CM रघुवर के कानों पर नहीं रेंग रही 75000 आंगनवाड़ी सेविकाओं/सहायिकाओं का दर्द

झारखण्ड की 75000 आंगनवाड़ी सेविका/सहायिकाएं पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, पर राज्य सरकार इनकी उचित मांगों को पूरा करने को तैयार नहीं हैं और न ही इस हड़ताल को समाप्त कराने के लिए कोई पहल ही की है। पिछले कई दिनों से राजभवन के समक्ष प्रदर्शन कर रही महिलाएं तो साफ कहती है कि सरकार तो स्वयं द्वारा किये गये वायदों को भी नहीं पूरा कर रही है,

झारखण्ड की 75000 आंगनवाड़ी सेविका/सहायिकाएं पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, पर राज्य सरकार इनकी उचित मांगों को पूरा करने को तैयार नहीं हैं और न ही इस हड़ताल को समाप्त कराने के लिए कोई पहल ही की है। पिछले कई दिनों से राजभवन के समक्ष प्रदर्शन कर रही महिलाएं तो साफ कहती है कि सरकार तो स्वयं द्वारा किये गये वायदों को भी नहीं पूरा कर रही है, इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता हैं। दुसरी ओर जमशेदपुर में भी आंगनवाड़ी सेविकाएं सड़कों पर उतर गई है, ये प्रदर्शन करती हुई गीत भी गा रही हैं, उनका कहना है कि शायद गीतों के माध्यम से उनकी आवाज राज्य के सीएम रघुवर दास तक पहुंच जाये। जरा गीत के बोल देखिये –“2200-4400 में जीना दुश्वार है, आजा मेरे रघुवर भैया तेरा इंतजार है।”

आंगनवाड़ी सेविकाओं ने विद्रोही 24.कॉम को बताया कि दिनांक 17 जनवरी 2018 से झारखण्ड प्रदेश आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर सेविका/सहायिकाएं अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर थी। दिनांक 23 जनवरी को प्रधान सचिव, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखण्ड रांची से लिखित वार्ता के दौरान सभी मांगों पर सहमति बनी, और सचिव द्वारा प्रतिनिधिमंडल को तीन माह का समय मांग पूरा करने का आश्वासन के बाद यूनियन हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया, परंतु 6 मई 2018 तक मांगों को पूरा नहीं किया गया, ये सरकार द्वारा यूनियन के साथ क्या धोखाधड़ी नहीं हैं।

आंगनवाड़ी सेविकाओं का कहना है कि आंगनवाड़ी सेविका/सहायिकाओं के लिए नियमावली बनायी जाय, सेविका/सहायिकाओं को तृतीय एवं चतुर्थवर्गीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाय, मानदेय की जगह वेतन दिया जाय। आंगनवाड़ी सेविकाओं को चौबीस हजार तथा सहायिकाओं को 12  हजार रुपये मानदेय एवं अतिरिक्त मानदेय 7 हजार रुपये एवं चार हजार दिये जाये।

आंगनवाड़ी सेविकाओं का कहना है कि झारखण्ड सरकार अन्य राज्यों की भांति अतिरिक्त मानदेय का भुगतान करें, जैसे दिल्ली, हरियाणा, तमिलनाडू तथा गोवा में दिया जा रहा हैं। आंगनवाड़ी सेविका/सहायिकाओं की सेवानिवृत्ति 60 से 65 वर्ष किया जाय, तथा एक मुश्त आर्थिक लाभ दो लाख रुपये एवं पेंशन लागू किया जाये। कार्यावधि में सेविका/सहायिकाओं की मृत्यु  होने पर उनके परिवारवालों को चार लाख रुपये एवं पेंशन लागू किया जाय।

आंगनवाड़ी सेविकाओं का यह भी कहना था कि 4 अप्रैल को जो छः बिन्दुओं पर सहमति बनी थी, उसे शीघ्र लागू किया जाये। ज्ञातव्य है कि गर्मी की छुट्टी, सेविका/सहायिकाओं के सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 वर्ष करने, अतिरिक्त मानदेय प्रदान करने के लिए सरकार से सिफारिश करने, भविष्य निधि लागू करने, महिला सरकारी कर्मचारी की तरह सेविका/सहायिकाओं को भी प्रसूति एवं मातृत्व लाभ की छुट्टी, हड़ताल अवधि का मानदेय का भुगतान करने की बात की गई थी।

इसी बीच आंगनवाड़ी सेविका/सहायिकाओं के इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही सुमन कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार शीघ्र केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित 2011 में लघु आंगनवाड़ी केन्द्र के सेविकाओं को सेविका का मानदेय के बराबर जो घोषणा किया गया था, उसे अविलम्ब लागू कर भुगतान करें, सांतवां वेतन के अनुसार मानदेय कर्मियों के वेतन मानदेय में वृद्धि करें, आंगनवाड़ी सेविका से ही प्रवेक्षिका पद पर शत प्रतिशत नियुक्ति करे, उम्र सीमा को शीघ्र हटाएं।

Krishna Bihari Mishra

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