बंधु तिर्की के एक गलत बयान ने झारखण्ड में भाजपा को मजबूत और झाविमो को बर्बाद कर डाला

जब राजनेताओं का विवेक मर जाता हैं, तो वहीं होता है, जो अभी देखने को मिल रहा हैं, कल तक भाजपा को उखाड़ फेंकने की बात करनेवाले झारखण्ड विकास मोर्चा के नेता, आज स्वयं और अपनी पार्टी को बचाने के लिए एड़ी-चोटी एक किये हुए हैं, उनका एक बयान उन्हीं की पार्टी के लिए भारी पड़ गया हैं। उन्हें लगता था कि उनका ये बयान उनकी पार्टी को नई दिशा दे देगा, पर हो गया ठीक उलटा, उनका सिर्फ एक बयान भाजपा को मजबूती दे गया।

जब राजनेताओं का विवेक मर जाता हैं, तो वहीं होता है, जो अभी देखने को मिल रहा हैं, कल तक भाजपा को उखाड़ फेंकने की बात करनेवाले झारखण्ड विकास मोर्चा के नेता, आज स्वयं और अपनी पार्टी को बचाने के लिए एड़ी-चोटी एक किये हुए हैं, उनका एक बयान उन्हीं की पार्टी के लिए भारी पड़ गया हैं। उन्हें लगता था कि उनका ये बयान उनकी पार्टी को नई दिशा दे देगा, पर हो गया ठीक उलटा, उनका सिर्फ एक बयान भाजपा को मजबूती दे गया।

आजकल जिसे देखो ले-देकर गाय पर पील गया हैं, एक ओर गाय को बचानेवाले लोग हैं तो दूसरी ओर उसे फूड समझकर, उसकी हत्या करनेवालों का समूह। जो गाय को सिर्फ फूड समझकर हत्या करने पर विश्वास रखता है, उसके लिए गाय जानवर से ज्यादा कुछ भी नहीं पर जो लोग भारत की अस्मिता और उसकी सांस्कृतिक विविधताओं तथा भारतीय कृषि के सिद्धांत को जानते हैं, उन्हें पता है कि भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानव जाति के लिए गाय कितना उपयोगी है, और उसे क्यों मां का दर्जा प्राप्त हैं।

जब भी गाय की बात आती है, तो कांग्रेस समेत कई वामपंथी पार्टिंयां, भाजपा और संघ को इसमें लपेट लेती है, जबकि सच्चाई यह है कि गाय के बिना इनका भी मन नहीं भरता, जरा देखिये इनकी हरकतों को, कि वे गाय के नाम पर कैसी राजनीति करते हैं? हाल ही में आपको पता होगा कि केरल में कांग्रेस के ही लोगों ने एक गाय के बछड़े की सड़क पर निर्मम हत्या कर दी, तब पूरे देश ने इस कुकृत्य के लिए कांग्रेस पर थूका, ऐसे में बंधु तिर्की को ये कैसे विश्वास हो गया कि उनके इस कुकृत्य पर आम जनता चुप-चाप बैठ जायेगी, जो गाय में अपनी सांस्कृतिक विरासत को देखती है।

प्रेस कांफ्रेस में बंधु तिर्की किसको चुनौती दे रहे थे, भारत की उस जनता को जो गाय से प्यार करती हैं, जो गाय को पूजती है, या सरकार को। अरे कौन नहीं जानता कि झारखण्ड में गोहत्या पर प्रतिबंध के बावजूद प्रतिदिन पूरे राज्य में गोह्त्या हो रही हैं, रांची की सड़कों पर तो रोज सुबह-शाम भूखे प्यासे गोवंशीय पशु आपको दीख जायेंगे, जो विभिन्न जगहों से रांची के कत्लखानों तक पहुंचाये जाते हैं।

किस थाने को नहीं पता कि उसके इलाके में कितने कत्लगाह है? जहां गायें आज भी पहुंचाई जा रही है, और उसकी चीत्कार से गाय को सम्मान देनेवालों की नींद उड़ रही हैं, ऐसे में इस प्रकार के बयान को देकर बंधु तिर्की ने सामाजिक वैमनस्यता फैलाने की कोशिश नहीं की। कौन नहीं जानता कि बंधु तिर्की ईसाई हैं, और मिशनरियों के इशारे पर वे सारे काम वह करते है, जिससे उन्हें या मिशनरियो को फायदा होता है। अभी हाल ही में भाजपा हटाओ झारखण्ड बचाओ की रैली उन्होंने की थी, जिसमें लगा था कि वे अपने मकसद में काम हो जायेंगे, भाजपा को उखाड़ फेंकेंगे, पर जरा वे खुद सोचे कि कल के बयान ने भाजपा को कितना फायदा पहुंचाया, तभी तो भाजपा ने उनके इस बयान को जल्दी से लपका और उन्हीं की शैली में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक समीर उरांव ने भी बयान दे डाला।

हम झारखण्ड की जनता से कहेंगे कि वे राजनीतिज्ञों के इस विषैले व कटुता भरे भाषण के चक्कर में न पड़कर, आपसी एकता व सद्भाव के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें, ताकि इनकी घटियास्तर की सोच से झारखण्ड पर कोई कुप्रभाव नहीं पड़ें,  क्योंकि एक गलत कदम, झारखण्ड को झुलसा देगा, जिससे हम सभी प्रभावित होंगे, अंततः नुकसान झारखण्ड को ही होगा।

Krishna Bihari Mishra

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