी प्रतिलिपि राष्ट्रीय महिला आयोग नई दिल्ली, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, मंत्री महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा, मुख्यमंत्री के सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भेजी थी।

याद करिये, 19 जनवरी 2017, मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत दो महिलाकर्मियों ने मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र पर आरोप लगाया था कि उनके साथ यहां के वरीय अधिकारियों का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक एवं अशोभनीय होता है, जो अग्राह्य है। उन्होंने इसकी शिकायत राज्य महिला आयोग झारखण्ड से की थी, और इसकी प्रतिलिपि राष्ट्रीय महिला आयोग नई दिल्ली, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्री महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा, मुख्यमंत्री के सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भेजी थी। इस आशय के साथ कि शायद किसी को उन पर तरस आ जाये और उन्हें न्याय मिले, पर अफसोस कि किसी ने नहीं सुनी। संज्ञान नहीं लिया। इसी बीच इन महिलाकर्मियों ने अपना संघर्ष नहीं छोड़ा। विभिन्न जगहों पर यह पत्राचार करती रही।

इसी बीच मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रधान सचिव संजय कुमार ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में विभागीय महिला यौन उत्पीड़न निरोध शिकायत समिति का गठन कर दिया। जिसका अध्यक्ष शालिनी वर्मा को बनाया गया, पर कालांतराल में उनका स्थानांतरण दुमका हो गया, इस कारण इस विभागीय समिति की अध्यक्ष सुनीता धान बना दी गई।

सूत्र बताते है कि सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव एवं मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रधान सचिव संजय कुमार ने इस प्रकरण की लगातार उनके पास आ रही शिकायत को देखते हुए एक त्रिसदस्यीय विभागीय कमेटी बनाई और उसे एक महीने के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा। इस त्रिस्तरीय विभागीय कमेटी में सुनीता धान अध्यक्ष, निधि स्मिता टोपनो और अविनाश कुमार को सदस्य बनाया गया। इस त्रिसदस्यीय कमेटी ने 8 नवम्बर 2017 को ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें इस कमेटी ने स्वीकार किया है कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा, और इस कमेटी ने मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र की गतिविधियों पर संदेह व्यक्त करते हुए गंभीर टिप्पणियां कर दी।

आश्चर्य इस बात की है कि इस विभागीय रिपोर्ट के मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुंच जाने के बाद भी, सत्य सामने आ जाने के बाद भी, इस फाइल को दबा कर रखा गया है, तथा मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चला रहे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। अब इसमें किसे दोषी माना जाये, मुख्यमंत्री के वर्तमान प्रभारी प्रधान सचिव सुनील कुमार बर्णवाल को या मुख्यमंत्री रघुवर दास को, जो बराबर महिलाओं के सम्मान की दुहाई देते नहीं थकते। … और अब बात विभागीय महिला यौन उत्पीड़न निरोध शिकायत समिति के रिपोर्ट की। समिति ने माना है कि…

