राजनीति

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के अत्याचार से प्रभावित भाजपाइयों ने झारखण्ड में लिया आश्रय

बंगाल में भाजपाइयों पर हमले अब सामान्य बात हो गई है, वहां भाजपाइयों के खिलाफ सुनियोजित ढंग से हमले किये जा रहे है, उन्हें मौत के घाट उतारा जा रहा है, और ये सारे काम तृणमूल कांग्रेस के लोग कर रहे हैं, और इनका साथ स्थानीय बंगाल पुलिस दे रही है, यहीं कारण है कि जान बचाने के लिए फिलहाल हम सभी झारखण्ड के शहरों में अपना ठिकाना ढूंढ रहे है। ये संवाद है, तृणमूल कांग्रेस के लोगों द्वारा की जा रही गुंडागर्दी और विभिन्न प्रकार के अत्याचारों से प्रभावित उन परिवारों के सदस्यों को जो फिलहाल झारखण्ड के विभिन्न शहरों में आकर आश्रय लिये हुए हैं।

आश्चर्य इस बात की भी है कि इतनी बड़ी त्रासदी की जानकारी स्वयं भाजपा के शासनवाली राज्य झारखण्ड के नेताओं व अधिकारियों को नहीं हैं और न वे इस घटना की नोटिस ले रहे हैं। इधर इस घटना को देखते हुए कई संगठनों ने आशंका व्यक्त की हैं कि कहीं इसके प्रतिक्रियास्वरुप अन्य राज्यों में भी ऐसी स्थिति देखने को न मिल जाये। फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के अत्याचार से प्रभावित लोगों का दल झारखण्ड के साहेबगंज-पाकुड़, बुंडू, तमाड़ आदि स्थानों में शरण लिये हुए है और वे एक जगह से दूसरे जगह भागते फिर रहे हैं, इनके दल में महिलाओं की भी संख्या अधिक है, जो बहुत ही डरी और सहमी हुई है।

पंचायत प्रतिनिधि सुषेण महतो कहते है कि राज्य सरकार के इशारे पर शासन-प्रशासन गुंडई कर रहा है, इस कारण हमलोग यहां भाग आये है, नहीं तो उन सब की जान चली जायेगी। सूत्र बताते हैं कि फिलहाल हजारों की संख्या में ये पंचायत प्रतिनिधि अपने परिवार के साथ इधर से उधर भटक रहे हैं, लोग बता रहे है कि चूंकि अगस्त में मुखिया और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव है, ये विजयी पंचायत प्रतिनिधि ही मुखिया और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव करेंगे, ऐसे में भाजपा के टिकट पर चुने गये पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव ज्यादा है, यहीं कारण है कि भाजपा के विजयी पंचायत प्रतिनिधियो को अपने पाले में लाने के लिए ये तृणमूल कांग्रेस के लोग अत्याचार करने में लगे हैं।

परातसेल गांव के पंचायत प्रतिनिधि उत्तम घोष की माने तो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने एक सप्ताह पहले ही कहा था कि पुरुलिया को विरोधी शून्य कर देना है। उसने अपने लोगों से कहा कि भाजपा के टिकट पर चुने गये जनप्रतिनिधियों को पैसे देकर खरीदो, अगर पैसे से नहीं माने तो उनलोगों को मारपीट कर समझाओ, उस पर भी नहीं माने तो जेल भिजवा दो या खत्म कर दो, इसी बीच एक जून को अभिषेक बनर्जी का पुरुलिया दौरा था, ऐसे में वे लोग एक दिन पहले ही जान बचाने के लिए झारखण्ड में आश्रय ले लिया। इधर भाजपाइयों के साथ इतनी बड़ी घटना घट रही है, और झारखण्ड की भाजपा सरकार को इसकी कोई सुध नहीं है, वह इस संबंध में न तो बंगाल सरकार से सवाल-जवाब कर रही है और न ही इनको सुविधाएं ही मुहैया करा रही है।