झारखण्ड में बच्चियों और नाबालिगों पर दुष्कर्मियों की बुरी नजर, CM का इकबाल समाप्त

25 अप्रैल को दुष्कर्म मामले में आसाराम को उम्र कैद की सजा मिली। उस आसाराम को जिसके आगे करोड़ों लोग सर झूकाते थे, जिनके आगे-पीछे बड़े-बड़े पॉलिटिशयन तक किया करते थे, उनकी स्तुति गाया करते थे, उसे सजा मिली, उम्र कैद की सजा मिली, आज वह जेल में बंद हैं, हमने सोचा था कि इस आसाराम को मिली सजा के बाद, दुष्कर्मियों को थोड़ी सद्बुद्धि आयेगी, वे सुधरेंगे, पर हमें नहीं लगता,

25 अप्रैल को दुष्कर्म मामले में आसाराम को उम्र कैद की सजा मिली। उस आसाराम को जिसके आगे करोड़ों लोग सर झूकाते थे, जिनके आगे-पीछे बड़े-बड़े पॉलिटिशयन तक किया करते थे, उनकी स्तुति गाया करते थे, उसे सजा मिली, उम्र कैद की सजा मिली, आज वह जेल में बंद हैं, हमने सोचा था कि इस आसाराम को मिली सजा के बाद, दुष्कर्मियों को थोड़ी सद्बुद्धि आयेगी, वे सुधरेंगे, पर हमें नहीं लगता, कि दुष्कर्मियों के उपर, गंदी सोच रखनेवाले लोगों के उपर इसका कोई असर भी पड़ा हो।

झारखण्ड में तो हद हो गई है, नाबालिग लड़कियों और छोटे-छोटे बच्चों पर तो जैसे शामत आ गई है, दुष्कर्मियों का दल इन बच्चियों और बच्चों को अपना निशाना बना रहा हैं और स्थानीय प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है, कुल मिलाकर देखा जाये तो यहां शासन का इकबाल ही समाप्त हो गया है, जिस राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा चलाये जा रहे मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत महिला संवादकर्मियों को न्याय नहीं मिल पाता हो, वहां ऐसे लोगों का बोलबाला होना स्वाभाविक है।

हद तो तब हो गई कि इस दुष्कर्म को लेकर, वे लोग मीडिया में चर्चा कर रहे हैं, जो ऐसे लोगों को बचाने में ज्यादा समय देते है और इसके लिए पुलिस से लेकर आरोप लगानेवाले लोगों तक को मैनेज करने में लगे होते हैं। ये लोग इस प्रकार से स्वयं को जनता के समक्ष प्रस्तुत कर रहे होते है कि जैसे लगता हो कि दुनिया के सबसे बड़े संत यहीं है, इन्होंने जिंदगी में कभी कोई पापकर्म ही नहीं किया, पर वो कहा जाता है कि जब तक पकड़े नहीं गये, तब तक स्वयं को संत तो कह ही सकते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि ज्यादातर लोग इनके खिलाफ इसलिए बोलने से बचते है कि वे नहीं चाहते कि उनके इज्जत का फलूदा बन जाये।

वर्तमान में झारखण्ड की स्थिति देखिये, आज झारखण्ड दिन-प्रतिदिन राज्य के विभिन्न शहरों में हो रहे दुष्कर्म को लेकर चर्चा में हैं। जरा देखिये – झारखण्ड के दस दिनों का हाल –   

  • 25 अप्रैल को कुचाई थानांतर्गत गालूडीह गांव में एक अनाथ नाबालिग लड़की से उसके मुंहबोले चाचा ने दुष्कर्म किया। घटना के बाद से आरोपी फरार है।
  • 27 अप्रैल को सोशल साइट के माध्यम से पता चला कि डेली मार्केट स्थित प्ले स्कूल में पढ़नेवाले बच्चे के साथ स्कूल वैन का चालक ही अप्राकृतिक यौनाचार किया करता था, जिसे जेल भेज दिया गया।
  • 28 अप्रैल को समाचार मिला कि तुपुदाना ओपी क्षेत्र निवासी एक नाबालिग छात्रा ने अपने ही पिता के खिलाफ महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई कि उसका पिता उसके साथ दुष्कर्म किया करता था, और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दिया करता था। जबकि इसी दिन सुखदेव नगर थाना क्षेत्र निवासी 14 वर्षीया नाबालिग की शिकायत पर छेड़खानी का मामला उसके सौतेले बाप पर दर्ज किया गया।
  • 28 अप्रैल को ही रांची के कांके थाना क्षेत्र के मुरुम गांव में नाबालिग के साथ पांच युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया, इस सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों विक्रम मुंडा, रोहित उरांव, और एक नाबालिग को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
  • 28 अप्रैल(3 मई को खबर प्रकाशित हुई) को ही सिसई थाना के कुलंकेरी गांव की छात्रा के साथ त्रिलोकी उरांव ने तीन दिनों तक बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने 28 अप्रैल को ही उस छात्रा का अपहरण कर लिया था।
  • 29 अप्रैल को धनबाद के मुनीडीह ओपी क्षेत्र की जदुडीह कालोनी में एक पांच साल की दलित बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई, लोग बताते है कि बच्ची को एक शादी समारोह में खाना खिलाने के बहाने ले जाया गया था, पुलिस ने इस घटना के आरोपी डबलू मोदी को गिरफ्तार कर लिया है।
  • 29 अप्रैल को ही वेस्ट बोकारो ओपी क्षेत्र अंतर्गत भदवा गांव की मूक बधिर दिव्यांग युवती के साथ उसके चचेरे भाई ने दुष्कर्म किया।
  • 3 मई को खबर प्रकाशित हुई की गिरिडीह में पांच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। मामला मुफ्फस्सिल थाना इलाके के पालमो पंचायत के एक गांव की है।
  • 3 मई को मेदिनीनगर सदर थाना के एक गांव में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया है, आरोप यह है कि शादी में ननिहाल आयी नाबालिग के साथ उसके रिश्तेदार ने ही बलात्कार किया।
  • 4 मई को चतरा के इटखोरी के केंदुआ गांव में आठवीं की छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद, उस लड़की को घर में घुसकर जिंदा जला दिया गया। घटना को अंजाम देनेवाले सभी फरार है। इस घटना के छींटे पुलिसकर्मियों पर भी पड़े हैं। उन पर आरोप है कि दुष्कर्म की जानकारी होने के बाद भी पुलिस ने आरोपियों पर शिंकजा नहीं कसा, उलटे पंचायत को ये मामला सुलझाने को कह दिया, जैसा कि मुखिया ने आरोप लगाया है। हद तो तब हो गई, दुष्कर्म के आरोपी को पचास हजार रुपये जुर्माना का दंड लगाकर छोड़ दिया गया था।
  • 5 मई को पाकुड़ के मुफ्फस्सिल थाना के कांकोड़बोना गांव में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद उसे जिंदा जिलाने का प्रयास किया गया। नाबालिग लड़की अपने मामा के यहां रहती थी, घटना के दिन वह घर में अकेली थी।
  • 5 मई को ही गढ़वा थाना के ओबरा गांव में सोयी एक आदिवासी बालिका के साथ गांव के ही दो युवकों ने पिस्तौल दिखाकर सामूहिक दुष्कर्म किया, इसके बाद उसकी शादी के लिए रखे जेवर और रुपये भी लूटकर चलते बने।

