“अरे आदिवासी हैं न, आदिवासी ही रहेगा” इस सोच से उपर उठे भाजपा, करिया मुंडा जैसे नेता को नजरदांज करना पड़ेगा महंगा
आप से ही मैं पूछता हूं, आप हृदय पर हाथ रखकर बताइये कि क्या किसी भी राष्ट्रीय पार्टी ने आदिवासी नेताओं को वो सम्मान दिया, जो वह उस सम्मान का हकदार है? किसी भी आदिवासी नेता को आगे बढ़ाया? सच पूछिये तो राष्ट्रीय पार्टियों की नजरों में सिर्फ यहीं चलता रहता हैं “अरे आदिवासी हैं न, आदिवासी ही रहेगा” ये वक्तव्य है झारखण्ड भाजपा के भीष्म पितामह करिया मुंडा के, जिनकी विद्वता, राजनीतिक शुचिता, शालीनता एवं नैतिकता पर कोई सवाल ही नहीं उठा सकता।
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