बकरीद मनाइये पर सावधानी से, क्योंकि आप पर नजर हैं रघुवर सरकार की

पिछले कई दिनों से एक विज्ञापन की बाढ़ आई हुई है, और ये विज्ञापन जैसे-जैसे बकरीद का दिन निकट आता जा रहा है, वैसे-वैसे इस विज्ञापन की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है, ये विज्ञापन गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग एवं कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा निकाली जा रही हैं, ऐसा विज्ञापन हर साल निकलता है, पर इसका असर उतना दिखता नहीं है,

पिछले कई दिनों से एक विज्ञापन की बाढ़ आई हुई है, और ये विज्ञापन जैसे-जैसे बकरीद का दिन निकट आता जा रहा है, वैसे-वैसे इस विज्ञापन की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है, ये विज्ञापन गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग एवं कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा निकाली जा रही हैं, ऐसा विज्ञापन हर साल निकलता है, पर इसका असर उतना दिखता नहीं है, पर इस साल कुछ इसका असर ऐसा है कि एक समुदाय में इस विज्ञापन का दहशत साफ दिखाई दे रहा है।

आखिर विज्ञापन में क्या है? विज्ञापन में लिखा है, कि ‘सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि गौवंशीय पशु (गाय, बाछा, बछिया, सांड या बैल), ऊंट आदि को काटना एवं कुर्बानी देना या इस हेतु खरीदना, बेचना, परिवहन करना, संग्रह करना आदि संज्ञेय अपराध है। अपराधी को झारखण्ड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (IPC), पशु कूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSSA Act) केन्द्रीय व राज्यों द्वारा गठित विभिन्न अधिनियमों के प्रावधानों में गिरफ्तार किया जा सकता है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं विभिन्न राज्यों के माननीय उच्च न्यायालयों द्वारा भी इससे संबंधित कई मामलों में त्वरित कार्रवाई करने का न्यायादेश पारित किया गया है। सभी से  निवेदन है कि इस तरह के अपराध संज्ञान में आने पर तुरन्त इसकी सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन या 100 नं. पर डायल कर दें। सूचना देनेवाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जायेगा।‘

हालांकि राज्य सरकार खूब लंबे-चौड़े विज्ञापन निकाल रही हैं, पर उसे भी पता है कि इस विज्ञापन का क्या हश्र होगा? सरकार से जुड़े लोग और उनके समर्थक भी खूब इस विज्ञापन को सोशल साइट पर डालकर, मुख्यमंत्री रघुवर दास को गोभक्त बताने में जूटे है, राजनीतिक माइलेज दिलाने में जुटे हैं, पर सच्चाई यह भी है कि पूरे राज्य में गोहत्या पर रोक के कानून लगे हैं और उसके बावजूद रांची के ही कई इलाकों में गोकशी आज भी जारी है। सुबह, दोपहर, शाम या रात को रांची के ही विभिन्न सड़कों पर बड़ी संख्या में गोवंशीय पशुओं को गोकशी के लिए ले जाते हुए, देखा जा सकता है, पर सरकार का ध्यान इस ओर नहीं जाता, पर बकरीद आ गई, तो देखिये इनकी छटपटाहट, कैसे दिखाई दे रही हैं?

यहीं नहीं, राज्य का बच्चा-बच्चा जानता है कि इस गोरखधंधे में राज्य के कई पुलिस थानों में कार्यरत पुलिसकर्मी भी अप्रत्यक्ष रुप से इसमें दिलचस्पी लेते हैं तथा इस अवैध धंधे को रोक लगाने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं, ऐसा वे क्यों करते हैं, आप स्वयं विचार करिये, पता चल जायेगा। आज ही एक अखबार ने ‘फर्जी एसपीसीए में रिश्तेदारों की जमात, करवा रहे गोवंश की तस्करी, रांची से धनबाद, गिरिडीह, और गोड्डा तक फैला है गोवंश तस्करों का जाल, फर्जी इस्पेक्टर-दारोगा बन कर रहे मनमानी’ के नाम से समाचार छापा हैं, जिसमें साफ उद्धृत है कि इस धंधे में कौन-कौन लोग लिप्त हैं?

आपको जानकार यह आश्चर्य होगा कि इसमें सभी वे लोग है, जो आपसे में रिश्तेदार हैं, जिस पर आप कभी विश्वास ही नहीं कर सकते है कि यह समुदाय ऐसा कर भी सकता है, अब ऐसे में आप स्वयं सोचिये कि गोकशी को बढ़ावा देने में कौन लोग जिम्मेदार है? अब जब सब कुछ सामने स्पष्ट हैं, ऐसे में किसी एक समुदाय को कटघरे में खड़ा करना क्या ठीक होगा? इसलिए सभी से अनुरोध है कि बकरीद ऐसे मनाएं, ताकि किसी को सांप्रदायिक तनाव कराने/भड़काने का मौका ही नहीं मिले, क्योंकि देश में शांति स्थापित हो, यह वर्तमान समय की बहुत बड़ी मांग है।

Krishna Bihari Mishra

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