अपनी बात

महाबुद्धू कांग्रेसियों को राजदुलारियों की मदद से सबक सिखाने में जूटे CM हेमन्त, इधर रामेश्वर उरांव का फूटा कंठ, स्वीकारोक्ति बयान पर उठाई अंगूली

आप माने या न माने, पर ये सच्चाई है, कि कांग्रेसी विधायकों और उनका नेतृत्व करनेवाले सारे के सारे नेता महाबुद्धू हैं और इन महाबुद्धूओं को इस बार राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने राजदुलारियों यानी झारखण्ड पुलिस की मदद से सबक सिखाने का काम किया है। इधर राजदुलारियों ने जिन फलवालों या ठेका मजदूरों को बोकारो से पकड़कर, रांची के होटल ली-लैक से पकड़ा हुआ दिखाया है, उसके स्वीकारोक्ति बयान पर पहली बार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व राज्य के वित्त मंत्री ने अंगूलियां उठा दी है। जिनके बयान आज कुछ अखबारों ने छापे हैं।

अगर पूरे मामले की विवेचना करें, तो साफ है कि दोनों पार्टियों में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा, इस बार सीएम हेमन्त कांग्रेसी विधायकों व मंत्रियों को सबक सिखाने में लग गये हैं, अब कांग्रेसी चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। चूंकि सरकार को अस्थिर करने की बात और किसी ने नहीं, बल्कि कांग्रेस के ही एक होनहार विधायक कहे जानेवाले एक विधायक कुमार जयमंगल ने प्राथमिकी दर्ज कराकर उठा दी।

 

जिसका समर्थन एक तरह से कांग्रेस के विधायक नमन विक्सल कोनगाडी ने यह कहकर कर दिया कि जनवरी में मंत्री पद के साथ मुंहमांगा ऑफर मिला था, लोग बड़ी मात्रा में पैसे लेकर आये थे, जिन्हें डांटकर भगा दिया। इसी पर बाबू लाल मरांडी नेता प्रतिपक्ष यह कहने से नहीं चूकते कि भाई ऐसे समय में उन्हें भगाना जरुरी था या उन्हें पुलिस से पकड़वाना जरुरी था। इन षडयंत्रकारियों को बचना और इस पर इतने दिनों की चुप्पी संदेह को जन्म दे रहा है।

इधर कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम पर भी अब आफत आ चुकी है, उनकी पत्नी के नाम पर करोड़ों के बने होटल इमराल्ड को सील करने का आदेश दे दिया गया है, साथ ही 2.68 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है। दैनिक प्रभात खबर में छपे इस खबर का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि आलमगीर आलम ने चुनाव आयोग को दिये गये शपथ पत्र में इसका आकलन 75 लाख करते हुए, इसकी कीमत 75 लाख दर्शायी है।

जबकि होटल इमराल्ड ऐसे जगह पर बनी है और उस होटल की बिल्डिंग को कोई देख लें तो वो जगह ही 75 लाख क्या पांच करोड़ रुपये तक में नहीं मिलेगी? कहने का तात्पर्य है कि इन महाबुद्धू कांग्रेसियों ने आम जनता को तो मूर्ख समझ ही रखा था, अब हेमन्त सोरेन को भी इसने मूर्ख समझने की कोशिश की थी।

ऐसे में हेमन्त सोरेन ने इन कांग्रेसियों को बता दिया कि वो उनसे ज्यादा तेज हैं, और ज्यादा काबिल ये बनने की कोशिश करेंगे तो धन से भी जायेंगे, जन से भी जायेंगे और जो थोड़ी-बहुत इज्जत है, उसका भी फलूदा बनने में ज्यादा देर नहीं लगेगी, इसलिए अच्छा यही रहेगा कि  ज्यादा तेज नहीं बने, जो मिल रहा हैं, उसी में संतोष करें और हमें निष्कंटक राज करने दें।

इधर सरयू राय ने एक बहुत ही खुबसूरत ट्विट कर दी हैं, जो इस सरकार को अस्थिर करने के इस ड्रामे की क्या स्थिति हैं, उसकी पुष्टि कर देती है। सरयू राय उवाच – “विधायकों की खरीद फरोख्त से झारखण्ड में सरकार गिराने का बहुप्रचारित मामला अंततः राजनीतिक नादानी का नायाब उदाहरण साबित होगा। जांच अधिकारी अपना काम पूरा कर लेंगे, निश्चित निष्कर्ष पर भी पहुंच जायेंगे, मगर इसके पीछे की असली बात सामने लाने में रुचि न सरकार को होगी और न प्रतिपक्ष को।”