राजनीति

बाबूलाल मरांडी का हेमन्त सरकार पर आरोप एक अधिकारी बनने के लिए 40 लाख रुपये रेट निर्धारित, सीआईडी के मनोज कौशिक को भी हड़काया कहा पूर्व के दुलरुआ अधिकारियों का देख ले हश्र

भाजपा प्रदेश मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करने के क्रम में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा गड़बड़ी मामले में सीआईडी जांच के बहाने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सीआईडी जांच सच को सामने लाने के लिए नहीं, बल्कि सच का सबूत मिटाने के लिए किया जा रहा है। राज्य सरकार ही सारा गड़बड़ करवा रही है। राज्य सरकार का मतलब मुख्यमंत्री होता है। अगर मुख्यमंत्री मामले में पूरी तरह पाक-साफ हैं तो उन्हें सीबीआई जांच से आपत्ति क्यों है? मुख्यमंत्री को तुरंत पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए। यह सुनियोजित घोटाला है, जो युवाओं का भविष्य चौपट कर रहा है।

श्री मरांडी ने कहा कि देखने सुनने में बहुत ही अच्छा लग रहा है कि राज्य सरकार बहुत ही त्वरित कार्रवाई कर रही है। परंतु सब केवल लीपापोती के सिवाय कुछ नहीं है। राज्य के नौजवानों के साथ अन्याय किया गया, यह बहुत बड़ा क्राइम है। सीआईडी जांच छात्रों को न्याय दिलाने के लिए नहीं बल्कि छात्रों के साथ अन्याय करने वाले माफियाओं को बचाने के लिए की जा रही है। क्योंकि सत्ता में बैठे लोग भली-भांति जानते हैं कि जिस दिन इस मामले की निष्पक्ष जांच हो जाएगी, सारे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और इसके लपेटे में पर्दे के  पीछे छिपे तमाम लोग गिरफ्त में होंगे। इसलिए इस जांच के नाम पर  आई वाश किया जा रहा है।

श्री मरांडी ने कहा कि शराब घोटाले से लेकर जेएसएससी सीजीएल सहित अन्य मामलों में सीआईडी जांच के ट्रैक रिकॉर्ड का मूल्यांकन कर लीजिए, सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और सीआईडी जांच की विश्वसनीयता का पता चल जाएगा। सीआईडी कभी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती, यह चार्जशीट तक दाखिल तक नहीं कर पाती। दारू घोटाले में कागजों का जिस प्रकार हेर फेर किया गया, इस मामले में भी पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते के यहां छापामारी व अन्य सारी कार्रवाई, सब इसी की कवायद भर है। सीआईडी वाले सारे प्रूफ को समाप्त करने के लिए छापा मार रहे हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि जेपीएससी घोटाला मामले में एफआईआर किसके बयान पर किया गया, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है। एफआईआर अभी तक पब्लिक डोमेन में नहीं होने और एफआईआर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड नहीं किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जानबूझकर एफआईआर को कमजोर किया जा रहा है ताकि दोषियों को इसका लाभ मिल सके। जहां इतनी बड़ी गड़बड़ी हो रही है, इस प्रकार की चूक सुनियोजित है।

उन्होंने सीआईडी के अपर महानिदेशक मनोज कौशिक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मनोज कौशिक अभी मुख्यमंत्री के काफी चहेते अफसर बने हुए हैं, इन्हें तीन-तीन पदों पर रखा गया है। कोयला, बालू सहित अन्य खनिज संपदा में उगाही का काम इन्हीं के जिम्मे में है। उन्होंने मनोज कौशिक को सलाह दिया कि आप सीएम के पहले दुलरुआ अफसर नहीं हैं। विनय चौबे और अनुराग गुप्ता भी सीएम के काफी दुलरुआ रह चुके हैं। आज उनका क्या हश्र है, यह बताने की जरूरत नहीं। अगर आप गड़बड़ करेंगे तो आपका भी हश्र इन्हीं अफसर जैसा होगा। उन्होंने कहा कि सीआईडी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करें।

श्री मरांडी ने कहा कि कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी में ही JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को पत्र लिखकर OMR शीट में गड़बड़ी और TDPL के कर्मचारी अभय तिवारी की कारस्तानी के संबंध में बतलाया था। इसके पूर्व भी रेंज अफसर की परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी उन्हें थी। दोनों मामलों में उन्होंने कुछ भी कार्रवाई नहीं की। केवल इस्तीफा देकर ये कैसे मुक्त हो सकते हैं? सरकार को एल. ख्यांग्ते के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

श्री मरांडी ने झारखंड में एक अफसर बनने के लिए 40 लाख रुपए घूस ली जाती है। उनके पास जो जानकारी है उसके अनुसार पीटी परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख, मेन्स परीक्षा के लिए 25 लाख रुपये और साक्षात्कार पास कराने के लिए 10 लाख रुपये यानि कुल 40 लाख वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने सभी जगह पर ऐसे ही भ्रष्ट अफसरों की तैनाती कर रखी है। जेएसएससी में सुधीर गुप्ता ऐसे ही भ्रष्ट हैं। उन्होंने पूर्व मुख्य परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि झारखंड में जहां अधिकारियों को पैदा किया जाता है, उनका चयन होता है अगर इस संस्थान में करप्ट लोग बैठे रहेंगे तो फिर झारखंड का भविष्य कभी नहीं सुधरेगा। जिस जेपीएससी में प्रदेश के बच्चों का भविष्य टिका होता है, वहीं से सरकारी पदाधिकारी चयन होकर आते हैं अगर वही करप्ट रहेगी तो फिर कभी भी झारखंड की धरती पर अच्छे अफसर नहीं आ पाएंगे। जब बुनियाद ही अगर करप्ट हो तो झारखंड में करप्शन से कैसे बचा जा सकेगा। सरकार जानबूझकर ऐसे क्षमताहीन पदाधिकारी को पदस्थापित करती है। इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआई जांच आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इस्तीफा से कुछ नहीं होता है। जिस प्रकार जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष से अभी इस्तीफा दिलवाया गया, इसी प्रकार पूर्व में नीरज सिन्हा का भी इस्तीफा लिया गया था, इसका कोई फलाफल निकला क्या? पूर्व में भी जेएसएससी सीजीएल में गड़बड़ी की जांच सीआईडी से ही कराया गया था, उसका क्या फलाफल निकला?  सीआईडी, सरकार की कठपुतली होती है। डीजीपी भी कभी सीआईडी की समीक्षा नहीं करती हैं। दारू में आज तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुआ, इसकी कोई समीक्षा नहीं हुई। सर्वोच्च पदों पर करप्ट लोगों को बिठाकर रखना है तो फिर भगवान ही झारखंड का मालिक है। इसलिए बिना विलंब किए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूरे मामले की जांच सीबीआई को सुपुर्द करें। ताकि बच्चों का भविष्य अंधकारमय नहीं हो। और जो भी दोषी हों, उन पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार में कोई भी भर्ती परीक्षा विवाद से परे नहीं है। यहां खुलेआम नौकरियां बेची जा रही है। सारा कुछ राज्य सरकार के संरक्षण में किया जा रहा है। इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित रहे।

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