अपराध

जब सीएम से उच्चाधिकारी नहीं भय खाते तो एसपी से थानेदार क्यों डरेगा?

बोलने से अच्छा है, करके दिखाइये। आजकल राजनेताओं का फैशन हो गया है, वे खुब डॉयलाग बोलना जान गये है, जैसे आज ही देखिये, झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखण्ड मंत्रालय में विधि व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की समीक्षा बैठक में क्या कहा –

1.       हम सब सेवक है और जनता मालिक, इसे न भूलें।

2.       राज्य के लोगों को सुरक्षा देना हमारी जिम्मेदारी है।

3.       लोगों की सुरक्षा से किसी प्रकार समझौता नहीं किया जायेगा।

4.       राज्य में सुदृढ़ कानून व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है।

5.       निर्दोष की हत्या हर हाल में रुकनी चाहिए।

6.       जो काम नहीं करेगा, उसे बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा।

7.       अकर्मण्य अधिकारी को बख्शेंगे नहीं।

और सच्चाई क्या है?

ये कल की रांची से प्रकाशित अखबार की कुछ प्रमुख अपराधिक घटनाओं का ब्यौरा है, वह भी सिर्फ एक दिन का, जरा इसे ध्यान से पढ़िये…

1.      धौनी के घर के पास वृद्धा से एक लाख की लूट।

2.       बरियातु में बंगाल की महिला से अपराधियों ने सोने की चेन छीन ली।

3.       बरियातु में ही सिंधी दुकान से अपराधियों ने एक छात्रा से मोबाइल छीन ली, पर पुलिस ने प्राथमिकी नहीं दर्ज की, सन्हा दर्ज किया।

4.       देवघर में सीनियर आइएएस की पत्नी से दुर्व्यवहार।

5.       रांची के हरमू में कमेटी खेलाने के नाम पर 50 लाख की ठगी।

6.       उग्रवादियों ने ओरमांझी में पोकलेन और जेसीबी फूंक दी।

7.       हर मंगलवार को मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में अपने से नीचे के सभी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करनेवाले मुख्यमंत्री के सचिव सुनील बर्णवाल के जिम्मे रहनेवाले विभाग का कारनामा – कोरियाई कंपनियों ने सात हजार करोड़ के निवेश से पल्ला झाड़ने की धमकी दे डाली।

अपराधियों के हौसले बुलंद

यह सब कल के अखबारों में छपे समाचार की सुर्खियां हैं…
इसी से समझ लीजिये,  यहां अपराधियों के हौसले कितने बुलंद है? यहां के अधिकारियों ने क्या-क्या कारनामे कर रखे हैं? अगर हम कई दिनों, महीनों और सालों का रिकार्ड रखें तो स्थिति भयावह हो जायेगी, ऐसे भी यहां कई दुष्कर्म और उसके बाद दुष्कर्म की शिकार लड़की की हत्या के मामले को देखें तो इस संबंध में किसी भी प्रकार की प्रगति नहीं दिखाई पड़ी, अपराधियों के हौसले बुलंद है, रांची में छिनतई की घटना तो आम बात है, राज्य की महिलाएं, कारोबारी व सामान्य नागरिक इतने डरे हुए है, कि कब कहां, कौन सी घटना किधर घट जायेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता।

शासन पर भीड़तंत्र हावी

भीड़तंत्र ने अपने ढंग से यहां कानून हाथ में ले रखा है, इसी भीड़तंत्र ने अब तक 12 लोगों की जानें ले ली है, जिसमें सभी समुदाय के लोग शामिल है, ऐसे में राज्य की कानून व्यवस्था कैसी है? आप अंदाजा लगा लें। ऐसा नहीं कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पहली बार इस प्रकार की मीटिंग ली है, ऐसी मीटिंग इन्होंने कई बार ली, पर मुख्यमंत्री का भय जो अधिकारियों पर होना चाहिए, वह भय इन अधिकारियों पर नहीं दिखाई पड़ता। जरा मुख्यमंत्री रघुवर दास ही बताये कि आज की बैठक में, जो उन्होंने कहा कि एसपी का डर थानेदार को होना चाहिए, तो ऐसे में मुख्यमंत्री का भय राज्य में कार्य कर रहे उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं होना चाहिए? क्या ये डर उच्चाधिकारियों को है, अगर नहीं तो फिर थानेदार एसपी से क्यों डरेगा? और इस हालात में इस प्रकार की मीटिंग का क्या मतलब?

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