घंटी बजानेवाला ब्राह्मण बुड़बक और चाचा नेहरु चोरों का प्रधानमंत्री

खूंटी के आदिवासी बहुल इलाकों में नये-नये टीचर पैदा हुए हैं, ये टीचर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर बच्चों के मन में बचपन से ही वह सब चीज डाल दे रहे हैं ताकि जब ये बड़े हो तो खुद ही भारत की कब्र खोद दें, जरा देखिये ये पढ़ा क्या रहे हैं? और बच्चे पढ़ क्या रहे हैं? ये टीचर नन्हे-मुन्ने बच्चों को पढ़ा रहे है कि ‘घ’ से ‘घंटी’ और ‘घंटी’ का वाक्य है – घंटी बजानेवाला ब्राह्मण बुड़बक है।

खूंटी के आदिवासी बहुल इलाकों में नये-नये टीचर पैदा हुए हैं, ये टीचर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर बच्चों के मन में बचपन से ही वह सब चीज डाल दे रहे हैं ताकि जब ये बड़े हो तो खुद ही भारत की कब्र खोद दें, जरा देखिये ये पढ़ा क्या रहे हैं? और बच्चे पढ़ क्या रहे हैं?


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ये टीचर
नन्हे-मुन्ने बच्चों को पढ़ा रहे है कि से घंटी और घंटी का वाक्य है – घंटी बजानेवाला ब्राह्मण बुड़बक है। ड. से अंग और अंग का वाक्य है – अंगअंग में रुढ़ि व्यवस्था है। से चोर और चोर का वाक्य है – चाचा नेहरु चोरों का प्रधानमंत्री था।

आखिर ये कौन लोग हैं? जो बच्चों के दिमाग में विष बो रहे हैं, जो बच्चों के मन में सामाजिक विषमता का बीजारोपण कर रहे हैं, जो अपने ही देश के महापुरुषों से ऩफरत करने का पाठ पढ़ा रहे हैं, हम बताते हैं, ये कोई दूसरे नहीं बल्कि सभी अपने हैं और फिलहाल विदेशी मिशनरियों के हाथों के खिलौने बन गये हैं और ये वह सब काम कर रहे हैं, जिससे भारत को खतरा उत्पन्न होता है, ये बहुत ही आराम से नक्सलवाद और मिशनरियों के साम्राज्य का विस्तार करने में लगे हैं, जिसमें पत्थलगड़ी ने उनके इस काम को और गति दे दी हैं।

आश्चर्य है ये मंदिर और ब्राह्मणों को तो खूब गालियां दे रहे हैं, पर ये पादरियों और चर्च के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोलते, ऐसा क्यों नहीं करते, इस पर ज्यादा दिमाग लगाने की जरुरत नहीं। आश्चर्य इस बात की है, पूर्व में पत्थलगड़ी का काम पाहन किया करते थे, पर अब पत्थलगड़ी का काम इन इलाकों में पादरियों ने संभाल लिया है।

खूंटी के कई इलाकों में जहां-जहां पत्थलगड़ी चल रहे हैं, वहां अब सरकारी स्कूलों में बच्चे नहीं दिखाई पड़ रहे हैं और इन बच्चों को पढाने का काम उन इलाकों में युवाओं ने संभाल लिया हैं और वे हर प्रकार का विषवमन कर रहे हैं, जिससे भारत की एकता और अखंडता को खतरा उत्पन्न हो जाये। जानकार मानते है कि चूंकि कुछ महीने पहले राज्य सरकार ने धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए जो विधेयक लाया था, उस विधेयक के कारण कई इलाकों में धर्मांतरण में लगे ईसाई मिशनरियों को बहुत बड़ा धक्का लगा है। जिससे वे एक नये तरीके से राज्य सरकार को चुनौती देने में लगे है।

इधर पत्थलगड़ी को लेकर अब हर जगहों पर दो गुट बन गये हैं, एक गुट जो पत्थलगड़ी में लगे लोगों का समर्थन कर रहा है, तो दूसरा गुट पत्थलगड़ी के इस प्रकार के नये प्रचलन का विरोध कर रहा है, दोनों गुट अब आमने-सामने है, स्थितियां बिगड़े इसके पहले सरकार को चेत जाने की जरुरत है। कुछ लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि पत्थलगड़ी में लगे लोग राष्ट्रविरोधी है, अब ये एक तरह से सिद्ध हो गया है, क्योंकि जिस तरह की बात बच्चों को पढ़ाई जा रही है, वह साफ बताता है कि पत्थलगड़ी की आड़ में खूंटी में किस प्रकार विषवमन किया जा रहा है? किस प्रकार नफरत के बीज बोये जा रहे है? और किस प्रकार देश को खतरे में डाला जा रहा हैं? अगर ऐसे लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो देश व झारखण्ड को नुकसान पहुंचना तय है।

Krishna Bihari Mishra

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