CM बताएं कि कॉलेज के प्रथम वर्ष में प्रवेश लेनेवाले सभी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप कब मिलेगा?

‘पहली बार बहुमत की सरकार बनी है, झारखण्ड विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, पारदर्शी और ईमानदार सरकार है, ये जनता के विश्वास पर खड़ी उतरनेवाली सरकार है, ये वो डॉयलॉग है, जो मुख्यमंत्री रघुवर दास के तकिया कलाम है, पर सच्चाई क्या है? इस सरकार के चार साल होने को आये पर जितना युवाओं के आंखों में इस रघुवर सरकार ने धूल झोंका, आज तक किसी ने नहीं झोंका,

पहली बार बहुमत की सरकार बनी है, झारखण्ड विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, पारदर्शी और ईमानदार सरकार है, ये जनता के विश्वास पर खड़ी उतरनेवाली सरकार है, ये वो डॉयलॉग है, जो मुख्यमंत्री रघुवर दास के तकिया कलाम है, पर सच्चाई क्या है? इस सरकार के चार साल होने को आये पर जितना युवाओं के आंखों में इस रघुवर सरकार ने धूल झोंका, आज तक किसी ने नहीं झोंका, आज स्थिति यह है कि यहां का युवा पूरे देश में दर-दर भटक रहा हैं, पर उसका कोई पूछ नहीं हो रहा, युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर पांच से छः हजार रुपये की नौकरी दिलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे कोई भी युवा लेने को तैयार नहीं है, क्योंकि वो जानता है कि महानगरों में पांच-छः हजार की नौकरीवालों की क्या हैसियत ह?

इस सरकार में शामिल मंत्री-मुख्यमंत्री ने इन चार सालों में, अपने बच्चों और खुद के लिए तो अच्छी व्यवस्था कर ली, पर यहां के युवाओं को कहीं का नहीं छोड़ा, उसके लिए आपको किसी से पूछने की जरुरत भी नहीं, 12 नवम्बर 2014 को रांची के बीएनआर होटल में बड़े ही ताम-झाम से मीडिया के बीच में प्रस्तुत किया गया, इनके चुनावी घोषणा पत्र पर नजर डालिये, और देखिये उस चुनावी घोषणा पत्र में, कि इस सरकार ने यहां के युवाओं से कौन-कौन से वायदे किये थे, और उन वायदों की फिलहाल सही तस्वीर क्या है?

इन्होंने बड़े लंबे-चौड़े वायदे किये थे, वायदा किया था, वायदा नंबर 1 – सभी रिक्त सरकारी पदों पर शीघ्र भर्ती, सच्चाई – अभी भी कई सरकारी पदों में रिक्तियां भरी पड़ी है। वायदा नंबर 2 – उद्योग व निजी कंपनियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता, सच्चाई – अरे उद्योग धंधे ही ठप हैं तथा निजी कंपनियों ने यहां उद्योग लगाने में प्राथमिकता ही नहीं दिखाई तो स्थानीय लोगों को इन कंपनियों में नौकरी मिलेगी कहां से?  वायदा नंबर 3 – कॉलेज के प्रथम वर्ष में प्रवेश लेनेवाले सभी छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप/टैबलेट, सच्चाई – किसी भी कॉलेज के प्रथम वर्ष में प्रवेश पानेवाले किसी भी छात्र-छात्राओँ को न तो लैपटॉप मिला और न ही टैबलेट।

वायदा नंबर 4 – राज्य के हर मंडल में एक मेडिकल कॉलेज, सच्चाई – सरकार से पूछिये कि अब तक कितने मंडल में कितने मेडिकल कॉलेज खोले?  वायदा नंबर 5 – रोजगार में सहायक विदेशी भाषाओं जैसे चीनी, जापानी आदि के शिक्षण की व्यवस्था, सच्चाई – पूछिये रघुवर दास से कि किस विश्वविदयालय या महाविद्यालय में इन भाषाओं की पढ़ाई जारी है। वायदा नंबर 6 – राज्य में आइआइएम, आइआइटी, राष्ट्रीय विधि महाविद्यालय व राष्ट्रीय मान्यता के अन्य शिक्षण संस्थाओं की स्थापना का प्रयास, सच्चाई – सरकार से पूछिये कि आपने कितने आइआइएम, आइआइटी, राष्ट्रीय विधि महाविद्यालय खोले, अरे राज्य में जो भी हैं, वो पूर्व से हैं, आपका इसमें कोई योगदान ही नहीं।

वायदा नंबर 7 – राज्य भर के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर अविलम्ब भर्ती, सच्चाई यह है कि आप विद्यालयों को शिक्षक क्या दोगे, आपने तो विद्यालय ही बंद करने का अभियान चला दिया, विभिन्न महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों में मानदेय पर अयोग्य शिक्षक बहाल कर दिये, जिससे यहां की शिक्षा-व्यवस्था ही चौपट हो गई, और सच्चाई तो यह भी है कि मानदेय पर बहाल शिक्षकों को आपको देने के लिए वेतन तक नहीं, क्योंकि दस महीनों से अपने वेतन पाने के लिए, ये संविदा पर बहाल युवा शिक्षक अपनी किस्मत को कोस रहे हैं।

Krishna Bihari Mishra

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