ये तो समाचार ऐसे है कि जो प्रकाश में आये, जरा कल्पना करिये, जो समाचार प्रकाश में नहीं आ रहे हैं, अगर उन्हें भी इसमें समाहित कर लिया जाये तो झारखण्ड की स्थिति क्या होगी? सच्चाई यह है कि पूरे राज्य में मुख्यमंत्री रघुवर दास के शासन ने आम जनता को दुखी कर रखा है। कोई भी बच्ची या छात्राएं या बच्चें सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस प्रशासन से लोगों का विश्वास उठ खड़ा हुआ हैं। कुछ-कुछ पुलिसकर्मी ऐसे हैं, जिनकी सेवा और कार्यों पर अंगूली नहीं उठाई जा सकती, फिर भी अधिकतर नाकारा लोगों के कारण, इनकी भी सेवा और कार्य प्रभावित होती जा रही है।

वर्तमान में झारखण्ड में जो लोग रह रहे हैं, या जिनके घर में छोटे-छोटे बच्चे या बच्चियां है, वे स्वयं अपने बच्चों पर ध्यान दें, किसी पर विश्वास नहीं करें, क्योंकि जहां विश्वास होता है, वहीं विश्वासघात होता है, अपने बच्चों को कभी किसी के पास अकेले नहीं छोड़े, हमेशा ये सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे आपकी देख-रेख में हैं। खासकर स्कूल आने-जाने में आपके बच्चे के साथ कौन-कौन रह रहा है, उसकी पूरी चारित्रिक गुणों और हाव-भाव पर ध्यान दें। दूसरों पर भरोसा रखने से ज्यादा अच्छा है, अपने पर भरोसा रखें, अपने बच्चों को हिदायत दें कि अगर कोई उनके साथ अशोभनीय या गलत व्यवहार करता है, वे तुरंत आपको बतायें।

बच्चों में आत्मविश्वास और किसी भी गलत कार्य का प्रतिकार करने का साहस भरें, तथा बच्चों को शारीरिक और मानसिक रुप से मजबूत करें। अच्छे साहित्य पढ़ने को दें। इंटरनेट युक्त मोबाइल से बच्चों को दूर रखें। नेताओं, पत्रकारों तथा स्वयं को बुद्धिजीवी बतानेवाले ज्यादा गप्पियों से अपने बच्चों को दूर रखें, क्योंकि ये आपके बच्चों की मानसिक स्थिति को बिगाड़ने में ज्यादा सहायक हो रहे हैं, बच्चों को पहले से बता दें कि ये नेता, ये पत्रकार दरअसल अपने परिवार को चलाने के लिए नाटक कर रहे होते है, सहीं में ये आदमी ही नहीं होते, इनका काम जनता को उल्लू बनाना तथा अपना काम बनाना होता है।

राज्य सरकार पर भी भरोसा नहीं करें, क्योंकि ये कुछ नहीं करेंगे, घटना घट जाने के बाद घडियाली आंसू बहायेंगे और दुष्कर्म की स्थिति देखकर, ये आपको राहत पहुंचाने की बात करेंगे, इसलिए ऐसा नौबत न आये, इसके लिए अभी से ही खुद को तथा अपने बच्चों को मजबूत करें, क्योंकि बच्चे राष्ट्र की संपत्ति हैं, धरोहर हैं, इनकी सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी हैं। याद रखें, बच्चों के साथ, नाबालिगों के साथ गलत करनेवाले कोई दूर से नहीं आते, ये आपके ही आस-पास भटक रहे हैं, इन पशुओं को पहचानिये और उनसे मुकाबला कीजिये।

Krishna Bihari Mishra

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