क्या CM साहेब, 2018 बीत गया, कहां हैं 24 घंटे बिजली, वादा याद है न, जनता के बीच वोट मांगने मत जाइयेगा

“झारखण्ड में कोयले का भंडार है, इसके बाद भी झारखण्ड को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है, यह दुखद स्थिति है। इसके पूर्व की सरकारों ने ऊर्जा के विकास के लिए कोई काम नहीं किया। 2018 तक राज्य के 32 हजार गांवों के 68 लाख घरों तक न सिर्फ बिजली पहुंच जायेगी, बल्कि सातों दिन 24 घंटे बिजली आपूर्ति भी की जायेगी, यदि ऐसा नहीं कर पाये, तो वे 2019 के चुनाव में जनता से वोट मांगने नहीं जायेंगे।”

याद करिये, 29 अगस्त 2017, गढ़वा के रमना के भागोडीह में विद्युत ग्रिड सब स्टेशन के शिलान्यास का दिन, मुख्यमंत्री रघुवर दास एक महती जनसभा को संबोधित कर रहे हैं, वे कह रहे हैं – “झारखण्ड में कोयले का भंडार है, इसके बाद भी झारखण्ड को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है, यह दुखद स्थिति है। इसके पूर्व की सरकारों ने ऊर्जा के विकास के लिए कोई काम नहीं किया। 2018 तक राज्य के 32 हजार गांवों के 68 लाख घरों तक न सिर्फ बिजली पहुंच जायेगी, बल्कि सातों दिन 24 घंटे बिजली आपूर्ति भी की जायेगी, यदि ऐसा नहीं कर पाये, तो वे 2019 के चुनाव में जनता से वोट मांगने नहीं जायेंगे।”

जनाब रघुवर दास, खुद को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की श्रेणी में रखने चले थे, पर नीतीश कुमार तो बनने से रहे, रघुवर दास भी नहीं रहे, अब सवाल उठता है कि 29 अगस्त 2017 को जो उन्होंने संकल्प लिया था कि अगर “वे ऐसा नहीं कर पाये, तो वे 2019 के चुनाव में जनता से वोट मांगने नहीं जायेंगे” क्या अब वे अपना यह वायदा पूरा करेंगे? कि उनका यह वायदा भी ढपोरशंखी जैसा हो जायेगा।

ज्ञातव्य है कि कभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की जनता से वायदा किया था कि वे बिहार के हर घर में बिजली पहुंचा देंगे और अगर ऐसा नहीं किया, तो वे आनेवाले बिहार विधानसभा के चुनाव में जनता से वोट मांगने नहीं आयेंगे, उन्होंने ऐसा कर दिखाया और जनता से वोट भी मांगे, जनता ने वोट दिया भी। यहीं नहीं उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से कहा कि आप उन्हें वोट दें, वे बिहार में शराबबंदी करा देंगे, जनता ने वोट दिया और उन्होंने बिहार में शराबबंदी भी लागू कर दिया।

सवाल अभी भी है कि हे रघुवर दास, आपने अपने 24 घंटे बिजली देने का वायदा तो पूरा किया नहीं, और 2018 आज समाप्त भी हो गया, अब आप खुद बताइये कि झारखण्ड की जनता के पास, आप कौन सा मुंह लेकर, वोट मांगने जायेंगे। यहां तो राजधानी रांची ही नहीं, बल्कि धनबाद, बोकारो, पलामू, गिरिडीह, चाईबासा समेत कई शहर व गांवों के लोग बिजली के लिए तरस रहे हैं, कई गांवों में तो आज भी अंधेरा पसरा हुआ है, इसका जवाब क्या आपके पास है? और अगर हैं, तो आपको प्रेस कांफ्रेस करके जनता को बताना चाहिए, नहीं तो जनता तो जानती है कि उसके उपर इस बार हाथी उडानेवाले व्यक्ति को, पीएम नरेन्द्र मोदी ने उनके माथे पर बिठा दिया, और जैसे हाथी नहीं उड़ता, ठीक उसी प्रकार मुख्यमंत्री रघुवर दास की बात भी, उस हाथी के न उड़ने जैसी होगी।

याद करिये, 29 अगस्त 2017 को राज्य सरकार द्वारा दिया गया, वह विज्ञापन, जो हर अखबारों में छपी थी, आपके याददाश्त के लिए, मैंने वह विज्ञापन भी खोज कर आपके समक्ष प्रस्तुत कर दिया है, जिसमें सीएम रघुवर दास ने वादा किया है कि 2018 तक हर घर में बिजली, क्या ये विज्ञापन भी झूठा था। जो रघुवर सरकार अपने शासनकाल में अपने उत्पादन का एक मेगावाट बिजली भी नहीं बढ़ा सकी, वह बिजली की मांग को कैसे उपलब्ध करायेंगी?

क्या ये सही नहीं कि डीवीसी आज भी आंखे तरेरती हैं तो झारखण्ड के कई शहर अंधेरे में डूब जाते हैं, क्या ये सही नहीं कि आज भी कई गांवों में बिजली ठीक से नहीं पहुंची हैं, बल्कि वहां पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा हैं। स्थिति ऐसी है कि न तो राज्य के मुख्यमंत्री और न ही कोई अधिकारी ही यह दावा ठोक सकता है कि राज्य के सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि ऊर्जा विभाग, राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास ही है, अब आप इसी से समझिये कि हमारे मुख्यमंत्री रघुवर दास कितने होनहार हैं, वे क्या बोलते हैं, और क्या करते हैं, सबके सामने है।

याद रखियेगा, ये 2019 के लोकसभा-विधानसभा चुनाव में वोट भी मांगने आयेंगे, पर उनसे जरुर पूछियेगा कि हे होनहार मुख्यमंत्री जी, आपने तो कहा था कि 2018 तक अगर 24 घंटे बिजली नहीं उपलब्ध कराया तो वोट मांगने नहीं आयेंगे, तो फिर आप वोट मांगने के लिए किस मुंह से आ गये, थोड़ा तो मुख्यमंत्री पद का लाज रखिये। सच्चाई यहीं है कि आज भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना, ऊर्जा विभाग के लिए टेढ़ी खीर हैं।

Krishna Bihari Mishra

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