अगले महीने टाटा स्टील से अवकाश प्राप्त कर लेंगी बचेन्द्री पाल, मीडियाकर्मियों से मिलकर शुक्रिया अदा की

ऐसा कौन भारतीय होगा, जो बचेन्द्री पाल को नहीं जानता होगा? बचेन्द्री पाल भारत की पहली माउंट एवरेस्ट विजेता है, जिन्हें उनकी इस शानदार उपलब्ध के लिए भारत के राष्ट्रपति ने पहले पद्मश्री और फिर उसके बाद पद्मभूषण से नवाजा, बचेन्द्री पाल जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील में कई वर्षों तक कार्यरत रही और अगले महीने वो अवकाश भी प्राप्त कर लेंगी।

ऐसा कौन भारतीय होगा, जो बचेन्द्री पाल को नहीं जानता होगा? बचेन्द्री पाल भारत की पहली माउंट एवरेस्ट विजेता है, जिन्हें उनकी इस शानदार उपलब्ध के लिए भारत के राष्ट्रपति ने पहले पद्मश्री और फिर उसके बाद पद्मभूषण से नवाजा, बचेन्द्री पाल जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील में कई वर्षों तक कार्यरत रही और अगले महीने वो अवकाश भी प्राप्त कर लेंगी।

अपने इस कार्य के दौरान बचेन्द्री पाल सभी लोगों का दिल जीता, अपने आचरण, व्यवहार, कार्यकुशलता सभी में प्रवीण बचेन्द्री पाल ने दिखा दिया कि कैसे जिया जाता है? बचेन्द्री पाल अपने अवकाश ग्रहण करने के पूर्व  मीडियाकर्मियों के साथ गेट-टूगेदर की, जिसमें बड़ी संख्या में जमशेदपुर के मीडियाकर्मी और उनके प्रशंसक शामिल हुए।

उनके बारे में बहुत सारे मीडियाकर्मी, बहुत सारे किस्से सुनाते हैं, जो एक से बढ़कर एक हैं। लोग बताते है कि देश में बचेन्द्री पाल ने माउंट एवरेस्ट विजेताओं की एक श्रृंखला तैयार कर दी है, और नहीं लगता कि अवकाश प्राप्त लेने के बाद भी वे शांत रहेंगी, वह अपने जीवन को और बेहतर करने तथा देश की सेवा में लगा देंगी। बचेन्द्री पाल बताती है कि आज वो जो भी हैं, उसमें उनके माता-पिता, और टाटा स्टील की बहुत बड़ी भूमिका रही हैं, वह मीडियाकर्मियों को भी इसका श्रेय देना नहीं भूलती।

बचेन्द्री पाल, ऐसे तो किसी परिचय का मोहताज नहीं, फिर भी यह जानना आवश्यक है कि उनका सफर कैसा रहा है? बचेन्द्री पाल ने 1984 में माउंट एवरेस्ट पर अपना परचम लहराया था। माउंट एवरेस्ट पर फतह करनेवाली बचेन्द्री पाल पहली भारतीय थी, जिसे देख-सुन प्रत्येक भारतीय गौरवान्वित हो उठा। बचेन्द्री पाल के इस अद्भुत प्रतिभा से प्रभावित टाटा स्टील ने एक एडवेंचर फाउंडेशन ही बना डाला और बचेन्द्री पाल उसकी मुख्य प्रशासकीय अधिकारी बना दी गई। टाटा स्टील ने ऐसा कर एक महिला का ही गौरव नहीं बढ़ाया, बल्कि महिला सशक्तिकरण में उसके इस कदम की सभी ने खुलकर सराहना की।

एडवेंचर के कई कारनामों को अपने जीवन गाथा में लिख चुकी बचेन्द्री पाल, हाल ही में नमामि गंगे परियोजना में भी भाग लिया और गंगा के किनारे बसे कई शहरों में जाकर, सफाई अभियान चलाया। इस दौरान वो हमेशा नदी की जल-धाराओं में ही अपने यात्राओं को जारी रखा। बचेन्द्री पाल थार रेगिस्तान में भी अपना जादू बिखेर चुकी है। हाल ही में बचेन्द्री पाल ने प्रेमलता अग्रवाल को भी माउंट एवरेस्ट विजेता बनाने में भरपूर मदद की।

अगले महीने वो टाटा स्टील से अवकाश प्राप्त कर लेगी, अवकाश प्राप्त करना जीवन की सच्चाई है, जो कहीं ज्वाइन करता है, उसे उसी दिन पता भी लग जाता है कि किस दिन अवकाश प्राप्त करना है, बचेन्द्री पाल ने अपने साहसिक कारनामों से लोगों को बता दिया कि है, वो टाटा स्टील से अवकाश प्राप्त की है, बाकी जिंदगी में उनके साहसिक कारनामें इसी तरह जारी रहेंगी।

Krishna Bihari Mishra

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