बादल पत्रलेख के BJP ज्वाइन करने की खबर से भूकम्प, मिशन मोदी के प्रदेश अध्यक्ष छोड़ेंगे भाजपा

सूत्र बताते है कि जरमुंडी के कांग्रेस विधायक बादल पत्रलेख पाला बदलने को मचल उठे हैं, वे चाहते है कि इस बार वे भाजपा के टिकट से जरमुंडी विधानसभा से अपना किस्मत आजमाएं, हालांकि उनकी दिली ख्वाहिश गोड्डा संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की है, उन्हें लगता है कि आनेवाले समय में गोड्डा से वर्तमान भाजपा सांसद निशिकांत दूबे को भागलपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़वाया जा सकता है,

सूत्र बताते है कि जरमुंडी के कांग्रेस विधायक बादल पत्रलेख पाला बदलने को मचल उठे हैं, वे चाहते है कि इस बार वे भाजपा के टिकट से जरमुंडी विधानसभा से अपना किस्मत आजमाएं, हालांकि उनकी दिली ख्वाहिश गोड्डा संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की है, उन्हें लगता है कि आनेवाले समय में गोड्डा से वर्तमान भाजपा सांसद निशिकांत दूबे को भागलपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़वाया जा सकता है, ऐसे में वे गोड्डा से भाजपा के टिकट पर संसदीय चुनाव लडऩे की भी इच्छा रखते हैं, हालांकि यहीं इच्छा मधुपुर के भाजपा विधायक राज पलिवार की भी है।

इधर जरमुंडी विधानसभा से भाजपा के टिकट के लिए प्रबल दावेदारों की लंबी सूची है, जिसमें मिशन मोदी के प्रदेश अध्यक्ष अनुरंजन अशोक, रीता चौरसिया, सीताराम पाठक, संजयानन्द झा व दो बार विधायक रह चुके देवेन्द्र कुंअर भी रेस में हैं, पर बादल पत्रलेख के पाला बदलने के समाचार से सभी मायूस हो चले हैं, सूत्र तो बताते है कि बादल पत्रलेख के भाजपा में आने के बाद इन सभी का भाजपा से टिकट मिलना असंभव है, ऐसे में भाजपा में भगदड़ मचेगी और फिर इसे रोक पाना भाजपा के लिए असंभव होगा।

सूत्र ये भी बताते है कि ऐसे में मिशन मोदी के प्रदेश अध्यक्ष अनुरंजन अशोक पर अन्य पार्टियों की भी नजर है, अनुरंजन अशोक को अन्य दलों से टिकट मिलने में कोई असुविधा भी नहीं होगी, क्योंकि उनके भी बड़े दलों के नेताओं से मधुर संबंध है, बादल पत्रलेख के भाजपा में जाते ही, इनका पाला बदलना उतना ही संभव हैं। सूत्रों का कहना है कि ऐसे समय में, जबकि संथाल परगना में भाजपा विरोधी लहर तेज है, ऐसे में अनुरंजन अशोक किसी अन्य दल से जब खड़ा होंगे तो भाजपा  को उन्हें हरा पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन होगा।

सूत्र बताते है कि संथाल परगना में इस बार संसदीय चुनाव हो या विधानसभा का चुनाव, भाजपा का जीत पाना उतना ही मुश्किल है, जितना गंगा की धारा को हावड़ा से फिर गंगोत्री की ओर मोड़ देना। सूत्र बताते है कि गोड्डा संसदीय चुनाव में तो तय है कि कांग्रेस के प्रत्याशी फुरकान अंसारी होंगे तथा झाविमो से प्रदीप यादव होंगे, अगर दोनों पार्टी में गठबंधन होता है तो जिस भी पार्टी को सीट मिलेगा, वो पार्टी अपना प्रत्याशी खड़ा करेगा और अगर दोस्ताना फाइट हो गई, तब भी फुरकान अंसारी को हरा पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन होगा।

संथाल परगना में यह भी सुनने को मिल रहा है कि मिशन मोदी के प्रदेश अध्यक्ष अनुरंजन अशोक की राज्य के भाजपा नेताओं से भले ही नहीं पटे, पर केन्द्र के नेताओं से उनकी अच्छी पटती है, ऐसे में हो सकता है कि गोड्डा संसदीय सीट पर अनुरंजन अशोक, राज पलिवार तथा वर्तमान सांसद निशिकांत दूबे पर चर्चा हो, पर टिकट किसे मिलेगा, कहा नहीं जा सकता, पर वर्तमान में सांसद निशिकांत दूबे का पलड़ा भारी दिखता है, अगर उन्हें भागलपुर से टिकट दे दिया गया तो स्थितियां बदल सकती है।

हालांकि इस इलाके के लोग, अब स्वीकार करने लगे हैं कि चाहे अब जो भी हो, इस बार भाजपा का संसदीय सीट निकाल पाना या इस इलाके की विधानसभा की सीट निकाल पाना, उतना आसान नहीं है, ऐसे में बादल पत्रलेख का भाजपा में जाना, इस बात का संकेत है कि बादल पत्रलेख ने अपनी हार स्वीकार कर ली, और जो भाजपा छोड़कर अन्य दलों को रास्ता पकडेंगे, सच्चाई यह भी है कि उनकी जीत उतनी ही आसान हैं, इसलिए बादल पत्रलेख के भाजपा में जाने का यहां शोर चरम पर है, ऐसे में मिशन मोदी के प्रदेश अध्यक्ष अनुरंजन अशोक कब पार्टी छोड़कर दूसरे दल में शामिल होने के लिए अपना झंडा बुलंद करते हैं, फिलहाल सभी का ध्यान उसी ओर है।

Krishna Bihari Mishra

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