  • Girls used to be followed till the door of washroom and their conversation inside the washroom was eavesdropped by any female staff at he behest of Administrator but not any voyeuristic intention was reported behind the act. Administrator apprehended that some of the girls used to spend more than necessary time in washroom and he tried to find out the reason behind with the help of some female employee.
  • जांच के क्रम में यह तथ्य सामने आया कि नियोक्ता द्वारा समय-समय पर performance evalution test संचालित कराया जाता था, जिसके आधार पर discriminate ground पर selective increment/promotion प्रदान किये जाने की जानकारी मिली।
  • शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दायर करने के बाद स्वयं नियोक्ता द्वारा सभी महिलाकर्मियों से जनसंवाद केन्द्र में उनके प्रति सकारात्मक एवं मर्यादित व्यवहार किये जाने के बाबत् लिखित उद्घोषणा समर्पित करवाना संदेह उत्पन्न करता है कि आखिर इस तरह के लिखित उद्घोषणा की आवश्यकता क्यों पड़ी। कोई भी महिलाकर्मी नियोक्ता के प्रति पेशेवर निष्ठा एवं अपनी आर्थिक वचनबद्धता के कारण सार्वजनिक तौर पर संस्थान के बारे में किसी भी तरह की नकारात्मक टिप्पणी नहीं कर सकती थी।
  • PRI to PRI conversation की नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराये गये आडियो रिकार्डिंग से प्रतीत होता है कि एक पुरुष आइटी एक्सपर्ट द्वारा कार्यस्थल पर किसी अन्य कर्मी से किया गया वार्ता केजूयल था, जो जनसंवाद के रुटीन कार्यों से संबंधित नहीं होकर निजी था।
  • जांच समिति द्वारा सीसीटीवी रिकार्डिंग की जांच नहीं हो पाई, चूंकि संबंधित घटना लगभग एक वर्ष पूर्व की है। अतएव इतने पुराने सीसीटीवी रिकार्डिंग जांच समिति को प्राप्त नहीं हुई।
  • There was a case of targeted victimization of ones, who didn’t succumb to the undue pressure, questioning and demand of compliance to the so called unethical practices at the workplace at the hand of employee.
  • Someone secretly asked for the justice and it was said that everybody knows about the unethical practices at the workplace but no one would dare to speak publicly against the employer because of their financial needs and fear of expulsion from the job and manhandling at the hand of employer.
  • मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के कार्यों के अलावा माइका कंपनी के द्वारा अन्यत्र चल रही परियोजनाओं पर भी जनसंवाद कर्मियों द्वारा कार्य लिया जाता था (जैसे – उडान)।
  • एक पुरुष आईटी एक्सपर्ट एवं जनसंवाद केन्द्र के प्रशासक के मध्य का आपसी समन्वय द्वेषपूर्ण रहने के कारण वे एक दूसरे विभिन्न विषयों को लेकर दोषारोपण करते रहते थे। प्रशासक के द्वारा कई बार आईटी एक्सपर्ट के विरुद्ध कार्यवाही की गई। यह प्रतीत होता है कि आईटी एक्सपर्ट महिलाकर्मियों की सहमति लिये बिना ही उन पर होनेवाली उत्पीड़न को माध्यम बनाकर प्रशासक के विरुद्ध विभिन्न सरकारी कार्यालयों में पत्राचार करने लगा। It appears that his act of filling a complaint against the employer was moved by the intention of settling personnel score with them. But at the same time there is no denial of the fact some unethical things which are evident in the statements given by former lady employees were existing at the workplace.

अब सवाल मुख्यमंत्री रघुवर दास से, पिछले मंगलवार यानी 24 अप्रैल को उन्होंने खुब अपनी पीठ थपथपाई थी कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के शानदार तीन साल पूरे हो गये। भाई, ये कैसा तीन साल, ये कैसा शानदार, जहां महिलाकर्मियों का सम्मान ही सुरक्षित नहीं, जहां कार्यरत महिलाकर्मियों को न्याय नहीं मिलता, और जब आपके मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाकर्मियों का सम्मान सुरक्षित नहीं और आप न्याय उन्हें नहीं दे पाते, जैसा कि आप ही के विभागीय समिति की रिपोर्ट बता रही है, तो आपके द्वारा ऐसे संवाद बोलने का मतलब क्या है?  जनता जानना चाहती है।

सच्चाई यह है कि भय के मारे, पांच-छह हजार की नौकरी हाथ से न निकल जाये, इस भय से महिलाकर्मियों का दल वहां कार्य कर रहा है और गलत होने पर भी प्रतिकार नहीं करता और ऐसे में आप अपनी पीठ थपथपाने में लगे हैं, अभी भी वक्त है, सच्चाई को देखिये और उन दो महिलाकर्मियों को न्याय दिलाइये, नहीं तो जनता सब देख रही है कि आपके आवासीय कार्यालय में कैसे विभागीय शिकायत कमेटी की जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया और आज भी गलत लोग काम जारी रखे हुए है।

Krishna Bihari Mishra

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