अपनी बात

सावधानः ये नये भाजपा कार्यकर्ता हैं, ये बंद के दौरान आम नागरिकों-पत्रकारों को गाली भी देते हैं और तिरंगा यात्रा के दौरान अपनी ही महिला कार्यकर्ताओं की लाठी से पिटाई भी कर देते हैं

ये भाजपा कार्यकर्ताओं को आजकल क्या हो गया है, कभी ये आम नागरिकों/पत्रकारों को गालियां दे देते हैं। कभी ये आपस में ही उलझ कर अपनी ही महिला कार्यकर्ताओं को लाठी से पीट डालते हैं। जब मीडियाकर्मी इनकी कुकृत्यों का जब विजुअल उठाते हैं, तो उनको विजुअल उठाने से रोकते हैं। आखिर ये भाजपा के कार्यकर्ता इतने बदतमीज कैसे होते जा रहे हैं? ऐसा करने से क्या भाजपा को फायदा होगा या इनका भट्ठा बैठेगा?

11 अगस्त को भाजपा ने झारखण्ड बंद का आह्वान किया था। इसी दौरान हजारीबाग में बंद समर्थकों ने एक पत्रकार के साथ अपमानजनक शब्द का प्रयोग कर दिया। जिसको लेकर पत्रकार और भाजपा कार्यकर्ताओं में जमकर कहा सुनी हो गई। उक्त पत्रकार ने तो भाजपा कार्यकर्ताओं को यहां तक कह दिया कि क्या लोकतंत्र में इसी तरह के आचरण किये जाते हैं? क्या बंद के दौरान भाजपा कार्यकर्ता किसी को भी गाली देकर आक्रोश व्यक्त करेंगे।

इधर हजारीबाग का गाली कांड खत्म नहीं हुआ। दूसरी ओर धनबाद में भाजपा कार्यकर्ता आपस में भिड़ गये। बताया जा रहा है कि धनबाद में आज तिरंगा यात्रा निकालने के दौरान भाजपा कार्यकर्ता अमरजीत कुमार और रीता यादव आपस में भिड़ गये। जहां महिला कार्यकर्ता की लाठी से पिटाई कर दी गई। जब ये दोनों आपस में भिड़े हुए थे। तो वहां उपस्थित पत्रकारों ने इनका विजुअल लेना शुरु किया। जिस पर वहां उपस्थित भाजपा कार्यकर्ताओं ने विजुअल लेने से पत्रकारों को मना किया और पत्रकारों से भी भिड़ने की कोशिश की। लेकिन जल्द ही मामला सलटा लिया गया।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि झारखण्ड बंद के दौरान हजारीबाग में आम नागरिकों के साथ गाली-गलौज और धनबाद में तिरंगा यात्रा के दौरान एक महिला कार्यकर्ता की पिटाई, साफ बता रहा है कि भाजपा में कितनी गिरावट आई है। अगर यह गिरावट पर रोक नहीं लगा तो आनेवाले समय में भाजपा के नाम पर रोनेवाला तक नहीं मिलेगा। इसलिए भाजपा के मठाधीशों को चाहिए कि वे अपने कार्यकर्ताओं को धीर-गंभीर और अनुशासित बनाएं, नहीं तो पार्टी की दुर्दशा तय है।

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