एक सप्ताह से कई पत्रकारों के घर किलकारियां गूंजनी बंद हो रही थी और रांची प्रेस क्लब के अधिकारी कान में तेल डालकर सोए हुए थे
रांची में एक पत्रकार के साथ कल बहुत ही शर्मनाक घटना घटी है। ऐसी शर्मनाक घटना, जिसकी जितनी निन्दा की जाय कम है। इस घटना ने पत्रकारों के समूह को लेकर बनी विभिन्न संस्थाओं तक पर कालिख पोत दी है, लेकिन हम पत्रकार ऐसे हैं कि सच्चाई को जानकर भी, इस पूरी घटना के लिए व्यवस्था को दोषी ठहराकर स्वयं को बच जाने का असफल प्रयास कर रहे हैं, तो पहला सवाल यही है कि क्या हम व्यवस्था के अंग नहीं है, या हम कोई अपने लिए अलग से खुद के लिए दुनिया बना ली है।
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