CM हेमन्त जी, आप भी औरों की तरह ही निकलें, मनरेगा मजदूरों को कहा कि 225 रुपये थमायेंगे और 198 रुपये देने की अब बात करने लगे

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याद करिये 25 फरवरी 2021, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने ट्विट कर क्या कहा था – “मनरेगा योजना अंतर्गत श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दर में बढ़ोत्तरी करने हेतु राज्य योजना से अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति एवं तदनुरुप बजटीय उपबंध करने की स्वीकृति मंत्रिपरिषद की बैठक में दी गई। मनरेगा की मजदूरी दर 194 से बढ़कर 225 रुपये हुई।” और सच्चाई क्या है?

झारखण्ड सरकार का ग्रामीण विकास विभाग, अपने पत्रांक संख्या 4-13 (NREGA)/2006/ग्रा. वि. (खण्ड-1) (N)503, रांची। दिनांक 31.03.2021 के माध्यम से, इसके निदेशक सह संयुक्त सचिव आदित्य रंजन ने राज्य के सभी उपायुक्तों, सभी उप-विकास आयुक्तों सह जिला कार्यक्रम समन्वयकों को सूचित किया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के पत्रांक – J-11011/1/2020-RE-III दिनांक 17.03.2021 की अधिसूचना के अनुसार, झारखण्ड राज्य के अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं में कार्यरत अकुशल श्रमिकों के लिए दैनिक मजदूरी के रुप में न्यूनतम राशि रुपये 198 मात्र निर्धारित की गई है। दैनिक मजदूरी की यह वर्द्धित दर दिनांक 01.04.2021 से प्रभावी है।

अतः अनुरोध है कि दिनांक 01.04.2021 के प्रभाव से मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत अकुशल श्रमिकों की राशि 198 रुपये मात्र प्रतिदिन की दर से मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करवाया जाय, साथ ही वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए तैयार किये गये श्रम बजट को भी मजदूरी की वर्द्धित दर पर संशोधित कर तदनुरुप कार्रवाइयां सुनिश्चित की जाय।

अब सवाल है कि मनरेगा के अंतर्गत आनेवाले अकुशल श्रमिकों को 225 रुपये देना ही नहीं था और केन्द्र सरकार के मत्थे ही छोड़ देना था, तो फिर इतना ढोल पीटने की जरुरत क्या थी? ये तो मजदूरों के आंखों में धूल झोकना ही हुआ न। आखिर कैबिनेट में मनरेगा के मजदूरों के लिए निर्धारित राशि 194 रुपये को बढ़ाकर 225 रुपये करने की जरुरत ही क्या थी? किसने ये सलाह दिया और किसके सलाह पर ऐसी बातें कहकर मनरेगा के श्रमिकों के साथ छल किया गया।

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