CM हेमन्त ने झारखण्ड आंदोलनकारियों के लिए खोला खुशी का पिटारा – दिया सम्मान, आंदोलनकारियों के आश्रितों एवं विकलांगों को सरकारी नौकरी में होगी सीधी भर्ती

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लीजिये, झारखण्ड आंदोलनकारियों व आंदोलनकारियों के आश्रितों व विकलांगों के लिए पहली बार झारखण्ड के किसी मुख्यमंत्री ने खुशी का पिटारा खोला है, खुलकर उनके लिए उन हर चीजों की घोषणा कर दी, जिसका उन्हें इंतजार था। हम आपको बता दे कि आगामी एक मार्च को झारखण्ड आंदोलनकारियों का एक समूह झामुमो के वरिष्ठ नेता मथुरा महतो के नेतृत्व में इन्हीं सभी मांगों को लेकर झारखण्ड विधानसभा का घेराव करने की घोषणा कर रखा था।

लेकिन मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने उनकी मांगों को स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि आखिर झारखण्ड आंदोलनकारियों का सम्मान हेमन्त सरकार नहीं करेगी, तो और कौन करेगा? इसी बीच झामुमो विधायक मथुरा महतो ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के इन घोषणा का स्वागत किया है, साथ ही उन्हें दिल से बधाई भी दी। उनका कहना था कि पहली बार किसी सरकार ने झारखण्ड आंदोलनकारियों की सुध ली, जो सराहनीय है, प्रशंसनीय है, ये समय झारखण्ड आंदोलन में शामिल सभी परिवार के लोगों के लिए आनन्द का दिन है। हेमन्त सरकार ने आज झारखण्ड आंदोलनकारियों के लिए जो फैसला लिया, वो इस प्रकार है…

झारखण्ड राज्य अलग होने के 20 साल बाद अब अलग राज्य निर्माण के लिए आंदोलन करने वाले आंदोलनकारियों को राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती देने का फैसला किया है। सीधी भर्ती के लिए अवकाश प्राप्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की अध्यक्षता में एक आयोग का भी गठन किया जायेगा। आयोग प्राप्त आवेदनों के आधार पर दस्तावेजों की जांच कर आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को चिन्हित करेगा।

राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए नियमानुसार अलग झारखण्ड राज्य की मांग करने वाले शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों को अब सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती की जाएगी। साथ ही, पुलिस की गोली से घायल 40% तक दिव्यांग हुए आंदोलनकारियों के आश्रितों को भी इसका लाभ दिया जाएगा। आंदोलनकारी/उनके परिवार के एक सदस्य को 7000 तक का मासिक पेंशन प्राप्त होगा।

सरकार शहीद परिवार के एक सदस्य को 7000 तक का मासिक पेंशन भी देगी।  इसके अतिरिक्त पुलिस की गोली से 40% तक दिव्यांग हुए शहीद के आश्रितों को भी पेंशन दिया जाएगा। आंदोलन के दौरान कुछ आंदोलनकारियों को कई महीने तक जेल में रातें गुजारनी पड़ी थीं, ऐसे आंदोलनकारियों या उनके परिवार के किसी एक सदस्य को भी इस योजना के तहत पेंशन का लाभ दिया जाएगा।

सरकार ने यह फैसला लिया है कि लाभुकों को सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत तक का क्षैतिज आरक्षण भी दिया जाएगा। इसके तहत सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी नौकरियों में लाभुकों के लिए पात्रता के आधार पर वर्गवार सीटें भी आरक्षित की जाएंगी।

इस ऐतिहासिक योजना की घोषणा के दौरान बात करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा, “जिस सपने के साथ झारखण्ड आंदोलन में लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी, आज आखिर कोई राज्य उसे कैसे नज़रअंदाज कर सकता है। अपने आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान से अस्तित्व में आया कोई राज्य कैसे उन्हें 20 वर्षों तक भूल कर आगे बढ़ सकता है।

आज, इस माध्यम से उन्हें बाबा के सहयोगियों एवं उनके साथियों को सम्मानित करने का मौका मिला है और यह उनके लिए गौरव की बात है। यह सम्मान झारखण्ड द्वारा आंदोलनकारियों को नहीं, बल्कि झारखण्ड राज्य का सम्मान है। हम हैं क्योंकि उन्होंने हमारे कल के लिए अपने आज को हमेशा-हमेशा के लिए कुर्बान कर दिया।“

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