सावधान पारा टीचरोंः अहंकार में चूर CM आपको होटवार जेल भेजकर आपका बुखार छुड़वायेंगे

आज देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों में स्वयं को एकमात्र सर्वश्रेष्ठ माननेवाले झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास पलामू में थे। मुख्यमंत्री रघुवर दास, जैसा कि उनका स्वभाव है, अपने स्वभावानुसार, पूरे अहं में चूर होकर, उन्होंने आज पलामू में भाषण दिया। अहंकार में चूर मुख्यमंत्री रघुवर दास को भाषण देने के दौरान, ये भी पता नहीं चला कि वे एक लोकतंत्रात्मक सत्ता के अंतर्गत किसी राज्य के मुख्यमंत्री है,

आज देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों में स्वयं को एकमात्र सर्वश्रेष्ठ माननेवाले झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास पलामू में थे। मुख्यमंत्री रघुवर दास, जैसा कि उनका स्वभाव है, अपने स्वभावानुसार, पूरे अहं में चूर होकर, उन्होंने आज पलामू में भाषण दिया। अहंकार में चूर मुख्यमंत्री रघुवर दास को भाषण देने के दौरान, ये भी पता नहीं चला कि वे एक लोकतंत्रात्मक सत्ता के अंतर्गत किसी राज्य के मुख्यमंत्री है, न कि राजशाही के अंतर्गत इस राज्य के राजा कि वो जो बोल देंगे, वो सही हो जायेगा और लोगों को उनकी बात न चाहकर माननी ही पड़ेंगी।

इस राज्य में ये कोई पहली बार धरना-प्रदर्शन नहीं हो रहा, लोकतंत्र में इस प्रकार के धरने-प्रदर्शन चलते रहते हैं, जो सरकारे सत्ता में होती हैं, वह आंदोलनकारियों से बातचीत कर धरना-प्रदर्शन समाप्त कराने की योजना बनाती है, क्योंकि वह जानती है कि वह जिस राज्य का मुख्यमंत्री है, वहां राजशाही नहीं चल रहा, बल्कि लोकतंत्र के कारण, उसे उस राज्य की जनता का सेवा करने का अधिकार मिला है।

जरा देखिये मुख्यमंत्री रघुवर दास की भाषा, और स्वयं सोचिये कि क्या ये मुख्यमंत्री की भाषा है, या इस प्रकार की भाषा से समस्या का समाधान होगा, क्या ऐसा व्यक्ति जिसकी जुबान में मिठास दिखती नहीं, वह राजशाही की तरह स्वयं को जनता के समक्ष प्रस्तुत करता है, वह क्या झारखण्ड जैसे राज्य का प्रतिनिधित्व करने लायक है, सबसे पहले झारखण्ड के मुख्यमंत्री का भाषण पढ़िये

‘ये पूरा पारा टीचर, पारा टीचर न होकर किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता हो गया, इसलिए मैं चेतावनी दे देना चाहता हूं सरकार जनता की गाढ़ी कमाई पत्थरबाज शिक्षक का वेतन बढाने का काम नहीं करेगी। गुंडागर्दी करके, लोकतंत्र को चुनौती देकर, इस राष्ट्रीय पर्व को कलंकित करके, इस सरकार को, रघुवर दास को कोई झूका नहीं सकता, गुंडागर्दी करोगे, होटवार जेल जाओगे, इतना दफा लगेगा न कि बेल भरे में बुखार बढ़ जायेगा।’

अब जरा इस भाषण को पढ़ने के बाद, जरा सोचिये वह पारा टीचर को क्या कह रहा है? वह पारा टीचर को राजनीतिक दल का कार्यकर्ता बता रहा है। वह उन्हें पत्थरबाज कह रहा है, जैसे कि वे कश्मीरी हो और स्वयं को भारत से अलग होने की बात कर रहे हो। वह जनता की गाढ़ी कमाई की बात कर रहा है, वो व्यक्ति जो हाथी को उड़ाने में जनता की करोड़ों की गाढ़ी कमाई केवल हवा में उडा देता है, और उसके बावजूद कहीं निवेश के कोई चिह्न नहीं दिखाई देते।

वह बोलता है कि रघुवर दास को कोई झूका नहीं सकता, यानी इतना घमंड, कि उसे लगता है कि वह लोकतंत्र में नहीं बल्कि राजतंत्र के झंडे तले झारखण्ड में शासन करने के लिए पैदा हुआ है। वह खुद के लिए विधानसभा में भारी-भरकम वेतन तथा अपने खानदान के लिए फैमिली पेंशन तक की व्यवस्था, जनता की गाढ़ी कमाई से करता है, पर पारा टीचरों को दूध की एक ड्राप देकर, संतुष्ट करना चाहता है तथा इसके साथ ये भी फरमान जारी करता है कि उसने इन गरीब पारा टीचरों के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था कर दी है। वह पारा टीचर के संघर्ष को गुंडागर्दी करार देता है, तथा इन पारा टीचरों को होटवार जेल भेजने तथा उन्हें बेल भरने में बुखार बढ़ा देने की भी बात करता है, क्या ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बनने के लायक है।

कमाल है, मोदी के इशारे पर वोट देने का फायदा बेचारे पारा टीचर भुगत रहे हैं, भुगत तो यहां की जनता भी रही है, वह तो अपने आप को कोस रही है कि कहां से ऐसा व्यक्ति को उन्होंने अपने माथे पर बिठा लिया, जो स्वयं को गरीब और मजदूर का बेटा बताता है और गरीब पारा टीचरों को मार-पीट कर अधमरा बना देता है और जो पत्रकार उसके अन्याय की खबर को दिखाने के लिए उक्त दृश्य को कैमरे में कैद करता है, उसे भी मारकर अधमरा करा देता है, और बाद में इन पत्रकारों-छायाकारों के मालिकों-संपादकों को मुंह मांगा प्रलोभन देकर मुंह बंद करा देता है, और फिर इन अखबारों-चैनलों में पारा टीचरों और पत्रकारों की पिटाई का मुद्दा गौण हो जाता है तथा सीएम रघुवर के जय-जयकार की खबर हिट हो जाती है।

जबकि इसके विपरीत राष्ट्रीय चैनल में, ठीक इस घटना के दूसरे दिन एनडीटीवी इस खबर को प्रमुखता से प्रसारित कर देता है, कमाल है, जिसकी सरकार में लोग स्वयं प्रशासनिक गुंडागर्दी के शिकार हो रहे हैं, वह धमकी दे रहा है, वह भी डंके की चोट पर कि वह झुकनेवाला नहीं है, अरे आप झुकोगे कैसे, क्योंकि झुकता तो वह हैं, जिसके सीने में दिल होता है, क्रूरता को धारण करनेवाला, भला कभी झूका है।

हद तो तब हो गई, इस मुख्यमंत्री ने झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस को राष्ट्रीय पर्व बता दिया, अब तक तो हम जानते थे कि गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और महात्मा गांधी का जन्म दिवस ही राष्ट्रीय पर्व है, ये झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस कब से राष्ट्रीय पर्व घोषित हो गया, क्या इस राज्य के होनहार विद्वान मुख्यमंत्री रघुवर दास बता सकते है कि भारत के किस प्रधानमंत्री अथवा राष्ट्रपति ने कब और कहां झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस को राष्ट्रीय पर्व घोषित कर दिया।

Krishna Bihari Mishra

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